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Iran-Israel: इस्राइल के प्रतिवाद का जवाब दे सकता है ईरान, चार देशों ने मिलकर किया था ईरानी आक्रमण को बेअसर
सार
इस्राइल और ईरान के बीच में यह ताजा क्रिया-प्रतिक्रिया एक अप्रैल से शुरू हुई है। ईरान का आरोप है कि सीरिया में स्थित उसके वाणिज्यिक दूतावास पर इस्राइल ने हमला किया था। इसमें उसके जनरल समेत 06 अधिकारी मारे गए थे।
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इस्राइल-ईरान युद्ध
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
ईरान ने 13 अप्रैल को इस्राइल पर हमला किया। 13 अप्रैल के हमले की प्रतिक्रिया में इस्राइल ने ईरान के परणामु प्रतिष्ठान वाले इस्फहान शहर को आज निशाना बनाया। हालांकि ईरान का दावा यही है कि उसकी जमीन पर कोई हमला नहीं हुआ और उसकी वायुरक्षा प्रणाली ने हवा में ही कुछ आब्जेक्ट (मिसाइल और ड्रोन) को नष्ट कर दिया। इजरायल ने यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई के जन्मदिन पर करके बदला लेने वाले सीने को चौड़ा किया। अब फिर बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि जी-7 के देश अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और इस्राइल ईरान को धमकी, घुड़की सब दे रहे हैं। क्या अब ईरान डरकर चुप बैठ जाएगा?
इस्राइल और ईरान के बीच में यह ताजा क्रिया-प्रतिक्रिया एक अप्रैल से शुरू हुई है। ईरान का आरोप है कि सीरिया में स्थित उसके वाणिज्यिक दूतावास पर इस्राइल ने हमला किया था। इसमें उसके जनरल समेत 06 अधिकारी मारे गए थे। इसकी प्रतिक्रिया में ईरान ने 13 अप्रैल को इस्राइल पर आत्मरक्षार्थ हमला किया था। ईरान की प्रतिक्रया में इस्राइल ने शुक्रवार 19 अप्रैल को ईरान, सीरिया और इराक पर जोरदार हमला बोला। अमेरिका के अधिकारियों ने ईरान के भीतर भीषण हमले की पुष्टि की है। ईरान शुरू में इससे नकारता रहा, लेकिन अब तेहरान ने तीन विस्फोटों को कबूल लिया है।
ईरान के 13 अप्रैल के हमले को 4 देशों की सतर्कता ने किया था बेअसर
13 अप्रैल को ईरान ने जब इस्राइल को लक्षित करके मिसाइलें, ड्रोन और अन्य से हमला किया, तो उसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और इस्राइल की सेना ने करीब-करीब बेअसर कर दिया था। ईरान के 90 फीसदी वार हवा में ध्वस्त हो गए थे। अमेरिका ने अपने जीपीएस सिस्टम को पहले ही बंद कर दिया था। अमेरिका खुफिया एजेंसियों को पता था कि ईरान इस्राइल पर हमला करने वाला है। ईरान के हमले के बाद ब्रिटेन ने अपने फाइटर जेटों को भेज दिया था। जबकि अमेरिका ने आस-पास मौजूद अपने सैन्य बेड़े को सतर्क कर दिया था। ये चारों देश अभी ईरान को आगे प्रतिक्रिया न करने की घुड़की, धमकी, चमकी सब दे रहे हैं।
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भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बलविंदर सिंह संधू ने पहले ही आशंका जताई थी कि जल्द ही इस्राइल ईरान पर हमला करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है। संधू ने कहा था कि इस्राइल द्वारा हमला करने की पूरी संभावना है। क्योंकि इस्राइल ईरान द्वारा दिए गए संदेश पर चुप नहीं बैठना चाहेगा। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि अब मामला थोड़ा पेचीदा होता जा रहा है। ईरान के सामने लगातार नाक का सवाल खड़ा हो रहा है। रंजीत कुमार इसे अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं। विदेश सेवा के एक अधिकारी तेहरान में सेवाएं दे चुके हैं। वह कहते हैं कि अमेरिका द्वारा मेजर सुलेमानी के काफिले पर हमले के बाद से ही ईरान में लोगों में काफी गुस्सा है।
क्या किसी बड़ी मुश्किल में फंसने की तरफ बढ़ रहा है ईरान
भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि मिलिट्री पॉवर के लिहाज से ईरान के पास कुछ खास नहीं है। इराक से लंबे समय तक चले युद्ध में वह कमजोर हो चुका था। जबकि इस्राइल के पास दुनिया के सबसे अच्छे हथियार हैं। ईरान के पास वायुसेना के नाम पर इस्राइल के मुकाबले कुछ नहीं है। दूसरी बड़ी बात है कि अमेरिका इस्राइल के साथ खुलकर खड़ा है। ब्रिटेन और फ्रांस भी इस्राइल के साथ हैं। इसके समानांतर ईरान का साथ हूती विद्रेही, लेबनान के लड़ाके, फिलिस्तीन में सक्रिय हमास के संगठन के अलावा कोई खुलकर नहीं दे रहा है। ईरान का भरोसे वाला मित्र रूस यूक्रेन में उलझा हुआ है। चीन, अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ खुलकर आना नहीं चाहता। इस तरह से ईरान को अपनी लड़ाई अकेले लड़नी पड़ेगी।
तनाव जारी रहा तो विश्व स्तर पर बिगड़ेंगे हालात
इस्राइल और ईरान का तनाव जारी रहा, तो विश्व स्तर पर हालात बिगड़ेंगे। मालिनी भट्टाचार्य कहती हैं कि कच्चे तेल के भाव अभी से बढ़ने लगे हैं। दूसरे जब भी किसी देश पर हमला होता है, तो वहां से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करते हैं। मालिनी कहती हैं कि किसी भी लड़ाई के बाद तो वहां बनी हुई चीजें ही नष्ट होती हैं। इसलिए इसे अर्थव्यवस्था और मानवता दोनों को झटका लगता है।
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इस्राइल और ईरान के बीच में यह ताजा क्रिया-प्रतिक्रिया एक अप्रैल से शुरू हुई है। ईरान का आरोप है कि सीरिया में स्थित उसके वाणिज्यिक दूतावास पर इस्राइल ने हमला किया था। इसमें उसके जनरल समेत 06 अधिकारी मारे गए थे। इसकी प्रतिक्रिया में ईरान ने 13 अप्रैल को इस्राइल पर आत्मरक्षार्थ हमला किया था। ईरान की प्रतिक्रया में इस्राइल ने शुक्रवार 19 अप्रैल को ईरान, सीरिया और इराक पर जोरदार हमला बोला। अमेरिका के अधिकारियों ने ईरान के भीतर भीषण हमले की पुष्टि की है। ईरान शुरू में इससे नकारता रहा, लेकिन अब तेहरान ने तीन विस्फोटों को कबूल लिया है।
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ईरान के 13 अप्रैल के हमले को 4 देशों की सतर्कता ने किया था बेअसर
13 अप्रैल को ईरान ने जब इस्राइल को लक्षित करके मिसाइलें, ड्रोन और अन्य से हमला किया, तो उसे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और इस्राइल की सेना ने करीब-करीब बेअसर कर दिया था। ईरान के 90 फीसदी वार हवा में ध्वस्त हो गए थे। अमेरिका ने अपने जीपीएस सिस्टम को पहले ही बंद कर दिया था। अमेरिका खुफिया एजेंसियों को पता था कि ईरान इस्राइल पर हमला करने वाला है। ईरान के हमले के बाद ब्रिटेन ने अपने फाइटर जेटों को भेज दिया था। जबकि अमेरिका ने आस-पास मौजूद अपने सैन्य बेड़े को सतर्क कर दिया था। ये चारों देश अभी ईरान को आगे प्रतिक्रिया न करने की घुड़की, धमकी, चमकी सब दे रहे हैं।
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भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल बलविंदर सिंह संधू ने पहले ही आशंका जताई थी कि जल्द ही इस्राइल ईरान पर हमला करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकता है। संधू ने कहा था कि इस्राइल द्वारा हमला करने की पूरी संभावना है। क्योंकि इस्राइल ईरान द्वारा दिए गए संदेश पर चुप नहीं बैठना चाहेगा। विदेश मामलों के जानकार रंजीत कुमार कहते हैं कि अब मामला थोड़ा पेचीदा होता जा रहा है। ईरान के सामने लगातार नाक का सवाल खड़ा हो रहा है। रंजीत कुमार इसे अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं। विदेश सेवा के एक अधिकारी तेहरान में सेवाएं दे चुके हैं। वह कहते हैं कि अमेरिका द्वारा मेजर सुलेमानी के काफिले पर हमले के बाद से ही ईरान में लोगों में काफी गुस्सा है।
क्या किसी बड़ी मुश्किल में फंसने की तरफ बढ़ रहा है ईरान
भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर वाइस मार्शल एनबी सिंह का कहना है कि मिलिट्री पॉवर के लिहाज से ईरान के पास कुछ खास नहीं है। इराक से लंबे समय तक चले युद्ध में वह कमजोर हो चुका था। जबकि इस्राइल के पास दुनिया के सबसे अच्छे हथियार हैं। ईरान के पास वायुसेना के नाम पर इस्राइल के मुकाबले कुछ नहीं है। दूसरी बड़ी बात है कि अमेरिका इस्राइल के साथ खुलकर खड़ा है। ब्रिटेन और फ्रांस भी इस्राइल के साथ हैं। इसके समानांतर ईरान का साथ हूती विद्रेही, लेबनान के लड़ाके, फिलिस्तीन में सक्रिय हमास के संगठन के अलावा कोई खुलकर नहीं दे रहा है। ईरान का भरोसे वाला मित्र रूस यूक्रेन में उलझा हुआ है। चीन, अमेरिका और इस्राइल के खिलाफ खुलकर आना नहीं चाहता। इस तरह से ईरान को अपनी लड़ाई अकेले लड़नी पड़ेगी।
तनाव जारी रहा तो विश्व स्तर पर बिगड़ेंगे हालात
इस्राइल और ईरान का तनाव जारी रहा, तो विश्व स्तर पर हालात बिगड़ेंगे। मालिनी भट्टाचार्य कहती हैं कि कच्चे तेल के भाव अभी से बढ़ने लगे हैं। दूसरे जब भी किसी देश पर हमला होता है, तो वहां से बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करते हैं। मालिनी कहती हैं कि किसी भी लड़ाई के बाद तो वहां बनी हुई चीजें ही नष्ट होती हैं। इसलिए इसे अर्थव्यवस्था और मानवता दोनों को झटका लगता है।