मुखबिरों के डबल क्रॉस ने बढ़ाया सेना का सिरदर्द, शहीद हो गए सेना के जवान
जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजों और आतंकियों का सहयोग करने वाले कुछ स्थानीय लोगों के अलावा अब खबरी भी सेना का नया सिरदर्द बन गए हैं। इन खबरियों के कारण ही पिछले कुछ समय में सेना को आतंकियों के खिलाफ आपरेशन के दौरान अपने कई बहादुर जवानों से हाथ धोना पड़ा।
मेल टूडे की खबर के अनुसार स्थानीय स्तर पर सेना के खबरी लगताार डबल क्रॉस कर रहे हैं, वह सेना की गतिविधियों की जानकारी आतंकियों तक पहुंचा रहे हैं जिसकी वजह से सेना को तो ऑपरेशन चलाने में दिक्कत हो ही रही है उसकी कई टीमों को भी आतंकी निशाना बनाने में सफल हो रहे हैं।
सेना के सूत्रों के अनुसार बीते दिनों हाजिन और शोपियां में स्थानीय खबरियों ने सेना को जो भी सूचनाएं दी वो जानबूझकर गलत दी गई थीं। इसकी वजह से सेना को अपने छह जवानों की जान गंवानी पड़ी और मात्र एक आतंकी मारा गया।
ताजा मामले में दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में 44 राष्ट्रीय रायफल के तीन जवान शहीद हो गए जबकि एक गंभीर रूप से घायल हुआ।
यह हमला तब हुआ जब कुंगू गांव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर सेना की एक टुकड़ी उनकी तलाश में निकली थी। मौके पर उनके हाथ कुछ नहीं लगा तो पैट्रोलिंग टीम वापस लौटने लगी, इसी दौरान आतंकियों ने पूरी तैयारी के साथ उन पर हमला बोल दिया।
मुखबिरों की दगाबाजी ने बढ़ाई सेना की चिंता
इस घटना ने सेना के लिए खतरे की घंटी बजा दी, क्योंकि यह नये तरह का खतरा है जिससे सेना को जूझना पड़ रहा है। असल में कश्मीर के आतंक प्रभावित इलाकों में सेना के मुखबिर उसके महत्वपूर्ण सूचना तंत्र के रूप में काम करते हैं और वो ही अगर दगाबाजी करने लगें तो फिर सेना के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती हैं। मुखबिरों की इन गलत सूचनाओं के कारण पिछले दस दिनों में सेना के दो बड़े अभियान फेल हो गए।
बीते 14 फरवरी को बांदीपोरा के हाजिन इलाके में सेना के तीन जवान शहीद हो गए जबकि 15 गंभीर रूप से घायल हुए। सेना की एक टीम स्थानीय सूचना के आधार पर वहां आतंकियों की तलाश में गई थी, जो गलत निकली। लौटते समय रास्ते में आतंकियों ने घात लगाकर टुकड़ी पर हमला कर दिया। इस मुठभेड़ में एक आतंकी ही मारा गया जबकि सेना को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
जबकि शोपियां में हुई मुठभेड़ में सेना की एक टुकड़ी आंतकियों के एक ठिकाने को ध्वस्त करने के लिए निकली थी लेकिन कई घंटों की खोजबीन के बाद भी किसी आतंकी का सुराग नहीं मिल सका। रास्ते में लौटते समय आतंकियों ने उन पर धावा बोल दिया।
सेना के जवानों को फंसाने के लिए देते हैं गलत सूचना
सूत्रों के मुताबिक ये एक तरह का जाल है जिसमें सेना को फंसाने का षडयंत्र रचा जा रहा है। मुठभेड़ के दौरान जवानों को आने वाले खतरे का अंदाजा नहीं होता जबकि आतंकी पूरी तैयारी से हमला करते हैं।
शोपियां में हुए हमले की जिम्मेदारी तो हिजबुल मुजाहिदीन ने ली थी और एक वीडियो में उसके सदस्य हथियारों के साथ खुशी मनाते हुए नजर आ रहे थे।
वहीं बीते साल जुलाई में आतंकी बुरहान वाणी के बाद आतंकियों की यह नई रणनीति सेना के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है क्योंकि कई ऑपरेशन में सेना ने स्थानीय मुखबिरों का बखूबी इस्तेमाल कर सफलता पाई थी।
स्थानीय मुखबिरों के इस सूचना तंत्र की बदौलत सेना ने पिछले कुछ महीनों में 15-20 ऑपरेशन में दो दर्जन से ज्यादा आतंकियों को सफलतापूर्वक मार गिराया था। इसके अलावा सेना ने आंतकियों के बड़े नेटवर्क को भी ध्वस्त करने में सफलता हासिल की थी।