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Iran Foreign Minister India Visit: पैगंबर विवाद के बीच भारत पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री, पीएम मोदी और जयशंकर से की मुलाकात

Wed, 08 Jun 2022 09:11 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 08 Jun 2022 09:11 PM IST
सार

Iran Foreign Minister Abdollahian India Visit: ईरानी विदेश मंत्री अब्दुल्लाहियन ने बुधवार दोपहर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

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Iran Foreign Minister India Visit All Updates, Dr Hossein Amir Abdollahian arrives to meet s jaishankar
PM Modi - फोटो : ANI

विस्तार

देश में पैगंबर विवाद के बीच ईरान के विदेश मंत्री डॉ. हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन बीती रात नई दिल्ली पहुंचे। यहां विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और लिखा कि ये यात्रा हमारे ऐतिहासिक संबंधों और साझेदारी को और बढ़ावा देगी। बता दें कि अब्दुल्लाहियन द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए हैं। 

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इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट किया कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों के आगे विकास पर उपयोगी चर्चा के लिए हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन का स्वागत करके खुशी हुई।

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के अपने समकक्ष अब्दुल्लाहियन से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों के विविध आयामों पर चर्चा की। ईरान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारतीय जनता पार्टी के दो पूर्व पदाधिकारियों की पैगंबर मोहम्मद पर की गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर पश्चिम एशियाई देशों द्वारा आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है।
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विदेश मंत्री जयशंकर ने मुलाकात की तस्वीर के साथ ट्वीट किया कि नई दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री आमिर अब्दुल्लाहियन का स्वागत। आज हमारी चर्चा में हमारे करीबी एवं मित्रतापूर्ण संबंध प्रदर्शित होंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्दुल्लाहियन द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। इस यात्रा का मकसद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के साथ अफगानिस्तान सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करना है।

भाजपा के दो पूर्व पदाधिकारियों की पैगंबर मोहम्मद पर की गई विवादास्पद टिप्पणी के मामले में अरब देशों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद, इस्लामिक सहयोग संगठन के किसी सदस्य देश के वरिष्ठ मंत्री की यह पहली भारत यात्रा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब्दुल्लाहियन नई दिल्ली में बैठकों के बाद मुंबई और हैदराबाद की भी यात्रा करेंगे। मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक संबंधों एवं गठजोड़ को और मजबूत बनाया जा सकेगा।

अब्दुल्लाहियन की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ भाजपा के दो पूर्व नेताओं के विवादित बयान को लेकर कुवैत, कतर के साथ ईरान ने भारतीय राजदूत को तलब कर विरोध दर्ज कराया था। इसके अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, जार्डन, मालदीव, मलेशिया, ओमान, इराक, लीबिया जैसे देशों ने इन टिप्पणियों को खारिज किया था ।

भारत ने इस मुद्दे पर इस्लामिक देशों के संगठन (ओआईसी) की टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया था। खाड़ी क्षेत्र में ईरान, भारत के लिये एक महत्वपूर्ण देश है । दोनों पक्षों ने दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया में सम्पर्क बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। पिछले वर्ष ताशकंद में सम्पर्क सम्मेलन में विदेश मंत्री जयशंकर ने चाबहार बंदरगाह को अफगानिस्तान सहित क्षेत्रीय पारगमन के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पेश किया था। वहीं, पिछले वर्ष अगस्त में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद भारत लगातार ईरान के सम्पर्क में है।

तेल आयात मुद्दे पर दोनों देशों के बीच हो सकती है बात
ईरान से भारत में तेल का आयात दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत का मुद्दा हो सकता है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि दो दिन पहले एस जयशंकर ने ब्रातिस्लावा में ग्लोबसेक 2022 में बोलते हुए कहा था कि अगर अमेरिका और यूरोप  रूस से आयात सीमित करना चाहते हैं तो उन्हें ईरान और वेनेजुएला के साथ विचार करना चाहिए। बता दें कि ईरान का पेट्रोलियम उत्पादन बढ़कर अब एक मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया है और वह अन्य बाजारों की तलाश कर रहा है। अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद ईरान के तेल निर्यात पर असर पड़ा था। 2019 में प्रतिबंध लगाए जाने से पहले चीन के बाद भारत ईरानी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार था।


भारत और ईरान का द्विपक्षीय व्यापार में 56 फीसदी की कमी आई 
2020-21 के दौरान भारत और ईरान का द्विपक्षीय व्यापार 2.10 बिलियन डॉलर था जो कि पिछले वर्ष 4.80 बिलियन डॉलर की तुलना में 56 प्रतिशत कम था। इसके लिए कोरोना महामारी को जिम्मेदार ठहराया गया था और इस साल इसके बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, अगर तेल आयात की अनुमति दी जाती है तो यह आंकड़ा बढ़ जाएगा।  

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