US से जंग के 75 दिन बाद दिल्ली पहुंचे अराघची: भारत-ईरान संबंध पर हुकूमत की सोच क्या? BRICS समिट पर नजरें
ईरान ने भारत को एक भरोसेमंद शांतिदूत मानते हुए मध्यस्थता की बड़ी उम्मीद जताई है। अब सबकी नजरें ब्रिक्स के मंच पर टिकी हैं, जहां भारत की संतुलित कूटनीति इस क्षेत्रीय तनाव को शांत करने की अहम कड़ी बन सकती है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची दिल्ली पहुंच चुके हैं। उन्होंने क्या-क्या कहा? खबर में जानिए...
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ब्रिक्स में एकजुटता की ईरान ने भरी हुंकार
ब्रिक्स बैठक से ठीक पहले ईरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि संगठन के भीतर किसी भी बड़े मतभेद का संदेश दुनिया में नहीं जाना चाहिए। ईरान पूरी तरह से ब्रिक्स घोषणा के पक्ष में है। तेहरान चाहता है कि समूह के सदस्य देश पश्चिम एशिया संकट पर एक सुर में बात करें। यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें ब्रिक्स देशों के बीच आंतरिक मतभेदों की चर्चा हो रही थी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यह भी कहा कि इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अब खुद वह सच कुबूल कर लिया है, जिसकी जानकारी ईरान की सुरक्षा एजेंसियों को पहले से थी। अराघची ने कहा है कि ईरान से दुश्मनी मोल लेना एक बेवकूफी भरा जुआ है और जो भी देश इस्राइल के साथ मिलकर क्षेत्र में फूट डालने या ईरान के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश करेंगे, उन्हें इसका अंजाम भुगतना होगा और इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi tweets, "Netanyahu has now publicly revealed what Iran's security services long ago conveyed to our leadership. Enmity with the Great People of Iran is a foolish gamble. Collusion with Israel in doing so: unforgivable. Those colluding… pic.twitter.com/uVNBhapNvQ
— ANI (@ANI) May 13, 2026
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भारत की मध्यस्थता का ईरान ने किया स्वागत
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए यदि भारत कोई भी पहल करता है, तो ईरान उसका दिल खोलकर स्वागत करेगा। ईरान भारत को एक ऐसे विश्वसनीय देश के रूप में देख रहा है, जिसके संबंध सभी पक्षों से बेहतर हैं। ईरान का यह रुख भारत की बढ़ती वैश्विक साख और विश्वबंधु की छवि पर मुहर लगाता है।
ईरानी पक्ष ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ईरान ने कहा किया कि वह इस समुद्री रास्ते में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के लिए यह बयान बेहद राहत भरा है। भारत की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। यहां शांति रहने से न केवल भारत बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
भारत की संतुलित कूटनीति की परीक्षा
भारत इस समय बेहद सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रहा है। देश के सामने एक तरफ ईरान के साथ अपने पुराने और रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को संतुलित करना है। यही कारण है कि भारत ने अभी तक किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है। सबकी नजरें अब ब्रिक्स के संयुक्त बयान पर हैं कि सदस्य देश इस संकट पर क्या रुख अपनाते हैं।
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