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'एसआईआर है शाह इंस्टिगेटेड रिमूवल': कांग्रेस का दावा- 7.8 करोड़ नाम हटे, 5.43 करोड़ मतदाताओं पर लटकी तलवार
Sun, 20 Sep 2026 01:31 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 20 Sep 2026 01:31 PM IST
सार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, अब तक अलग-अलग चरणों में करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि सत्यापन पूरा नहीं होने पर और नाम हट सकते हैं।
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कांग्रेस सांसद जयराम रमेश
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस महासचिव (संचार) और सांसद जयराम रमेश ने मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर के पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। यह एसआईआर से पहले की मतदाता सूची के मुकाबले 13 फीसदी है।
जयराम रमेश ने एक्स पर जारी किए एक बयान में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने जून 2025 में बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया का पहला चरण शुरू किया था। इसके बाद नवंबर 2025 में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में इसका दूसरा चरण शुरू किया गया।
उन्होंने कहा कि एसआईआर का तीसरा चरण 2026 के मध्य में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। इस चरण में अब तक 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों के आधार पर 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का 17 फीसदी से अधिक है।
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5.43 करोड़ मतदाताओं को नोटिस का दावा
कांग्रेस नेता के मुताबिक, इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी कर मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। उनका दावा है कि इससे 15 फीसदी और मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है।
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता कैसे हो सकते हैं, जिनका अभी भी 'वेरिफिकेशन' किया जाना बाकी है। उन्होंने इसे पूरी एसआईआर प्रक्रिया की ढांचागत खामियों से जोड़ते हुए कहा कि यह असामान्य रूप से बहुत बड़ा अनुपात है।
हर तीन में से एक मतदाता पर असर का दावा
जयराम रमेश ने कहा कि नाम हटाए जाने और नाम हटने के खतरे वाले मतदाताओं को मिलाकर करीब 32 फीसदी मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। यानी लगभग हर तीन में से एक मतदाता का नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिया गया है या उसके हटाए जाने का खतरा है।
कांग्रेस नेता ने पेश किए एसआईआर प्रक्रिया के राज्यवार आंकड़े
उन्होंने कहा कि दिल्ली में 53.73 फीसदी, चंडीगढ़ में 52.58 फीसदी, तेलंगाना में 48.90 फीसदी, झारखंड में 39.57 फीसदी, हरियाणा में 37.5 फीसदी, उत्तराखंड में 35.71 फीसदी, मेघालय में 35.36 फीसदी, महाराष्ट्र में 33.88 फीसदी, कर्नाटक में 27.6 फीसदी, ओडिशा में 23.67 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 21.17 फीसदी और पंजाब में 15.23 फीसदी लोगों पर नाम हटाए जाने का खतरा है।
कुछ राज्यों में सूची सार्वजनिक करने का जिक्र
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की गई है, जिनके नाम हटाए जाने का खतरा है, ताकि वे अपना 'वेरिफिकेशन' पूरा कर सकें। उनके अनुसार, दिल्ली में यह सूची 19 सितंबर 2026 को सार्वजनिक की गई और वह भी जनता के दबाव के बाद। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब ने अब तक ऐसी सूची सार्वजनिक नहीं की है।
कमजोर और वंचित वर्गों के मतदाताओं पर असर का दावा
जयराम रमेश ने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में बड़े पैमाने पर जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें भारी बहुमत समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाले लोगों का है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश बड़े राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम मतदाता सूची से अधिक हटाए गए हैं।
'नागरिकों पर दस्तावेज देने का बोझ डाला गया'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और नागरिकों पर ऐसे दस्तावेज पेश करने का बोझ डाल दिया है, जो संभव है कि उन्हें सरकार ने कभी उपलब्ध ही नहीं कराए हों। उन्होंने कहा कि जिस कसौटी पर देश के अधिकांश नागरिक खरे नहीं उतर सकते, वह वास्तव में लोगों को बाहर करने की एक मशीन भर है।
जयराम रमेश ने अपने बयान के आखिर में एसआईआर को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'एसआईआर असल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं का शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल है। यह हमारे संविधान पर हमला है।'
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जयराम रमेश ने एक्स पर जारी किए एक बयान में कहा कि भारत निर्वाचन आयोग ने जून 2025 में बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया का पहला चरण शुरू किया था। इसके बाद नवंबर 2025 में 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में इसका दूसरा चरण शुरू किया गया।
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उन्होंने कहा कि एसआईआर का तीसरा चरण 2026 के मध्य में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। इस चरण में अब तक 12 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों के आधार पर 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ के नाम हटाए गए हैं। यह कुल मतदाताओं का 17 फीसदी से अधिक है।
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5.43 करोड़ मतदाताओं को नोटिस का दावा
कांग्रेस नेता के मुताबिक, इसके अलावा 5.43 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी कर मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। उनका दावा है कि इससे 15 फीसदी और मतदाताओं के नाम हटाए जाने का खतरा है।
SIR is actually a Shah Instigated Removal of voters on a massive scale. Here is a statement on this brazen assault on our Constitution itself. pic.twitter.com/45Jt4xqZ7D
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 20, 2026
जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता कैसे हो सकते हैं, जिनका अभी भी 'वेरिफिकेशन' किया जाना बाकी है। उन्होंने इसे पूरी एसआईआर प्रक्रिया की ढांचागत खामियों से जोड़ते हुए कहा कि यह असामान्य रूप से बहुत बड़ा अनुपात है।
हर तीन में से एक मतदाता पर असर का दावा
जयराम रमेश ने कहा कि नाम हटाए जाने और नाम हटने के खतरे वाले मतदाताओं को मिलाकर करीब 32 फीसदी मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। यानी लगभग हर तीन में से एक मतदाता का नाम या तो मतदाता सूची से हटा दिया गया है या उसके हटाए जाने का खतरा है।
कांग्रेस नेता ने पेश किए एसआईआर प्रक्रिया के राज्यवार आंकड़े
उन्होंने कहा कि दिल्ली में 53.73 फीसदी, चंडीगढ़ में 52.58 फीसदी, तेलंगाना में 48.90 फीसदी, झारखंड में 39.57 फीसदी, हरियाणा में 37.5 फीसदी, उत्तराखंड में 35.71 फीसदी, मेघालय में 35.36 फीसदी, महाराष्ट्र में 33.88 फीसदी, कर्नाटक में 27.6 फीसदी, ओडिशा में 23.67 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 21.17 फीसदी और पंजाब में 15.23 फीसदी लोगों पर नाम हटाए जाने का खतरा है।
कुछ राज्यों में सूची सार्वजनिक करने का जिक्र
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कर्नाटक, तेलंगाना और झारखंड में उन मतदाताओं की सूची सार्वजनिक की गई है, जिनके नाम हटाए जाने का खतरा है, ताकि वे अपना 'वेरिफिकेशन' पूरा कर सकें। उनके अनुसार, दिल्ली में यह सूची 19 सितंबर 2026 को सार्वजनिक की गई और वह भी जनता के दबाव के बाद। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित अन्य राज्यों के साथ-साथ पंजाब ने अब तक ऐसी सूची सार्वजनिक नहीं की है।
कमजोर और वंचित वर्गों के मतदाताओं पर असर का दावा
जयराम रमेश ने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में बड़े पैमाने पर जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उनमें भारी बहुमत समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाले लोगों का है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश बड़े राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम मतदाता सूची से अधिक हटाए गए हैं।
'नागरिकों पर दस्तावेज देने का बोझ डाला गया'
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि एसआईआर के जरिए सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और नागरिकों पर ऐसे दस्तावेज पेश करने का बोझ डाल दिया है, जो संभव है कि उन्हें सरकार ने कभी उपलब्ध ही नहीं कराए हों। उन्होंने कहा कि जिस कसौटी पर देश के अधिकांश नागरिक खरे नहीं उतर सकते, वह वास्तव में लोगों को बाहर करने की एक मशीन भर है।
जयराम रमेश ने अपने बयान के आखिर में एसआईआर को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'एसआईआर असल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं का शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल है। यह हमारे संविधान पर हमला है।'