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जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा बिल लोकसभा में पास, अमित शाह ने कहा- यादगार क्षण
Wed, 23 Sep 2020 01:35 AM IST
मुकेश कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Wed, 23 Sep 2020 01:35 AM IST
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
लोकसभा में मंगलवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से संबंधित आधिकारिक भाषा बिल पास हो गया। इसमें कश्मीरी, डोगरी और हिंदी के अलावा मौजूदा उर्दू और अंग्रेजी को भी रखा गया है। बिल पेश करते हुए गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने चौंकाने वाली जानकारी दी।
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मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उर्दू बोलने वाले केवल 0.16 फीसदी लोग हैं, फिर भी पिछले 70 सालों से यह आधिकारिक भाषा बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर के लोगों की यह मांग थी कि जो भाषा वह बोलते हैं, उन्हें आधिकारिक भाषा का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के 53.26 फीसदी लोग कश्मीरी बोलते हैं। वहीं 26.64 फीसदी लोग डोगरी बोलते हैं। वहीं केंद्र शासित प्रदेश में 2.36 फीसदी लोग हिंदी बोलते हैं।
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बिल पास होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए यादगार क्षण है।
अमित शाह ने ट्वीट कर कहा, 'जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा (संशोधन) विधेयक का लोक सभा में पारित होना जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है। इस ऐतिहासिक बिल से जम्मू कश्मीर के लोगों का लंबे समय से प्रतीक्षित सपना सच हो गया है! कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी अब जम्मू कश्मीर की आधिकारिक भाषाएं होंगी।'
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A momentous day for the people of J&K as Jammu Kashmir Official Languages (Amendment) Bill was passed in Lok Sabha. Kashmiri, Dogri, Urdu, Hindi and English will now be the official languages of J&K: Home Minister Amit Shah pic.twitter.com/48eMJI3bgr
— ANI (@ANI) September 22, 2020
गृह मंत्री ने दूसरे ट्वीट में कहा, 'इस अभूतपूर्व विधेयक के माध्यम से 'गोजरी', 'पहाड़ी' और 'पंजाबी' जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए विशेष प्रयास किया जाना भी प्रस्तावित है। साथ ही इस बिल से जम्मू कश्मीर कला, संस्कृति तथा भाषा अकैडमी जैसे अन्य वर्तमान संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ किया जाएगा।'
इसके अलावा उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में कहा, 'यह बिल जम्मू-कश्मीर की संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की कटिबद्धता को दर्शता है, इसके लिए उनका आभार व्यक्त करता हूं। साथ ही मैं जम्मू-कश्मीर के बहनों और भाइयों को विश्वास दिलाता हूं कि मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के गौरव को वापस लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।'