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ISRO: देश की अर्थव्यवस्था को पंख लगा रही स्पेस रिसर्च, 2033 में $44 बिलियन का कारोबार होने का अनुमान
Tue, 31 Dec 2024 08:54 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 31 Dec 2024 08:54 PM IST
सार
ISRO: अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा बढ़ रहा है। 2023 में यह कारोबार $8.4 बिलियन था, जो 2033 तक $44 बिलियन होने का अनुमान है। 2023 में इस क्षेत्र में निवेश ₹1000 करोड़ तक पहुंच गया है। इससे अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का नाम वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो गया है।
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अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्पेस रिसर्च में नित्य नई उपलब्धियों ने देश की अर्थव्यवस्था को भी पंख लगा दिए हैं। आने वाले समय में स्पेस रिसर्च से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम, भारत की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाएंगे। स्पेस कार्यक्रमों से 2023 में 8.4 यूएस बिलियन डॉलर का कारोबार हुआ तो वहीं 2033 तक यह कारोबार, $44 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। सात जनवरी को इसरो का स्पेस डॉकिंग एक्सपेरिमेंट, देश के अंतरिक्ष विज्ञान में मील का पत्थर साबित होगा। इसके बाद भारत अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक में अमेरिका, रूस और चीन की बराबरी कर लेगा। अभी तक इन तीन देशों के पास ही यह तकनीक है।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया, स्पैडेक्स मिशन इसरो की एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य दो छोटे उपग्रहों का उपयोग करके अंतरिक्ष यान के मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास और प्रदर्शन करना है। ये क्षमताएं भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें उपग्रह सर्विसिंग, अंतरिक्ष स्टेशन संचालन और अंतरग्रहीय अन्वेषण शामिल हैं।
बता दें कि 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी60 के सफल प्रक्षेपण के बाद नेशनल मीडिया सेंटर में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, स्पैडेक्स का मकसद, प्राथमिक उद्देश्यों में अंतरिक्ष यान के मिलन और डॉकिंग के लिए प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना है। इस तकनीक की मदद के जरिए स्पेस से कोई उपकरण वापस भी लाया जा सकता है। वहां पर पहले से मौजूद किसी उपकरण को रिप्लेस कर सकते हैं। जब उस उपकरण को वापस लाने में कामयाब होंगे तो यह पता चलेगा कि उसकी खराबी का कारण क्या था।
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अभी तक सेटेलाइट वहीं पर घूमता रहता था। अब राकेट की लास्ट स्टेज वहीं पर रहेगी। इसकी मदद से वहां लैब बनाई जा सकती है। निकट भविष्य में अधिक वजन वाले सेटेलाइट भेजने में मदद मिलेगी। अभी दो यान एक साथ छोड़े गए हैं। संभव है कि भविष्य में एक ही छोड़ा जाए। 2026 में मानव वाला यान अंतरिक्ष में जाएगा। इस मिशन में पोस्ट-डॉकिंग गतिविधियाँ भी शामिल रहेंगी। इसमें अंतरिक्ष यान स्वतंत्र पेलोड संचालन भी होगा। डॉकिंग प्रक्रिया 7 जनवरी, 2025 को दोपहर में होने की उम्मीद है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष में जीव विज्ञान के अनुप्रयोग का पता लगाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इसरो के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत अंतरिक्ष वातावरण में शारीरिक परिवर्तनों का अध्ययन करके 'स्पेस-बायोलॉजी' में नेतृत्व करेगा। देश की अंतरिक्ष यात्रा के बारे में डॉ. सिंह ने बताया, अब इसरो की गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति दी गई है। इसके चलते अंतरिक्ष स्टार्टअप में वृद्धि हुई है। 2023 में अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या लगभग 300 हो गई है। ये स्टार्टअप इसरो के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। स्पेसएक्स जैसी कंपनियों का वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा बढ़ रहा है। 2023 में यह कारोबार $8.4 बिलियन था, जो 2033 तक $44 बिलियन होने का अनुमान है। 2023 में इस क्षेत्र में निवेश ₹1000 करोड़ तक पहुंच गया है। इससे अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का नाम वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो गया है। जनवरी 2025 में नाविक प्रगति और फरवरी 2025 में मोबाइल संचार के लिए एक अमेरिकी उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा। 2026 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन संचालित होगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जक के रूप में उभरा है। विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से अर्जित €220 मिलियन में से, €187 मिलियन आय जो कुल आय का 85% हिस्सा है, वह पिछले आठ वर्षों में उत्पन्न हुआ था। इसरो की सेवाओं से लाभान्वित होने वाले देशों में अमेरिका, फ्रांस, जापान और अन्य शामिल हैं। उन्होंने कृषि, रक्षा, जल संसाधन प्रबंधन, स्मार्ट शहरों और बुनियादी ढांचे के विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विविध अनुप्रयोगों पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत की अंतरिक्ष और विज्ञान क्षमताएं अपने चरम पर हैं। आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में अद्वितीय उपलब्धियां और योगदान देखने को मिलेंगे।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को बताया, स्पैडेक्स मिशन इसरो की एक महत्वपूर्ण परियोजना है। इसका उद्देश्य दो छोटे उपग्रहों का उपयोग करके अंतरिक्ष यान के मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग के लिए प्रौद्योगिकियों का विकास और प्रदर्शन करना है। ये क्षमताएं भविष्य के मिशनों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनमें उपग्रह सर्विसिंग, अंतरिक्ष स्टेशन संचालन और अंतरग्रहीय अन्वेषण शामिल हैं।
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बता दें कि 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी-सी60 के सफल प्रक्षेपण के बाद नेशनल मीडिया सेंटर में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, स्पैडेक्स का मकसद, प्राथमिक उद्देश्यों में अंतरिक्ष यान के मिलन और डॉकिंग के लिए प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन करना है। इस तकनीक की मदद के जरिए स्पेस से कोई उपकरण वापस भी लाया जा सकता है। वहां पर पहले से मौजूद किसी उपकरण को रिप्लेस कर सकते हैं। जब उस उपकरण को वापस लाने में कामयाब होंगे तो यह पता चलेगा कि उसकी खराबी का कारण क्या था।
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अभी तक सेटेलाइट वहीं पर घूमता रहता था। अब राकेट की लास्ट स्टेज वहीं पर रहेगी। इसकी मदद से वहां लैब बनाई जा सकती है। निकट भविष्य में अधिक वजन वाले सेटेलाइट भेजने में मदद मिलेगी। अभी दो यान एक साथ छोड़े गए हैं। संभव है कि भविष्य में एक ही छोड़ा जाए। 2026 में मानव वाला यान अंतरिक्ष में जाएगा। इस मिशन में पोस्ट-डॉकिंग गतिविधियाँ भी शामिल रहेंगी। इसमें अंतरिक्ष यान स्वतंत्र पेलोड संचालन भी होगा। डॉकिंग प्रक्रिया 7 जनवरी, 2025 को दोपहर में होने की उम्मीद है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंतरिक्ष में जीव विज्ञान के अनुप्रयोग का पता लगाने के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग और इसरो के बीच एक महत्वपूर्ण सहयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत अंतरिक्ष वातावरण में शारीरिक परिवर्तनों का अध्ययन करके 'स्पेस-बायोलॉजी' में नेतृत्व करेगा। देश की अंतरिक्ष यात्रा के बारे में डॉ. सिंह ने बताया, अब इसरो की गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति दी गई है। इसके चलते अंतरिक्ष स्टार्टअप में वृद्धि हुई है। 2023 में अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या लगभग 300 हो गई है। ये स्टार्टअप इसरो के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। स्पेसएक्स जैसी कंपनियों का वैश्विक ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा बढ़ रहा है। 2023 में यह कारोबार $8.4 बिलियन था, जो 2033 तक $44 बिलियन होने का अनुमान है। 2023 में इस क्षेत्र में निवेश ₹1000 करोड़ तक पहुंच गया है। इससे अंतरिक्ष विज्ञान में भारत का नाम वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो गया है। जनवरी 2025 में नाविक प्रगति और फरवरी 2025 में मोबाइल संचार के लिए एक अमेरिकी उपग्रह का प्रक्षेपण किया जाएगा। 2026 में पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन संचालित होगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र एक महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा अर्जक के रूप में उभरा है। विदेशी उपग्रहों के प्रक्षेपण से अर्जित €220 मिलियन में से, €187 मिलियन आय जो कुल आय का 85% हिस्सा है, वह पिछले आठ वर्षों में उत्पन्न हुआ था। इसरो की सेवाओं से लाभान्वित होने वाले देशों में अमेरिका, फ्रांस, जापान और अन्य शामिल हैं। उन्होंने कृषि, रक्षा, जल संसाधन प्रबंधन, स्मार्ट शहरों और बुनियादी ढांचे के विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के विविध अनुप्रयोगों पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत की अंतरिक्ष और विज्ञान क्षमताएं अपने चरम पर हैं। आने वाले वर्षों में वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में अद्वितीय उपलब्धियां और योगदान देखने को मिलेंगे।