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ISRO: चंद्रयान-3 मिशन की एक और सफलता, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पथ-प्रदर्शक की तरह करेगा काम
Fri, 19 Jan 2024 04:07 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलूरू
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 19 Jan 2024 04:07 PM IST
सार
एलआरओ, नासा का ऑर्बिटर है, जो चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। इस एलआरओ ने ही चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे एलआरए से मिले सिग्नल लेकर लेजर रेंज का मापन किया।
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चंद्रयान 3
- फोटो : Isro
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विस्तार
भारत के चंद्रयान-3 मिशन को एक और सफलता मिली है। दरअसल चंद्रयान-3 के लैंडर ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पथ प्रदर्शक की तरह काम करना शुरू कर दिया है। इसरो ने एक बयान जारी कर बताया कि चंद्रयान-3 मिशन के तहत चांद की जमीन पर उतरे लैंडर के साथ एक लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे (LRA) भी चांद पर भेजा गया था। अब इस उपकरण की मदद से अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के एलआरओ (Lunar Reconnaissance Orbiter) ने लेजर रेंज का मापन कर लिया है।
चांद पर जाने वाले मिशनों को मिलेगा बड़ा फायदा
एलआरओ, नासा का ऑर्बिटर है, जो चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। इस एलआरओ ने ही चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे एलआरए से मिले सिग्नल लेकर लेजर रेंज का मापन किया। इसरो ने बताया कि मापन का काम 12 दिसंबर 2023 को किया गया था। इसरो ने बताया कि एलआरओ ने रात के समय यह मापन किया, जब वह चंद्रयान-3 के लैंडर वाली जगह से पूर्व की तरफ बढ़ रहा था। अब इस मापन की मदद चांद पर भेजे जाने वाले मिशनों को काफी फायदा होगा।
चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे को नासा ने विकसित किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत चंद्रयान-3 के साथ चांद पर भेजा गया था। एलआरए में आठ कॉर्नर क्यूब रेट्रोरिफ्लेक्टर्स मौजूद हैं। इसकी मदद से प्रत्येक दिशा से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैडिंग जगह की पहचान हो सकेगी। एलआरए का वजन 20 ग्राम है, जो दशकों तक काम कर सकता है। चांद पर पहले भी कई एलआरए उपकरण मौजूद हैं, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 में लगा एलआरए एकमात्र है। इसकी मदद से भविष्य में स्पेसक्राफ्ट ऑर्बिटल पोजिशन का पता लगाया जा सकेगा। साथ ही चांद की सतह, आंतरिक संरचना और गुरुत्वाकर्षण की भी जानकारी मिल सकेगी।
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चांद पर जाने वाले मिशनों को मिलेगा बड़ा फायदा
एलआरओ, नासा का ऑर्बिटर है, जो चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है। इस एलआरओ ने ही चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे एलआरए से मिले सिग्नल लेकर लेजर रेंज का मापन किया। इसरो ने बताया कि मापन का काम 12 दिसंबर 2023 को किया गया था। इसरो ने बताया कि एलआरओ ने रात के समय यह मापन किया, जब वह चंद्रयान-3 के लैंडर वाली जगह से पूर्व की तरफ बढ़ रहा था। अब इस मापन की मदद चांद पर भेजे जाने वाले मिशनों को काफी फायदा होगा।
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चंद्रयान-3 के लैंडर पर लगे लेजर रेट्रोरिफ्लेक्टर एरे को नासा ने विकसित किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत चंद्रयान-3 के साथ चांद पर भेजा गया था। एलआरए में आठ कॉर्नर क्यूब रेट्रोरिफ्लेक्टर्स मौजूद हैं। इसकी मदद से प्रत्येक दिशा से चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैडिंग जगह की पहचान हो सकेगी। एलआरए का वजन 20 ग्राम है, जो दशकों तक काम कर सकता है। चांद पर पहले भी कई एलआरए उपकरण मौजूद हैं, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 में लगा एलआरए एकमात्र है। इसकी मदद से भविष्य में स्पेसक्राफ्ट ऑर्बिटल पोजिशन का पता लगाया जा सकेगा। साथ ही चांद की सतह, आंतरिक संरचना और गुरुत्वाकर्षण की भी जानकारी मिल सकेगी।
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