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मोसाद करेगी इस्रायली दूतावास के बाहर धमाके की जांच, जानें इस खुफिया एजेंसी के बड़े कारनामे

Sat, 30 Jan 2021 03:26 PM IST
स्नेहा बलूनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्नेहा बलूनी Updated Sat, 30 Jan 2021 03:26 PM IST
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Mossad to help Delhi Police in Israel embassy blast case
इस्रायल की जांच एजेंसी मोसाद (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

दिल्ली के लुटियंस इलाके में औरंगजेब रोड पर स्थित इस्रायली दूतावास के बाहर शुक्रवार शाम को बम विस्फोट हो गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम और खुफिया एजेंसियां मामले की जांच मे जुटी हुई हैं। सूत्रों के अनुसार भारतीय एजेंसियों के साथ इस्रायली जांच एजेंसी मोसाद भी जांच में सहयोग कर रहा है। इस्रायली अधिकारियों ने हमले के पीछे आतंकी हमले का अंदेशा जताया है। वहीं सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि मोसाद एजेंसी की स्थापना क्यों की गई थी। साथ ही हम आपको इसके पांच बड़े ऑपरेशन से भी अवगत कराएंगे।


कब हुई थी मोसाद की स्थापना
मोसाद की स्थापना 13 दिसंबर, 1949 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन-गूरियन की सलाह पर की गई थी। वे चाहते थे कि एक केंद्रीय इकाई बनाई जाए जो मौजूदा सुरक्षा सेवाओं- सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश के राजनीति विभाग के साथ समन्वय और सहयोग को बढ़ाने का कार्य करे। 1951 में इसे प्रधानमंत्री के कार्यालय का हिस्सा बनाया गया इसके प्रति प्रधानमंत्री की जवाबदेही तय की गई।

ये हैं मोसाद के पांच बड़े ऑपरेशन

Mossad to help Delhi Police in Israel embassy blast case
मोसाद पर बनी फिल्म का पोस्टर (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

खुदा का कहर
1972 में म्यूनिख ओलंपिक में इस्रायल ओलंपिक टीम के 11 खिलाड़ियों को उनके होटल में मार दिया गया था। इसका आरोप दो आतंकी संगठन पर लगा था। इस घटना से इस्रायली सरकार भड़क गई। इसके बाद मोसाद ने जो किया वो किसी फिल्म की तरह था। 11 लोग एजेंसी की हिट लिस्ट में थे। उसने फोन बम, नकली पासपोर्ट, उड़ती हुई कारें, जहर की सुई सब का इस्तेमाल किया। मोसाद एजेंटों ने कई देशों का प्रोटोकॉल तोड़ा और अपराधियों को चुन-चुन कर मारा। इसके लिए एजेंसी टारगेट के परिवार को एक बुके भेजते थे। जिसपर लिखा होता था- 'ये याद दिलाने के लिए कि हम ना तो भूलते हैं, ना ही माफ करते हैं।' ये ऑपरेशन बीस साल चला था। 

 

महमूद अल मबूह की हत्या

Mossad to help Delhi Police in Israel embassy blast case
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

मोसाद ने अल मबूह से 21 साल पुराना बदला लेते हुए उसकी 19 जनवरी 2010 को दुबई के होटल अल बुस्तान रोताना में हत्या कर दी थी। मबूह हमास के लिए हथियार की खरीद-बिक्री किया करता था। एजेंसी ने उसके पैरों में सक्सिनीकोलीन का इंजेक्शन दिया था जिससे वह पैरालाइज्ड (लकवा मारना) हो गया। इसके बाद उसके मुंह पर तकिया रखकर उसकी हत्या कर दी गई। बता दें कि अल मबूह फिलिस्तीनी ग्रुप हमास के मिलिट्री विंग का संस्थापक था। उसपर 1989 में दो इजराइली सैनिकों को मारने का आरोप था।

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70 गोलियां

Mossad to help Delhi Police in Israel embassy blast case
मोसाद पर बनी फिल्म का पोस्टर (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

फिलिस्तीन के नेता यासिर अराफात का दाहिना हाथ कहा जाने वाला खलील अल वजीर ट्यूनीशिया में रह रहा था। उसे अबू जिहाद भी कहा जाता था। वह मोसाद की हिट लिस्ट में था। इसके लिए 30 एजेंट काम पर लगे थे। वे पर्यटक बनकर ट्यूनीशिया पहुंचे। कुछ ट्यूनिशिया सेना की वर्दी में भी थे। इसके बाद सभी अबू के घर की तरफ पहुंचे। इस दौरान इस्रायल का जहाज बोइंग 707 शहर के ऊपर मंडरा रहा था। जिसने वहां के संचार माध्यमों को ब्लॉक कर दिया। फिर एजेंट अबू के घर में दाखिल हुए। उन्होंने पहले नौकरों को मारा, फिर परिवार के सामने अबू को 70 गोलियां मारीं।

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रूस के मिग-21 लड़ाकू विमान को चुराया

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock

60 के दशक में यदि कोई विमान सबसे उन्नत और तेज था तो वह रूस का मिग-21 लड़ाकू विमान था। इस विमान को पाने में अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए असफल रही थी। फिर इसकी जिम्मेदारी मोसाद को मिली। पहली और दूसरी कोशिश नाकाम होने के बाद भी एजेंसी ने हार नहीं मानी। आखिरकार 1964 में उसे सफलता मिली। मोसाद की महिला एजेंट ने एक इराकी पायलट को इस विमान के साथ इस्रायल लाने के लिए मना लिया था।

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