Jammu Kashmir: पूर्व राज्यपालों के 'सिक्योरिटी' कवर को लेकर MHA से पूछे गए सवालों का मिला ये जवाब
Jammu Kashmir: गृह मंत्रालय ने जवाब दिया कि किसी भी व्यक्ति या पूर्व राज्यपाल को जो सुरक्षा मुहैया कराई जाती है, उसका आधार सुरक्षा एजेंसी द्वारा किया गया 'खतरे का मूल्यांकन' होता है। यह सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी, उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की होती है, जहां पर संबंधित व्यक्ति या पूर्व राज्यपाल रहते हैं...
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जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपालों को किस तरह का सिक्योरिटी कवर मिला है, उन्हें कितने समय तक सुरक्षा दी जाती है और अभी तक कितने सेवानिवृत्त राज्यपालों को सुरक्षा मिल रही है, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन सवालों का जवाब कुछ अनोखे तरीके से दिया है। दिल्ली के रहने वाले रजनीश कपूर ने केंद्रीय गृह मंत्रालय में 'आरटीआई' के माध्यम से उक्त जानकारी मांगी थी। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी में रजनीश कपूर के सवालों का जवाब देने की जगह यह बता दिया गया कि पूर्व राज्यपाल या किसी अन्य व्यक्ति को सुरक्षा कैसे दी जाती है। उसके क्या प्रावधान हैं।
पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बताया था जान का खतरा
पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर सहित चार प्रदेशों के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने अपनी जान को खतरा बताया था। पाकिस्तान के आतंकी समूह, जिनके गुर्गे कश्मीर घाटी में मौजूद हैं, पूर्व राज्यपाल मलिक उन्हीं के शॉप शूटरों के निशाने पर बताए जाते हैं। मलिक के कार्यकाल के दौरान ही जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 खत्म किया गया था। उसके बाद से ही वे आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जब वे जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे, तभी मिलिट्री इंटेलिजेंस ने इनपुट दिया था कि उन्हें शार्प शूटर निशाना बना सकते हैं। उसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस सुरक्षा विंग ने भी उनकी सुरक्षा को पुख्ता बनाने की बात कही। मलिक की सुरक्षा को लेकर जेएंडके प्रशासन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अलर्ट किया था। अब वे राज्यपाल के पद से हट चुके हैं, इसलिए उनके पास किसी भी श्रेणी का सिक्योरिटी कवर नहीं है।
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आरटीआई में पूछी गई थी यह जानकारी
रजनीश कपूर ने आरटीआई के माध्यम से पूछा था, देश में रिटायरमेंट के बाद कुल कितने राज्यपालों को सुरक्षा मिल रही है। रिटायरमेंट के बाद राज्यपालों को किस श्रेणी की सुरक्षा मिलती है। कितने समय तक सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है। जम्मू-कश्मीर के कुल कितने सेवानिवृत्त राज्यपालों को सुरक्षा मुहैया प्रदान की गई है। साथ ही पूर्व राज्यपालों को किस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जा रही है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपालों को कितनी अवधि तक सिक्योरिटी कवर प्रदान किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की 'आईएस-1 डिवीजन/वीआईपी सिक्योरिटी यूनिट' द्वारा आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि रजनीश कपूर का आवेदन 16 मार्च को मिला था। उसमें छह सवालों का जवाब मांगा गया था।
गृह मंत्रालय ने दिया यह जवाब
किसी भी व्यक्ति या पूर्व राज्यपाल को जो सुरक्षा मुहैया कराई जाती है, उसका आधार सुरक्षा एजेंसी द्वारा किया गया 'खतरे का मूल्यांकन' होता है। यह सुरक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी, उस राज्य या केंद्रशासित प्रदेश की होती है, जहां पर संबंधित व्यक्ति या पूर्व राज्यपाल रहते हैं। राज्य सरकार के पास खुद का वह मेकेनिज्म होता है, जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति को किस तरह का खतरा है, यह पता लगाया जाता है। खतरे का मूल्यांकन किया जाता है। इस आधार पर किसी व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान की जाती है। राज्य सरकार या यूटी प्रशासन द्वारा संबंधित व्यक्ति/पूर्व राज्यपाल को दी गई सुरक्षा की समीक्षा भी की जाती है। केंद्र सरकार भी इसी तर्ज पर किसी व्यक्ति या पूर्व राज्यपाल को सुरक्षा प्रदान करती है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए 'खतरे के मूल्यांकन' के आधार पर किसी व्यक्ति को जेड प्लस, जेड, वाई प्लस, वाई और एक्स, श्रेणी का सुरक्षा कवर मुहैया कराया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए गए सिक्योरिटी कवर की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।
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सत्यपाल मलिक पर आईईडी हमले का खतरा!
पिछले साल बुलंदशहर में एक निजी कार्यक्रम में पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा था, मुझे पाकिस्तान के आतंकी संगठनों की ओर से जान का खतरा है। इस बाबत मैंने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अवगत कराया था, मगर सुरक्षा नहीं दी गई। इतना ही नहीं, मलिक को टारगेट पर रख पाकिस्तान की ओर से आईईडी (तात्कालिक विस्फोटक यंत्र) एक्सपर्ट भी कश्मीर घाटी में भेजे गए थे। सत्यपाल मलिक, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के लिए पीएम की मोदी की सराहना कर चुके हैं। ये अलग बात है कि वे किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करने से नहीं चूके थे। उन्होंने अग्निवीर योजना को, युवाओं के साथ धोखा बताया था। मलिक ने सार्वजनिक तौर पर यह बात कही थी कि मुझे पाकिस्तान से जान का खतरा है, मगर गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा प्रदान नहीं की गई। तकरीबन सभी राज्यपालों को दिल्ली में आवास मिलता है, लेकिन केंद्र सरकार ने उन्हें सरकारी मकान अलॉट नहीं किया। इसके लिए बाकायदा उन्होंने कई बार संबंधित मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी।
पांच कुर्तों में गया था, वही लेकर लौटा हूं
पूर्व राज्यपाल ने भ्रष्टाचार बाबत कहा था कि मेरे खिलाफ कोई जांच नहीं हो सकती। कोई मुकदमा नहीं हो सकता। मैं पांच कुर्ते लेकर राजभवन गया था और पांच कुर्ते वापस लेकर घर लौटा हूं। मैं तो फकीर हूं। जेएंडके से बतौर राज्यपाल मलिक का तबादला होने के बाद उनके द्वारा भ्रष्टाचार को लेकर किए गए एक खुलासे ने हड़कंप मचा दिया था। मलिक ने कहा था कि जब वह जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल थे, तब दो फाइलों को मंजूरी देने की एवज में उन्हें 300 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की गई थी। इसमें उन्होंने 'अंबानी' और 'आरएसएस से जुड़े एक नेता की तरफ इशारा किया था। हालांकि मलिक ने उन फाइलों को मंजूरी नहीं दी थी। बाद में मलिक के आरोपों की जांच, सीबीआई से कराने के आदेश जारी हो गए। जम्मू-कश्मीर प्रशासन की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दी थी। राज्यपाल पद से हटने के बाद इस वर्ष के शुरू में सीबीआई मुख्यालय में मलिक से पूछताछ की गई थी। उन्होंने आरएसएस से जुड़े एक शख्स और पीडीपी और भाजपा गठबंधन की सरकार में मंत्री रहे एक व्यक्ति की ओर इशारा किया था। सीबीआई द्वारा मामले की जांच अभी जारी है।
मलिक को झेलने पड़े थे कई तबादले
सत्यपाल मलिक को 30 सितंबर, 2017 को पहली बार बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। एक साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्हें 23 अगस्त 2018 को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बना दिया गया। उसी दौरान मलिक को कुछ महीनों के लिए ओडिशा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उन्हें मेघालय का राज्यपाल बनाकर भेज दिया गया। सत्यपाल मलिक को एक साल में तीन तबादले झेलने पड़े थे। किसानों के मुद्दे पर खासे मुखर हुए मलिक ने कई बार सार्वजनिक मंच से केंद्र सरकार और पीएम मोदी पर निशाना साधा था। इसके बाद मलिक ने पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में उनकी प्रशंसा भी की। उन्होंने लिखा, पीएम मोदी का सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व पर लाल किला में आयोजित समारोह में भाग लेना, एक सराहनीय कदम है। पीएम के इस कदम से सिख समुदाय में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ी है। सिखों के गुरुओं के प्रति प्रधानमंत्री ने जो श्रद्धा भाव एवं सम्मान व्यक्त किया है, उसके लिए पूरी दुनिया के और विशेषकर भारत के सिखों को एक सकारात्मक संदेश मिला है। किसान आंदोलन के दौरान मलिक ने राज्यपाल होते हुए केंद्र को कई बार सलाह दे डाली थी। उन्होंने कहा, सरकार को सिखों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। केंद्र उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे।
जब मलिक बोले, मैं इन पदों की परवाह नहीं करता
मेघालय के राज्यपाल होते हुए जब सत्यपाल मलिक, हरियाणा के जींद में आयोजित एक सम्मान समारोह में शिरकत करने पहुंचे तो उन्होंने केंद्र को खरी खरी बात सुना दी थी। मलिक ने सार्वजनिक मंच से किसानों को संबोधित करते हुए कहा, वे पहले सवालों को समझें। सबसे पहले राज बदलें, फिर एकजुट होकर अपनी सरकार बनाएं। मलिक ने किसान आंदोलन को सही बताया था। लाल किला पर 'निशान साहिब' फहराए जाने की घटना को मलिक ने गलत नहीं कहा था। उन्होंने कहा, राज्यपाल के पद पर उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे खुद देशभर का दौरा कर, किसानों को एकजुट करेंगे। उनके कुछ मित्रों ने सलाह दी थी कि वह उपराष्ट्रपति या राष्ट्रपति बन सकते हैं, इसलिए उन्हें चुप रहना चाहिए। बतौर मलिक, मैंने उन्हें कह दिया था कि मैं इन पदों की परवाह नहीं करता। उनके लिए राज्यपाल का पद महत्वपूर्ण नहीं है। उन्होंने अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया। अनुच्छेद 370 खत्म करने के बाद मलिक ने कहा था, जब यह निर्णय लिया गया तो राजनीतिक बवाल मच गया था। पीडीपी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने खून की नदियां बहने की बात कही थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला ने कहा था, अब देश का झंडा कोई नहीं उठाएगा।