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राज्यसभा में उठा इलाहाबाद विश्वविद्यालय का मामला

Tue, 08 Mar 2016 11:35 PM IST
एजेंसी/नई दिल्ली
एजेंसी/नई दिल्ली Updated Tue, 08 Mar 2016 11:35 PM IST
सार

  • एबीवीपी संरक्षक की तरह काम कर रहीं स्मृति
  • शून्य प्रहर में इलाहाबाद विश्वविद्यालय का मामला
  • रिचा के खिलाफ दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए

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issue of allahabad university raise in rajya sabha
इलाहाबाद विश्वविद्यालय - फोटो : PTI

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति और छात्रसंघ अध्यक्ष रिचा सिंह से जुड़ा विवाद संसद पहुंच गया है। जनता दल यूनाइटेड के सांसद केसी त्यागी ने मंगलवार को राज्यसभा में शून्य प्रहर के दौरान यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि रोहित के बलिदान और कन्हैया एपिसोड के बाद अब यह मामला आगे बढ़ रहा है। रिचा के खिलाफ दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए हैं।

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त्यागी ने महिला के विरुद्ध अपराध, लैंगिक असंवेदनशीलता और वीसी के सत्तावादी रवैये पर बात रखी।  जदयू सांसद ने बताया कि रिचा ने उनसे मुलाकात की है। उसने इस मुद्दे पर सभी सांसदों को पत्र लिखा है। इस पर संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि छात्र आंदोलन, छात्र स्वतंत्रता और छात्रों पर हमला नहीं होना चाहिए।
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वह इस मसले को संबंधित मंत्री के संज्ञान में लाएंगे ताकि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किसी तरह का भेदभाव हुआ हो तो उचित कार्रवाई की जा सके।

किया जा रहा रिचा का चरित्र हनन

issue of allahabad university raise in rajya sabha
एबीवीपी संरक्षक की तरह काम कर रहीं स्मृति : विपक्ष - फोटो : PTI

दूसरी ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया कि हैदराबाद विश्वविद्यालय और जेएनयू के बाद एबीवीपी इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का भगवाकरण करना चाहती है। पार्टी ने भाजपा और संघ को विश्वविद्यालय से दूर रहने के लिए कहा है।

सीपीआई के महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष रिचा ने हाल ही में भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को कैंपस में आने की इजाजत नहीं दी थी। इसी के बदले में अब उसका चरित्र हनन किया जा रहा है।

रोहित वेमुला और जेएनयू विवाद के बाद विपक्षी दलों ने अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय को लेकर सरकार को निशाना बनाया है। कांग्रेस, लेफ्ट और आप समेत आठ दलों ने मंगलवार को संयुक्त बयान जारी कर कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी एबीवीपी के संरक्षक की तरह काम कर रही हैं। दलों ने मोदी सरकार पर रिचा सिंह को परेशान करने का आरोप लगाया है। बयान पर जनता दल यूनाइटेड, सपा, डीएमके और राजद के भी हस्ताक्षर हैं।

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