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Jagannath Rath Yatra: न कोई मशीन न प्रशिक्षण, फिर भी एक जैसा रथ बनाते हैं ओडिशा के पुरी में हर साल शिल्पकार
Tue, 28 Jun 2022 07:09 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 28 Jun 2022 07:09 AM IST
सार
12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से लेकर गुंडिचा मंदिर तक निकाले जाने वाली यात्रा इस साल एक जुलाई को होगी। शोधकर्ता असित मोहंती ने बताया, रथों का निर्माण हर साल नए सिरे से होता है। सदियों से इनकी ऊंचाई, चौड़ाई व अन्य मापदंडों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
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Jagannath Rath Yatra
- फोटो : iStock
विस्तार
तकनीक के इस दौर में शायद यह सुनकर थोड़ा अजीब लगे लेकिन सच यही है कि ओडिशा के पुरी में हर साल शिल्पकार बिना किसी मशीन या तकनीक का सहारा लिए एक जैसा रथ तैयार करते हैं। पारंपरिक तरीके से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा के लिए एक जैसे विशाल रथ तैयार करते हैं और यह तीन रथ अपनी शाही संरचना और शानदार शिल्पकला के चलते चर्चा में रहते हैं।
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12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से लेकर गुंडिचा मंदिर तक निकाले जाने वाली यात्रा इस साल एक जुलाई को होगी। शोधकर्ता असित मोहंती ने बताया, रथों का निर्माण हर साल नए सिरे से होता है। सदियों से इनकी ऊंचाई, चौड़ाई व अन्य मापदंडों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि शिल्पकारों को कोई प्रशिक्षण हासिल नहीं है। इनके पास केवल पारंपरिक तकनीक है, जो उन्हें उनके पूर्वजों से मिली है। रथों का निर्माण चार हजार से अधिक लकड़ी के टुकड़ों से किया गया है। इनके पास इसे बनाने का वंशानुगत अधिकार भी है।
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16 पहिये वाला है ‘नंदीघोष’ रथ
भगवान जगन्नाथ के 16 पहियों वाले ‘नंदीघोष’ रथ का निर्माण करने वाले विजय महापात्र कहते हैं, मैं चार दशक से रथ बना रहा हूं। मेरे पिता लिंगराज महापात्र ने इसका प्रशिक्षण दिया था। उन्होंने दादा अनंत महापात्र से यह कला सीखी थी। यह सदियों से चली आ रही परंपरा है, हम भाग्यशाली हैं कि हमें भगवान की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।रथों के निर्माण में केवल पारंपरिक उपकरण जैसे छेनी आदि का इस्तेमाल करते हैं।
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57 दिन में होते हैं तैयार
सदियों से हाट का आकार समान कैसे रहता है क्योंकि विभिन्न शिल्पकार के हाथों की लंबाई समान नहीं होती है? इस पर महापात्र ने कहा, मेरे पिता ने मुझे एक छड़ी दी है। इस छड़ी को एक हाट माना जाता है। यह 20 इंच के बराबर है। पच्चीस अंगुलियां ‘हाट’ बनाती हैं। हम इन उपायों का उपयोग रथों की ऊंचाई और चौड़ाई को मापने के लिए करते हैं।
रथ यात्रा में शामिल होने वालों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य
ओडिशा में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच एक जुलाई से शुरू होने वाली भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने वालों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य सेवा के निदेशक बिजय महापात्र ने कहा कि यात्रा में देश-विदेश से लगभग 10 लाख लोगों के आने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने भी पुरी में कोविड केयर सेंटर स्थापित किए हैं और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए ऑक्सीजन और आईसीयू बेड की व्यवस्था की गई है।