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एयरफोर्स बेस पर हमला: आईसीएम के निदेशक साहनी बोले- यह प्रॉक्सी वॉर का नया अध्याय, पाक संगठनों की खुली चुनौती

Tue, 29 Jun 2021 03:50 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Tue, 29 Jun 2021 03:50 AM IST
सार

  • कश्मीर में चल रही प्रॉक्सी वॉर में मनोवैज्ञानिक तौर पर ऐसे हमले दुश्मन के लिए कारगर हथियार साबित हो सकते हैं
  • जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से आतंक निरोधी ऑपरेशन का फैसला लिया जा रहा

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Jammu Air Force Base Attack ICM Director Sahni said Drone attack a new chapter of proxy war
ड्रोन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

पाकिस्तान में पल रहे आतंकी तंत्र ने जम्मू एयरफोर्स बेस पर ड्रोन से हमला कर सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों को ही चकमा नहीं दिया है बल्कि जम्मू-कश्मीर में चल रहे प्रॉक्सी वॉर मे नया अध्याय शुरू किया है। इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट (आईसीएम) के निदेशक और सुरक्षा विशेषज्ञ अजय सहनी ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि भारत-पाक सीमावर्ती इलाके में अब तक ड्रोन से ड्रग्स और हथियार गिराए जा रहे थे। लेकिन एयर बेस जैसे सुरक्षित इलाके में ड्रोन से विस्फोट करना पहली बार हुआ है।

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अजय सहनी के मुताबिक, बड़े और तकनीकी तौर पर उन्नत ड्रोन अमेरिका, इस्राइल समेत सभी देश कर रहे हैं। भारत के पास उससे आक्रमण और हमले से सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था है। लेकिन यह लो-लेवल, लो कॉस्ट ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो सकते हैं। क्यूंकि नीचे उड़ने से यह रडार की जद में नहीं आ पाते।
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सहनी के मुताबिक, हालांकि विस्फोट की क्षमता को लेकर इसकी अपनी सीमाएं हैं। लेकिन कश्मीर में चल रही प्रॉक्सी वॉर में मनोवैज्ञानिक तौर पर ऐसे हमले दुश्मन के लिए कारगर हथियार साबित हो सकते हैं।
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सहनी ने बताया कि जिस तरह से पिछले कुछ महीनों में पाक समर्थित आतंकी संगठन ड्रोन का इस्तेमाल दूसरी कारगुजारियों में कर रहे थे उससे पूरी संभावना लग रही थी कि वह हमले में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरी बात कि इस तकनीक की घटती कीमत और उस कीमत में उन्नत तकनीक की उपलब्धता जम्मू-कश्मीर केआतंक निरोधी मुहीम में लगी एजेंसियों के लिए नयी मुसीबत साबित हो सकती है।

जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से बड़ी कार्रवाई की तैयारी
जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के मकसद से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद से शुरू हुई आतंकी वारदात ने केंद्र और सुरक्षा एजेंसियों को चिंता में डाल दिया है। बृहस्पतिवार के बाद से पहले छिटपुट हिंसक वारदात, फिर एसपीओ के परिवार वालों की हत्या, जम्मू में ड्रोन हमले के बाद कालुचक में दोबारा हमले की कोशिश, पुलिस और सुरक्षा बल को निशाना बनाने की खुफिया इनपुट के मद्देनजर केंद्र और प्रदेश स्तर पर विमर्श का दौर चल रहा है।


सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से आतंक निरोधी ऑपरेशन का फैसला लिया जा रहा है। इनमें सेना, अर्ध सैनिक बल, स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां नए सिरे से तालमेल बिठाकर काम करेंगी। ताकि किसी भी हालत में कोई चूक ना हो और प्रदेश में मौजूद भारत विरोधी तत्व और पाकिस्तान सुरक्षा बल की कार्रवाइयों को लेकर प्रोपेगंडा का इस्तेमाल ना कर सकें।

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