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जनधन खातों में बीते सात दिनों में 1487 करोड़ और जमा हुए
एजेंसी/नई दिल्ली
Updated Sun, 04 Dec 2016 11:50 PM IST
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नोटबंदी के तुरंत बाद जनधन खातों में जमा राशि में अचानक आई बढ़ोतरी के बाद अब इसमें स्थिरता आ गई है। 30 नवंबर को समाप्त सप्ताह में इन खातों में केवल 1487 करोड़ रुपये जमा हुए। इससे पहले के सप्ताह में इन खातों में 8283 करोड़ रुपये जमा हुए थे।
इस तरह 30 नवंबर तक 25.85 करोड़ जन धन खातों में कुल 74321.55 करोड़ रुपये की राशि थी।नोटबंदी की घोषणा के बाद से 23 नवंबर के बीच इन खातों में 25.68 करोड़ रुपये जमा हुए। 9 नवंबर को इन खातों में 45,636.61 करोड़ रुपये की राशि जमा थी।
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इस तरह 30 नवंबर तक 25.85 करोड़ जन धन खातों में कुल 74321.55 करोड़ रुपये की राशि थी।नोटबंदी की घोषणा के बाद से 23 नवंबर के बीच इन खातों में 25.68 करोड़ रुपये जमा हुए। 9 नवंबर को इन खातों में 45,636.61 करोड़ रुपये की राशि जमा थी।
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माइक्रो एटीएम, पीओएस साइबर हमले से खतरा
केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद माइक्रो-एटीएम और पीओएस काउंटर के बढ़ते इस्तेमाल के मद्देनजर देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन ने ग्राहकों, बैंकरों और व्यापारियों को इन प्रणालियों पर मालवेयर हमलों को लेकर आगाह किया है। एजेंसी ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उनसे उच्च एनक्रिप्शन तकनीक को अपनाने के लिए कहा है।
हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने और भारतीय इंटरनेट डोमेन की सुरक्षा को मजबूत करने वाली नोडल एजेंसी सीईआरटी-इन ने माइक्रो-एटीएम (ऑटोमेटेड ट्रेलर मशीन) और पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) प्रणाली को लेकर दो परामर्श जारी किए हैं।
परामर्श में कहा गया है कि माइक्रो-एटीएम बहुत कम बिजली से चलते हैं और जीपीआरएस नेटवर्क के जरिए बैंकों के सर्वरों से जुड़ते हैं। एजेंसी ने ऐसे नेटवर्क की सुरक्षा विशेषताओं को मजबूत बनाने और अपडेट करने की जरूरत पर बल दिया है ताकि लोगों और बैंकों की गोपनीय जानकारी को हैक होने से बचाया जा सके।
हैकिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकने और भारतीय इंटरनेट डोमेन की सुरक्षा को मजबूत करने वाली नोडल एजेंसी सीईआरटी-इन ने माइक्रो-एटीएम (ऑटोमेटेड ट्रेलर मशीन) और पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) प्रणाली को लेकर दो परामर्श जारी किए हैं।
परामर्श में कहा गया है कि माइक्रो-एटीएम बहुत कम बिजली से चलते हैं और जीपीआरएस नेटवर्क के जरिए बैंकों के सर्वरों से जुड़ते हैं। एजेंसी ने ऐसे नेटवर्क की सुरक्षा विशेषताओं को मजबूत बनाने और अपडेट करने की जरूरत पर बल दिया है ताकि लोगों और बैंकों की गोपनीय जानकारी को हैक होने से बचाया जा सके।