कश्मीर में फिर पैर जमाने की कोशिश में जैश-ए-मोहम्मद
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कश्मीर में तीन आतंकवादियों की मौत के बाद पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद एक बार फिर खबरों में है। पुलिस इसे जैश-ए-मोहम्मद के दोबारा कश्मीर घाटी में पैर जमाने की कोशिशों को 'बड़ा झटका' बता रही है। कश्मीर के त्राल में 15 जुलाई को तीन आतंकवादी मारे गए थे। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के बीच जैश के कथित नए ऑडियो संदेशों को लेकर चिंता भी है। इन संदेशों में जैश-ए-मोहम्मद ने कथित रूप से नए तरीके के हथियारों मसलन रसायन और दवाओं के जरिए भारत भर में हमलों की चेतावनी दी है।
सितंबर 2016 में कश्मीर के उड़ी स्थित सैन्य ठिकाने पर हुए हमले समेत कई हमलों के लिए जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार बताता है। उड़ी हमले में 18 सैनिकों की मौत हुई थी। जैश-ए-मोहम्मद को भारत, ब्रिटेन, अमरीका और संयुक्त राष्ट्र ने 'आतंकवादी' संगठनों की सूची में रखा है। जैश-ए-मोहम्मद ने कश्मीर घाटी में हुए हालिया हमलों की जिम्मेदारी ली है। स्थानीय अखबार 'द कश्मीर मॉनिटर' ने अल-उमर के प्रमुख मुश्ताक जरगर के हवाले से लिखा है, "अल-उमर और जैश-ए-मोहम्मद ने कश्मीर में आतंकवादी हमले किए और हम भविष्य में भी ऐसा ही करेंगे।"
इस बीच कथित रूप से जैश-ए-मोहम्मद के ऑडियो टेप में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है, जिसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद मोदी की हालिया इसराइल यात्रा, कथित गौरक्षकों के मुस्लिम युवक पर हमले और कश्मीर मुद्दे को लेकर मुस्लिमों को मोदी और योगी के खिलाफ 'उकसा' रहा है।
उड़ी हमले के पहले जैश-ए-मोहम्मद को जनवरी 2016 में पंजाब के पठानकोट स्थित वायु सेना ठिकाने और साल 2001 में भारतीय संसद पर हमले के लिए भी जिम्मेदार बताया जाता है। हालांकि पाकिस्तान ने साल 2002 में इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन रिपोर्टों के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मौलाना मसूद अजहर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बहावलपुर में रहता हैं।
भारत कई बार पाकिस्तान से अजहर के प्रत्यर्पण की मांग कर चुका है लेकिन पाकिस्तान सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए इस मांग को नामंजूर करता रहा है। दिसंबर 1999 में काठमांडू से इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाईजैक करने के बाद यात्रियों के बदले भारत ने अफगानिस्तान के कंधार में जिन आतंकवादियों को रिहा किया था, अजहर उनमें से एक था।
भारतीय अधिकारियों ने उसे साल 1994 में कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य होने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अजहर ने साल 2000 की शुरुआत में जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया। आरोप है कि इस संगठन ने कश्मीर में आत्मघाती हमलों की शुरुआत की। पठानकोट पर हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने जैश-ए- मोहम्मद के बहावलपुर और मुल्तान स्थित दफ्तरों पर छापे की कार्रवाई की। कुछ मीडिया रिपोर्टों में जानकारी दी गई कि अजहर और उसके भाई को भी हिरासत में लिया गया।
साल 2016 में जैश-ए-मोहम्मद के मुखपत्र अल-अलाम ने अपने प्रमुख पर प्रतिबंध लगवाने के भारत के प्रयासों पर संयुक्त राष्ट्र में रोक लगाने के लिए चीन का शुक्रिया अदा किया। अगर अजहर का नाम संयुक्त राष्ट्र की ब्लैकलिस्ट में शामिल हो जाता है तो उसकी संपत्ति जब्त हो जाएगी और उसके यात्रा करने पर प्रतिबंध लग जाएगा। अखबार ग्रेटर कश्मीर डेली के मुताबिक हाल में संगठन से जुड़े आतंकवादियों की मौत के बाद जैश-ए-मोहम्मद के प्रवक्ता मोहम्मद हसन शाह ने कहा, "वो बहादुरी से लड़े और पवित्र काम के लिए अपनी जान गंवाई।"
इंडिया टुडे वेबसाइट के मुताबिक मसूद अजहर ने अपने छद्म नाम 'सादी' से जारी ऑडियो टेप में 'युद्ध के नए हथियारों' के इस्तेमाल की अपील की। बेवसाइट के मुताबिक टेप में कहा गया कि बंदूक और ग्रेनेड जैसे पारंपरिक हथियारों के बजाए वाहन, बिजली, पेट्रोल, खाद और दवाओं का इस्तेमाल किया जाए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अजहर ने मोदी की हालिया इसराइल यात्रा पर नाराजगी जाहिर की और यहूदियों और हिंदुओं को अपना 'पहला दुश्मन' बताया। पठानकोट हमले के बाद जैश-ए- मोहम्मद ने अल-कलाम पर एक ऑडियो क्लिप जारी किया, जिसमें अपने 'जिहादियों' को काबू करने में भारतीय एजेंसियों की नाकामी का माखौल उड़ाया गया था।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कश्मीर के पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने जून के महीने में कश्मीर घाटी में हुए कई हमलों के लिए जैश-ए-मोहम्मद को जिम्मेदार बताया। फर्स्ट पोस्ट वेबसाइट के मुताबिक दक्षिण कश्मीर की पुलिस का कहना है कि पाकिस्तान के एक वांछित नागरिक का जैश-ए-मोहम्मद के लिए भर्ती करने में अहम रोल है। कश्मीर में 'हमला करो और भाग निकलो' संगठन की नई 'रणनीति' हो सकती है। हिंदी अखबार राष्ट्रीय सहारा के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में अजहर को 'आतंकवादी' घोषित करने के कदम को चीन बार-बार इसलिए रोकता है क्योंकि वो पाकिस्तान का संरक्षण करना चाहता है।
अखबार के मुताबिक पाकिस्तान के चीन के साथ रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर जिस तरह के रिश्ते विकसित हो रहे हैं, उसे लगता है कि पाकिस्तान को हर मोर्चे पर समर्थन करते दिखना जरूरी है।