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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में GST बिल पास, पूरा हुआ 'वन नेशन, वन टैक्स' का सपना
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Wed, 05 Jul 2017 06:57 PM IST
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gst
- फोटो : सोशल मीडिया
जम्मू कश्मीर विधानसभा में जीएसटी पर प्रस्ताव पास हो गया है। जम्मू कश्मीर कैबिनेट अब राज्यपास को सिफारिशें भेजेगी, जो राष्ट्रपति के आदेश के बाद '6 जुलाई' से जम्मू कश्मीर राज्य में लागू हो जाएगा। इस तरह से जम्मू कश्मीर में जीएसटी के लागू होते ही 'वन नेशन, वन टैक्स' का सपना भी पूरा हो जाएगा।
जम्मू-कश्मीर में जीएसटी पूरे देश के साथ एक जुलाई को लागू नहीं हो पाया था। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को हासिल विशेष दर्जे की वजह से ऐसा हुआ। अब चूंकि जीएसटी बिल पर प्रस्ताव पेश हो चुका है और मंजूरी भी मिल चुकी है। ऐसे में राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद 6 जुलाई से राज्य में जीएसटी लागू हो जाएगा।
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GST: राष्ट्रपति के आदेश से J&K में 6 जुलाई से लागू होगा 'वन नेशन, वन टैक्स' का फॉर्मूला
दरअसल, जीएसटी को लागू करने के लिए अगर जम्मू कश्मीर में अलग कानून बनाया जाता तो भारतीय संविधान के दो चैप्टर में संशोधन की मजबूरी होती। उन संशोधनों से जम्मू कश्मीर को टैक्स लगाने का अधिकार देना एक जटिल सियासी प्रक्रिया होती जिससे पूरे देश में एक बखेड़ा खड़ा हो सकता था। जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 5 में भी संशोधन की जरूरत पड़ती जो संभव नहीं है। इस कारण राष्ट्रपति से आदेश से इसे लागू करना सबसे बेहतर कदम है।
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर का अपना अलग संविधान है और रियासत सरकार को टैक्स लगाने तथा उसकी वसूली का अधिकार हासिल है। इस व्यवस्था के कारण जम्मू कश्मीर में संविधान से 101वें संशोधन को सीधे लागू नहीं किया जा सकता था। ऐसे में राज्य के विशेष दर्जे को बरकरार रखने के लिए कारगर व्यवस्था की गई।
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J&K assembly adopts #GST resolution pic.twitter.com/vrTAVeOl4J
— ANI (@ANI_news) July 5, 2017विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर में जीएसटी पूरे देश के साथ एक जुलाई को लागू नहीं हो पाया था। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को हासिल विशेष दर्जे की वजह से ऐसा हुआ। अब चूंकि जीएसटी बिल पर प्रस्ताव पेश हो चुका है और मंजूरी भी मिल चुकी है। ऐसे में राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद 6 जुलाई से राज्य में जीएसटी लागू हो जाएगा।
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दरअसल, जीएसटी को लागू करने के लिए अगर जम्मू कश्मीर में अलग कानून बनाया जाता तो भारतीय संविधान के दो चैप्टर में संशोधन की मजबूरी होती। उन संशोधनों से जम्मू कश्मीर को टैक्स लगाने का अधिकार देना एक जटिल सियासी प्रक्रिया होती जिससे पूरे देश में एक बखेड़ा खड़ा हो सकता था। जम्मू कश्मीर के संविधान की धारा 5 में भी संशोधन की जरूरत पड़ती जो संभव नहीं है। इस कारण राष्ट्रपति से आदेश से इसे लागू करना सबसे बेहतर कदम है।
गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर का अपना अलग संविधान है और रियासत सरकार को टैक्स लगाने तथा उसकी वसूली का अधिकार हासिल है। इस व्यवस्था के कारण जम्मू कश्मीर में संविधान से 101वें संशोधन को सीधे लागू नहीं किया जा सकता था। ऐसे में राज्य के विशेष दर्जे को बरकरार रखने के लिए कारगर व्यवस्था की गई।