G7 Summit: कनाडाई निवेशकों का भारत पर भरोसा बरकरार, फरवरी से अब तक हुआ 28000 करोड़ रुपये का एफपीआई निवेश
G7 Summit: बाजार नियामक सेबी के आंकड़ों के अनुसार कनाडाई निवेशकों ने फरवरी 2025 से अब तक भारतीय बाजारों में करीब 28,000 करोड़ रुपये डाले हैं। साथ ही, मई 2025 तक उनके पास 1.76 लाख करोड़ रुपये डॉलर की इक्विटी संपत्ति है। जी 7 शिखर सम्मेलन से पहले भारत के लिए यह आंकड़ा खास है।
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भारत में कनाडाई फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफपीआई) का निवेश तेजी से बढ़ा है। फरवरी 2025 से अब तक कनाडाई एफपीआई की भारतीय शेयर बाजार में करीब ₹28,000 करोड़ की बढ़ोतरी देखी गई है। बाजार नियामक सेबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मई 2025 तक कनाडाई निवेशकों के पास कुल शेयरों की संपत्ति लगभग 1.76 लाख करोड़ (करीब 21 बिलियन डॉलर) तक पहुंच चुकी है।
कनाडाई पेंशन फंड के पास 12.2 अरब डॉलर की संपत्ति
कनाडाई पेंशन फंड बाजार में सबसे बड़े निवेशकों में से एक है। इसके पास मार्च 2025 तक 12.2 अरब डॉलर की संपत्ति थी। कनाडाई पेंशन प्लान के पास भारतीय मुद्रा में शुद्ध संपत्ति का 2% हिस्सा था। यह मार्च 2024 के अंत में 3% से कम हो गया है। नेशनल एसेट्स डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2024 में यह आंकड़ा ₹1.98 लाख करोड़ के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद से एफपीआी ने रुझानों के अनुरूप निवेश पर मुनाफा कमाया है। निवेशकों ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों से पहले ट्रंप ट्रेड में भाग लिया था।
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एफपीआई एयूसी में 3.25 अरब डॉलर की बढ़त
टैरिफ में उतार-चढ़ाव के कारण एफपीआई ने एक बार फिर भारतीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। फरवरी के अंत से कनाडाई एफपीआई एयूसी में 3.25 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। वहीं, शुद्ध एफपीआई निवेश 1.89 अरब डॉलर रहा। इस अवधि के दौरान बेंचमार्क निफ्टी में 11% से अधिक की वृद्धि हुई, जिससे निवेश की संपत्तियों का मूल्य भी बढ़ गया। एफपीआई एयूसी का मतलब है कि विदेशी निवेशकों ने किसी विशेष बाजार में कितना पैसा लगाया है और उनमें से कितना निवेश वर्तमान में संरक्षकों के पास है। जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले निवेश की इस प्रवृत्ति को खास माना जा रहा है। यह इस ओर इशारा करता है कि कनाडा का भारतीय बाजारों पर भरोसा बना हुआ है।