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Jamshed J Irani: क्रिकेट को लेकर दीवाने थे स्टील मैन जेजे ईरानी, शिक्षा के लिए उठाए कई कदम

Tue, 01 Nov 2022 02:24 PM IST
Jeet Kumar एन. अर्जुन, कोलकाता
एन. अर्जुन, कोलकाता Published by: Jeet Kumar Updated Tue, 01 Nov 2022 02:24 PM IST
सार

डॉ. जेजे ईरानी की शैक्षणिक सुविधा की गुणवत्ता में सुधार के लिए वर्ष 2003 में टाटा एजुकेशन एक्सीलेंस प्रोग्राम शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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Jamshed J Iran loved cricket very much, also worked in the field of education
जमशेद जे ईरानी - फोटो : Twitter

विस्तार

डॉ. जेजे ईरानी आज हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने जमशेदपुर सहित देश के लिए जो कुछ किया, उसे देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण देकर सम्मानित किया। उन्होंने शिक्षा और खेल के लिए बहुत कुछ किया। बहुत कम लोग जानते होंगे कि उन्हें क्रिकेट से बहुत प्यार था। लोग बताते हैं कि वे अंतिम समय तक क्रिकेट खेलते रहे। इसके साथ ही गुणवत्तात्मक शिक्षा के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया। 

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इसके अलावा उनको टिकट एकत्रित करना और सिक्का जमा करने का भी उन्हें शौक था। वे देश से तो खास प्यार करते ही थे लेकिन जमशेदपुर और यहां के लोगों के लिए उनके दिल में खास जगह थी। उनकी प्रेरणा से यहां के लोगों के लिए बहुत से काम किए गए, जिन्हें यहां के लोग आजीवन भूल नहीं पाएंगे। शैक्षणिक सुविधा की गुणवत्ता में सुधार के लिए वर्ष 2003 में टाटा एजुकेशन एक्सीलेंस प्रोग्राम शुरू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. जेजे ईरानी उनका जन्म 2 जून, 1936 को हुआ था। 
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वर्ष 1956 में साइंस कॉलेज, नागपुर से विज्ञान में स्नातक की। वर्ष 1958 में नागपुर विश्वविद्यालय से भू-विज्ञान में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री हासिल की। उन्होंने यूके में भी शिक्षा ग्रहण की। 1963 में उन्होंने पीएचडी की। डॉ ईरानी ने वर्ष 1963 में शेफील्ड में ब्रिटिश आयरन एंड स्टील रिसर्च एसोसिएशन के साथ अपने पेशेवर करियर की शुरुआत की। 
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वर्ष 1968 में तत्कालीन टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (अब टाटा स्टील) में सहायक के रूप में शामिल होने के लिए भारत लौटे और अनुसंधान एवं विकास के प्रभारी निदेशक बने। वह 1978 में जनरल सुपरिटेंडेंट, 1979 में जनरल मैनेजर और 1985 में टाटा स्टील के प्रेसिडेंट बने। वह 1988 में टाटा स्टील के संयुक्त प्रबंध निदेशक, 1992 में प्रबंध निदेशक बने। वर्ष 1981 में डॉ ईरानी टाटा स्टील के बोर्ड में शामिल हुए। वर्ष 2001 से एक दशक तक गैर-कार्यकारी निदेशक भी रहे। 


टाटा स्टील और टाटा संस के अलावा डॉ ईरानी ने टाटा मोटर्स और टाटा टेलीसर्विसेज सहित टाटा समूह की कई कंपनियों में निदेशक के रूप में भी काम किया। भारत-ब्रिटिश व्यापार और सहयोग में उनके योगदान के लिए मानद नाइटहुड की उपाधि दी गई। उद्योग में उनके योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उनकी सेवाओं को देखते हुए उन्हें 2008 में भारत सरकार ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।

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