{"_id":"64f03e9a4a89f8ead0003ec5","slug":"itbp-jawans-celebrated-rakshabandhan-with-himalayan-border-people-2023-08-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"RakshaBandhan: चीन से लगती सीमा पर हिफाजत करने वाले ITBP हिमवीरों को किसने बांधी राखी, जवानों ने दिया ये वचन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
RakshaBandhan: चीन से लगती सीमा पर हिफाजत करने वाले ITBP हिमवीरों को किसने बांधी राखी, जवानों ने दिया ये वचन
Thu, 31 Aug 2023 02:30 PM IST
श्वेता महतो
डिजिटल ब्यूरो
डिजिटल ब्यूरो
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 31 Aug 2023 02:30 PM IST
सार
लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम की 4,000 से 16,000 फीट की ऊंचाई वाली सीमाओं के सैकड़ों सीमावर्ती गांवों और कई अंदरूनी इलाकों में स्थानीय आबादी ने आईटीबीपी के हिमवीरों के साथ राखी का त्योहार मनाया है।
विज्ञापन
Rakshabandhan
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश की हिमालयी सीमा की सीमावर्ती आबादी ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जांबाज हिमवीरों के साथ रक्षा बंधन मनाया। सीमावर्ती इलाकों की हजारों महिलाओं और लड़कियों ने आईटीबीपी के उन जवानों को राखी बांधी, जो भारत-चीन सीमा की पूरी 3,488 किलोमीटर की रक्षा करते हैं। लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम की 4,000 से 16,000 फीट की ऊंचाई वाली सीमाओं के सैकड़ों सीमावर्ती गांवों और कई अंदरूनी इलाकों में स्थानीय आबादी ने आईटीबीपी के हिमवीरों के साथ राखी का त्योहार मनाया है।
बॉर्डर एरिया के विकास में हिमवीरों की अहम भूमिका
बता दें कि आईटीबीपी 'हिमवीर' वह उपाधि है जो स्थानीय लोगों द्वारा इस बल के जवानों को दी गई है। वे जवान दशकों से सीमाओं की सुरक्षा के लिए कठिन इलाकों और मौसम की परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। इस वर्ष वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के शुभारंभ के बाद, यह रक्षा बंधन उत्सव और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। कार्यक्रम के पहले चरण में जिन 662 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है, वहां के विकास में आईटीबीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 अप्रैल, 2023 को अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में कार्यक्रम का शुभारंभ किया था।
2,967 गांवों में वीवीपी के तहत विकास
1962 में इस बल की स्थापना के बाद से ही आईटीबीपी को पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्रों में अन्य महत्वपूर्ण जागरूकता अभियानों के अलावा विकास, बचाव और राहत कार्यों, नागरिक कल्याण कार्रवाई व सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रमों के सभी प्रयासों को अंजाम देने वाले 'हिमालय के प्रहरी' के रूप में जाना जाता है। अपने सभी रैंकों में 90,000 से अधिक निपुण कार्मिकों के साथ, विशिष्ट पर्वत रक्षक बल के रूप में आईटीबीपी अतीत में भी हिमालय के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण रही है।
विज्ञापन
सीमावर्ती क्षेत्रों के त्वरित विकास पर नजर रखते हुए, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में 2,967 गांवों को वीवीपी के तहत व्यापक विकास के लिए पहचाना गया है।
अरुणाचल प्रदेश के 455 गांवों का विकास
वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के लिए भारत सरकार ने 4800 करोड़ रुपये के बजट के साथ वीवीपी को मंजूरी दी है। इसमें विशेष रूप से सड़क कनेक्टिविटी के लिए 2500 करोड़ चिन्हित किये गए हैं। पहले चरण में 662 गांवों की पहचान की गई है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के 455 गांव शामिल हैं। माना जाता है कि वीवीपी में पहचाने गए सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम लोगों को अपने मूल स्थानों पर रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे इन गांवों में पलायन पर रोक लगेगी और सीमा की सुरक्षा बढ़ेगी।
जिला प्रशासन, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर उचित तंत्र की मदद से, केंद्रीय और राज्य योजनाओं की 100% संतृप्ति सुनिश्चित करने के लिए चिन्हित गांवों के लिए कार्य योजना तैयार करेगा। गांवों के विकास के लिए पहचाने गए हस्तक्षेप के फोकस क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, सौर और पवन ऊर्जा, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्यटक केंद्र, बहुउद्देश्यीय केंद्र, स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे और कल्याण केंद्र शामिल हैं।
विज्ञापन
बॉर्डर एरिया के विकास में हिमवीरों की अहम भूमिका
बता दें कि आईटीबीपी 'हिमवीर' वह उपाधि है जो स्थानीय लोगों द्वारा इस बल के जवानों को दी गई है। वे जवान दशकों से सीमाओं की सुरक्षा के लिए कठिन इलाकों और मौसम की परिस्थितियों में देश की सेवा करते हैं। इस वर्ष वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के शुभारंभ के बाद, यह रक्षा बंधन उत्सव और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। कार्यक्रम के पहले चरण में जिन 662 सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है, वहां के विकास में आईटीबीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 10 अप्रैल, 2023 को अरुणाचल प्रदेश के किबिथू में कार्यक्रम का शुभारंभ किया था।
विज्ञापन
2,967 गांवों में वीवीपी के तहत विकास
1962 में इस बल की स्थापना के बाद से ही आईटीबीपी को पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्रों में अन्य महत्वपूर्ण जागरूकता अभियानों के अलावा विकास, बचाव और राहत कार्यों, नागरिक कल्याण कार्रवाई व सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रमों के सभी प्रयासों को अंजाम देने वाले 'हिमालय के प्रहरी' के रूप में जाना जाता है। अपने सभी रैंकों में 90,000 से अधिक निपुण कार्मिकों के साथ, विशिष्ट पर्वत रक्षक बल के रूप में आईटीबीपी अतीत में भी हिमालय के सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण रही है।
विज्ञापन
सीमावर्ती क्षेत्रों के त्वरित विकास पर नजर रखते हुए, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में उत्तरी सीमा से सटे 19 जिलों के 46 ब्लॉकों में 2,967 गांवों को वीवीपी के तहत व्यापक विकास के लिए पहचाना गया है।
अरुणाचल प्रदेश के 455 गांवों का विकास
वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2025-26 के लिए भारत सरकार ने 4800 करोड़ रुपये के बजट के साथ वीवीपी को मंजूरी दी है। इसमें विशेष रूप से सड़क कनेक्टिविटी के लिए 2500 करोड़ चिन्हित किये गए हैं। पहले चरण में 662 गांवों की पहचान की गई है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के 455 गांव शामिल हैं। माना जाता है कि वीवीपी में पहचाने गए सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी। यह कार्यक्रम लोगों को अपने मूल स्थानों पर रहने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे इन गांवों में पलायन पर रोक लगेगी और सीमा की सुरक्षा बढ़ेगी।
जिला प्रशासन, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर उचित तंत्र की मदद से, केंद्रीय और राज्य योजनाओं की 100% संतृप्ति सुनिश्चित करने के लिए चिन्हित गांवों के लिए कार्य योजना तैयार करेगा। गांवों के विकास के लिए पहचाने गए हस्तक्षेप के फोकस क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी, पेयजल, बिजली, सौर और पवन ऊर्जा, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी, पर्यटक केंद्र, बहुउद्देश्यीय केंद्र, स्वास्थ्य देखभाल बुनियादी ढांचे और कल्याण केंद्र शामिल हैं।