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जम्मू ड्रोन हमला: लश्कर के हाथ होने के संकेत, एटीसी-हेलिकॉप्टर थे निशाना

Tue, 29 Jun 2021 03:21 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 29 Jun 2021 03:21 AM IST
सार

  • शुरुआती जांच में खुलासा, करीब पांच किलो के बम थे, आइईडी तकनीक से विस्फोट

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Jammu Drone Attack Indications of Lashkar-e-Taiba  ATC Helicopters were the Target
जम्मू के एयरफोर्स बेस पर ड्रोन हमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू के एयरफोर्स बेस पर ड्रोन के इस्तेमाल से हुए दो धमाकों के पीछे पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तौयबा का हाथ होने के ठोस संकेत मिले हैं। शुरुआती जांच के मुताबिक आतंकियों का इरादा एयरबेस के एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर और वहां खड़े हेलिकॉप्टर को नुकसान पहुंचाना था। लेकिन दोनों धमाके लक्ष्य से करीब 40 फीट की दूरी पर हुए।

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मामले की जांच कर रही एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, दोनों बम करीब पांच किलो के थे, जिनमें आइईडी तकनीक से विस्फोट किया गया। अब तक की जांच के मुताबिक, मुख्य विस्फोटक के तौर पर आरडीएक्स और टीएनटी के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया। हालांकि इस तकनीक और मिश्रण को लेकर जांच जारी है। दोनों विस्फोट एक दूसरे से करीब 50 फीट की दूरी पर हुए। सूत्रों के मुताबिक ड्रोन अक्षांश-देशांतर (लॉन्गीट्यूड- लैटीट्यूट) तकनीक से ऑपरेट किया जा रहे थे और हवा के रुख और मौसम की वजह से अपने असली लक्ष्य से चूक गये।
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सूत्रों के मुताबिक, जम्मू एयरबेस से भारत-पाक सीमा की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि ड्रोन सीमा पार से भेजा गया होगा जो करीब डेढ़ किलोमीटर की उंचाई से उड़ता हुआ लक्ष्य तक पहुंचा। यह भी संभावना है कि इसे सीमा के भीतर से ही किसी गुप्त स्थान से भेजा गया हो। इसकी जांच जारी है। मुताबिक खास बात यह है कि विस्फोट के बाद ड्रोन का कहीं पता नहीं चला है।

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बढ़ाई गई सुरक्षा, सभी सैन्य कैंपों में अलर्ट
लगातार दो दिनों से ड्रोन हमलों के चलते सैन्य प्रतिष्ठानों में एंटी ड्रोन गन सहित कमांडो तैनात किए गए हैं। खतरे को देखते हुए किसी भी जगह ड्रोन उड़ता देख जवाबी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा सभी सेना मुख्यालयों, यूनिटों, कैंपों में जवानों को अलर्ट किया गया है। 



वायुसेना स्टेशन में भी एंटी ड्रोन गन वाले एनएसजी कमांडो तैनात किए गए हैं। हालांकि, सेना के प्रवक्ता ने कहा कि इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, लेकिन सभी कैंप अलर्ट पर जरूर रखे गए हैं। दो दिन से लगातार दो ड्रोन वारदातों से सुरक्षा को खतरा तो है ही और यह एक बड़ी चुनौती भी है। लिहाजा सेना पूरी तरह से अलर्ट है और हर संभव कोशिश की जा रही है। उधर, कालूचक मिलिट्री स्टेशन की घटना को लेकर सोमवार को पुलिस ने कुंजवानी, पुरमंडल मोड़, बाड़ी ब्राह्मणा, रत्नूचक, नेशनल हाईवे आदि पर वाहनों को रोक कर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस और सेना ने मिलकर इन तमाम जगहों पर तलाशी अभियान चलाया है। 

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