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ISRO: लॉन्च के बाद भी इस्तेमाल हो सकेंगे रॉकेट, इसरो कर रहा तैयारी, जल्द होगा पहला परीक्षण
Tue, 08 Nov 2022 06:55 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरु
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 08 Nov 2022 06:55 PM IST
सार
अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा, हम जलवायु को देख रहे हैं। जलवायु अभी भी अच्छी नहीं है। इसलिए, हम हवा और अन्य प्रणालियों के अनुकूल होने का इंतजार कर रहे हैं। फिर हम ऐसा करेंगे।
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- फोटो : पीटीआई
विस्तार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) कर्नाटक के चित्रदुर्ग जिले में एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज से रियूजेबल लॉन्च व्हीकल-टेक्नोलॉजी डेमोन्स्ट्रेटर (आरएलवी-टीडी) के पहले रनवे लैंडिंग एक्सपरिमेंट (आरएलवी-एलईएक्स) के लिए तैयार है। इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने मगलवार को इस ओर इशारा करते हुए कहा कि इसके लिए मौसम की निगरानी (मॉनिटरिंग) की जा रही है।
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अंतरिक्ष विभाग के सचिव सोमनाथ ने कहा, हम जलवायु को देख रहे हैं। जलवायु अभी भी अच्छी नहीं है। इसलिए, हम हवा और अन्य प्रणालियों के अनुकूल होने का इंतजार कर रहे हैं। फिर हम ऐसा करेंगे।
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इसरो के अधिकारियों के मुताबिक, आरएलवी के पार्ट्स को एक हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करके तीन से पांच किमी की ऊंचाई तक ले जाया जाएगा और फिर क्षैतिज वेग के साथ रनवे से करीब चार से पांच किमी की दूरी पर छोड़ा जाएगा। छोड़ने के बाद आरएलवी धीमी गति से आगे की ओर खिसकेगा जाएगा और रनवे की ओर नेविगेट करेगा। फिर लैंडिंग गियर के साथ चित्रदुर्ग के पास डिफेंस एयरफील्ड में उतरेगा।
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अंतरिक्ष एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि लैंडिंग गियर, पैराशूट, हुक बीम असेंबली, रडार अल्टीमीटर और स्यूडोलाइट जैसी नई प्रणालियों को विकसित किया गया है। इसके योग्य बनाया गया है।