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ISRO: इसरो के मानव अंतरिक्ष अभियान की तैयारी तेज; गगनयान की उड़ान के लिए इंजन तैयार, मिशन एबॉर्ट परीक्षण सफल

Sat, 12 Jul 2025 04:03 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 12 Jul 2025 04:03 PM IST
सार

ISRO: इसरो ने गगनयान मिशन के लिए सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम का विकास सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इस सिस्टम का 350 सेकंड तक हॉट परीक्षण किया गया, जो मिशन एबॉर्ट जैसी स्थिति के लिए पूरी तरह सफल रहा। यह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। 

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ISRO successfully completes development of Service Module Propulsion System for Gaganyaan
सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम - फोटो : इसरो/आधिकारिक वेबसाइट

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को बताया कि उसने गगनयान मिशन के लिए सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम (एसएमपीएस) का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। इसके साथ ही इस सिस्टम के सभी जरूरी परीक्षण भी पूरे कर लिए गए हैं। शुक्रवार को इस सिस्टम का 350 सेकंड (करीब 6 मिनट) तक एक बड़ा परीक्षण किया गया। इसका मकसद यह देखना था कि अगर उड़ान के दौरान कोई गड़बड़ी हो जाए और मिशन को बीच में रोकना पड़े (जिसे 'मिशन एबॉर्ट' कहा जाता है), तो यह सिस्टम सही तरीके से काम करता है या नहीं।

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क्या काम करेगा सर्विस मॉड्यूल
गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है, जिस पर काम किया जा रहा है। इसरो ने एक बयान में कहा कि हॉट परीक्षण के दौरान प्रोपल्शन सिस्टम का प्रदर्शन पूर्वानुमानों के अनुसार सामान्य रहा। इसरो के मुताबिक, गगनयान के सर्विस मॉड्यूल में एक खास सिस्टम लगाया गया है जो दो तरह के ईंधन से चलता है। यह सिस्टम उस हिस्से को मदद करता है जो इंसानों को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा। इसका काम रॉकेट को सही कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचाना, उड़ान के दौरान दिशा को नियंत्रित करना, जरूरत पड़ने पर रॉकेट की गति को धीमा करना और अगर कोई गड़बड़ी हो जाए तो मिशन को बीच में रोककर अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाना है।
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सर्विस मॉड्यूल प्रोपल्शन सिस्टम को परखने के लिए मॉडल तैयार
इस सिस्टम में दो खास तरह के इंजन काम करते हैं - लिक्विड एपोजी मोटर (एलएएम) रॉकेट को उसकी सही कक्षा में लाने और फिर धीरे-धीरे नीचे लाने में मदद करते हैं। रिएक्शन कंट्रोल सिस्टम (आरसीएस) रॉकेट की दिशा को बहुत सटीक तरीके से नियंत्रित करता है। इसरो ने बताया कि एसएमपीएस को अच्छे से परखने के लिए एक मॉडल तैयार किया गया, जिसे सिस्टम डेमोंस्ट्रेशन मॉडल (एसडीएम) कहा जाता है। इस मॉडल में वह सभी हिस्से शामिल थे जो असली सिस्टम में भी होंगे - जैसे ईंधन टैंक से ईंधन भेजने वाला सिस्टम, हीलियम गैस का दबाव बनाए रखने वाला सिस्टम, उड़ान में काम करने वाले छोटे-छोटे इंजन (थ्रस्टर) और उन्हें नियंत्रित करने वाले उपकरण।


चार घंटे तक चले परीक्षण
इस मॉडल पर इसरो ने 25 बार अलग-अलग तरह के परीक्षण किए - कुछ सामान्य हालातों में और कुछ मुश्किल हालातों में। ये सारे परीक्षण कुल 14,331 सेकंड (करीब 4 घंटे) तक चले। इनका मकसद यह देखना था कि यह सिस्टम गगनयान मिशन के अलग-अलग चरणों और इंसान को सुरक्षित ले जाने की जरूरतों पर खरा उतरता है या नहीं।

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एलपीएससी में तैयार किया गया प्रोपल्शन सिस्टम
इसरो ने बताया कि यह प्रोपल्शन सिस्टम उसके लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) में डिजाइन किया गया, यानी इसकी योजना बनाई गई, बनाया गया और तैयार किया गया। इसके सभी परीक्षण तमिलनाडु के महेंद्रगिरी में स्थित इसरो के प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (आईपीआरसी) में किए गए, जहां रॉकेट के इंजन और उससे जुड़े सिस्टम की जांच और परीक्षण किए जाते हैं।

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