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चंद्रमा पर रोबोट लैंड कराने की तैयारी में है इसरो
अमर उजाला ब्यूरो, अलीगढ़
Updated Mon, 27 Feb 2017 11:31 AM IST
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इसरो
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चंद दिन पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक साथ रिकार्ड 104 सेटेलाइट का प्रक्षेपण कर इतिहास रचा था। अब फिर इतिहास रचने की तैयारी है। दो साल के अंदर चंद्रमा पर रोबोट लैंड कराने की तैयारी चल रही है। सब कुछ ठीक रहा तो यह रोबोट चंद्रमा पर पहली बार लैंड करेगा और घूमेगा। यह जानकारी भौतिकी शोध प्रयोगशाला, अहमदाबाद (गुजरात) के निदेशक एवं चंद्रयान-1 के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. जितेंद्र नाथ गोस्वामी ने पत्रकारों को दी।
भूगर्भ विज्ञान विभाग में सोमवार को आयोजित होने जा रहे एक कार्यक्रम के सिलसिले में एएमयू पहुंचे देश के विख्यात वैज्ञानिक डॉ. गोस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पेस रिसर्च में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। सरकार की ओर से स्पेस रिसर्च के लिए काफी सपोर्ट मिल रहा है। रिकार्ड 104 सेटेलाइट प्रक्षेपण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आगे और भी बहुत कुछ करना है। उन्होंने उस दिन की भी याद दिलाई जब भारत ने पहला इंस्टूमेंट रूस की धरती तथा उसकी सहायता से भेजा था।
उन्होंने कहा कि हम लोग ऊर्जा के लिए पूरी तरह सूर्य पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका एवं चीन छोटा रिएक्टर भेज देते हैं। इसलिए वे हमसे आगे हो जाते हैं।
शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड से सम्मानित डॉ. गोस्वामी ने कहा कि इसरो के कार्यों से सोसाइटी को लाभ हो रहा है। सेटेलाइट कम्युनिकेशन बहुत अच्छा हो गया है। रिमोर्ट सेंसिंग से मानीटरिंग बेहतर हुई है। इन्वायरमेंट की मानीटरिंग स्पेस से हो रहा है। मौसम की सटीक सूचना हमें पहले मिल जाती है। समुद्री उथल-पुथल की भी जानकारी हो जाती है। इस अवसर पर भूगर्भ विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. लियाकत एके राव मौजूद थे।
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भूगर्भ विज्ञान विभाग में सोमवार को आयोजित होने जा रहे एक कार्यक्रम के सिलसिले में एएमयू पहुंचे देश के विख्यात वैज्ञानिक डॉ. गोस्वामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पेस रिसर्च में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं। सरकार की ओर से स्पेस रिसर्च के लिए काफी सपोर्ट मिल रहा है। रिकार्ड 104 सेटेलाइट प्रक्षेपण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि आगे और भी बहुत कुछ करना है। उन्होंने उस दिन की भी याद दिलाई जब भारत ने पहला इंस्टूमेंट रूस की धरती तथा उसकी सहायता से भेजा था।
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उन्होंने कहा कि हम लोग ऊर्जा के लिए पूरी तरह सूर्य पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका एवं चीन छोटा रिएक्टर भेज देते हैं। इसलिए वे हमसे आगे हो जाते हैं।
शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड से सम्मानित डॉ. गोस्वामी ने कहा कि इसरो के कार्यों से सोसाइटी को लाभ हो रहा है। सेटेलाइट कम्युनिकेशन बहुत अच्छा हो गया है। रिमोर्ट सेंसिंग से मानीटरिंग बेहतर हुई है। इन्वायरमेंट की मानीटरिंग स्पेस से हो रहा है। मौसम की सटीक सूचना हमें पहले मिल जाती है। समुद्री उथल-पुथल की भी जानकारी हो जाती है। इस अवसर पर भूगर्भ विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. लियाकत एके राव मौजूद थे।
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