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ईरान-इस्राइल तनाव: पश्चिम एशिया के संघर्ष का व्यापार पर कितना असर, आकलन करेगी सरकार; हितधारकों से होगी बैठक

Mon, 16 Jun 2025 05:55 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 16 Jun 2025 05:55 PM IST
सार

ईरान-इस्राइल संघर्ष के कारण भारत सरकार ने विदेशी व्यापार पर असर का आकलन करने के लिए इस सप्ताह शिपिंग और कंटेनर कंपनियों के साथ बैठक बुलाई है। थिंक टैंक जीटीआरआई के मुताबिक, होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री मार्गों पर खतरे से तेल कीमतें, शिपिंग लागत और महंगाई बढ़ सकती है। इससे भारत के व्यापार और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है।

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Iran-Israel Conflict: Govt to meet stakeholders this week to assess impact on India's trade
इस्राइल-ईरान तनाव - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारत सरकार ईरान-इस्राइल संघर्ष की स्थिति पर करीब से नजर रख रही है। वाणिज्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को बताया कि पश्चिम एशिया के तनाव से देश के विदेशी व्यापार पर पड़ने वाले असर का आकलन करने और किसी भी मुद्दे का समाधान करने के लिए इस हफ्ते शिपिंग कंपनियों, कंटेनर फर्मों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक की जाएगी।  

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वाणिज्य सचिव सुनील बड़थ्वाल ने कहा कि संघर्ष का भारत के व्यापार पर क्या असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे कैसी स्थिति विकसित होती है। उन्होंने कहा, हम हालात पर नजर बनाए हुए हैं। हम इस हफ्ते सभी शिपिंग कंपनियों, कंटेनर संगठनों, संबंधित विभागों और हितधारकों की बैठक बुला रहे हैं, ताकि उनसे यह समझ सकें कि उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और उनका समाधान कैसे किया जा सकता है। 
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निर्यातकों का कहना है कि अगर युद्ध और तेज हुआ, तो इसका असर वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा और इससे हवाई तथा समुद्री मालभाड़ा दरें बढ़ जाएंगी। उन्होंने चिंता जताई कि संघर्ष से होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के मार्ग से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ सकता है। भारत का करीब दो-तिहाई कच्चा तेल और आधे से ज्यादा तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है, जिसे ईरान बंद करने की धमकी दे चुका है। 

यह जलडमरूमध्य अपनी सबसे संकरी जगह पर केवल 21 मील चौड़ा है और वैश्विक तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। भारत के लिए यह मार्ग बेहद अहम है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा करता है। 

थिंक टैंक जीटीआरआई के अनुसार, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है या यहां कोई सैन्य टकराव होता है, तो इससे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि, शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम में इजाफा होगा। इसका असर भारत में महंगाई, रुपये की स्थिति और सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर पड़ेगा। इसी बीच, 14-15 जून को इस्राइल की ओर से यमन के हूती विद्रोहियों पर हमले से लाल क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। लाल सागर में हूती विद्रोही पहले से ही व्यावसायिक जहाजों पर हमले कर रहे हैं।

यूरोप, उत्तरी अफ्रीका और अमेरिका के पूर्वी तट की ओर जाने वाले भारत के लगभग 30 फीसदी निर्यात बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से होकर जाते हैं, जो अब खतरे में हैं। हाल ही में भारत के मालवाहक जहाज लाल सागर के मार्ग से चलने लगे थे, जिससे अमेरिका और यूरोप की ओर यात्रा में 15-20 दिन की बचत हो रही थी, लेकिन अब यह रास्ता फिर बाधित हो सकता है।

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अक्तूबर 2023 में इस्राइल पर हुआ था हमला
7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल पर हमले के साथ शुरू हुए इस संघर्ष के कारण पहले भी हूती विद्रोहियों के हमलों की वजह से लाल सागर के मार्ग में मालवाहन ठप हो गया था। अमेरिका के दखल औ विद्रोहियों पर हमले के बाद ये हमले रुके थे। पिछले साल बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आस-पास स्थिति गंभीर हो गई थी, जो लाल सागर और भूमध्य सागर को हिंद महासागर से जोड़ने वाला अहम समुद्री मार्ग है। यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों से यह क्षेत्र खतरे में आ गया था।

लाल सागर से होकर गुजरता है भारत का यूरोप को 80 फीसदी व्यापार
भारत का करीबी 80 फीसदी यूरोप के साथ वस्तुओं का व्यापार लाल सागर से होकर गुजरता है और अमेरिका के साथ बड़ा हिस्सा भी इसी मार्ग से आता-जाता है। ये दोनों क्षेत्र भारत के कुल निर्यात का 34 फीसदी हिस्सा रखते हैं। लाल सागर का यह जलडमरूमध्य वैश्विक कंटेनर यातायात का 30 फीसदी और दुनिया के कुल व्यापार का 12 फीसदी वहन करता है।

इस्राइल और ईरान के साथ घटा भारत का व्यापार
भारत का इस्राइल को निर्यात 2023-24 के 4.5 अरब डॉलर से घटकर 2024-25 में 2.1 अरब डॉलर रह गया है। वहीं, भारत का इस्राइल से आयात भी 2.0 अरब डॉलर से घटकर 1.6 अरब डॉलर हो गया है। इसी तरह, भारत का ईरान को निर्यात 2023-24 और 2024-25 दोनों वर्षों में 1.4 अरब डॉलर के आसपास रहा है, लेकिन इस पर भी संकट के चलते असर पड़ सकता है। वहीं, भारत का ईरान से आयात 2023-24 में 625 मिलियन डॉलर से घटकर 2024-25 में 441 मिलियन डॉलर रह गया है।

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