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Hindi News ›   India News ›   INX Media Case: Supreme court refuses urgent hearing on Former Finance minister P Chidambaram

कांग्रेस के वकील नहीं दिला पाए चिदंबरम को राहत, सारी दलीलें हुई बेकार

Wed, 21 Aug 2019 08:21 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला
शशिधर पाठक, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 21 Aug 2019 08:21 PM IST
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INX Media Case: Supreme court refuses urgent hearing on Former Finance minister P Chidambaram
Karti and P Chidambaram
सुप्रीम कोर्ट में भी पूर्व केन्द्रीय वित्त और गृहमंत्री पी. चिदंबरम को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तन्खा समेत अन्य की दलीलें सुनने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमन्ना ने पी चिदंबरम को कोई राहत नहीं दी। जस्टिस रमन्ना ने पी चिदंबरम के देश से बाहर न जाने, कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने के हलफनामे को भी ठुकरा दिया है। अब इस मामले में कोई राहत की संभावना प्रधान न्यायाधीश रंजन गगोई की बेंच से ही संभव है।
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नहीं मिल पाई राहत

20 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में चिदंबरम की तरफ से करीब 15 वकीलों ने अपनी दलील से पूर्व केन्द्रीय मंत्री को अग्रिम जमानत दिलाने की कोशिश की। देर रात तक कपिल सिब्बल के आवास पर अग्रिम जमानत दिलाने के लिए कानूनी विशेषज्ञों ने रणनीति बनाई, लेकिन चिदंबरम को राहत देने की सारी रणनीति बेकार साबित हुई। इस बीच केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी दोनों ने चिदंबरम को गिरफ्त में लेने की मुहिम तेज कर दी है। देश से बाहर भागने की आशंका को देखते हुए दोनों एजेंसियों ने लुक आऊट नोटिस जारी कर दिए हैं।

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भूमिगत हैं चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय मंत्री के बारे में कहा जा रहा है कि वह दिल्ली, एनसीआर में कहीं भूमिगत हैं। चिदंबरम उच्चतम न्यायलय से अग्रिम जमानत मिलने की आस लगाए हैं, जो उन्हें शुक्रवार से पहले मिलना संभव नहीं है। वह तब तक जांच एजेंसियों की गिरफ्त में नहीं आना चाहते है। लिहाजा 20 अगस्त को ही रास्ते से उन्होंने अपने ड्राइवर और आफिस क्लर्क को गाड़ी से उतारकर किसी सुरक्षित जगह की तरफ रुख कर लिया। वहीं जांच एजेंसियां लगातार चिदंबरम की तलाश में उनके रिश्तेदारों, करीबियों, मित्रों या ठिकाने की खोज दबिश दे रही हैं।

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वकील ने सीबीआई को लिखा था पत्र

एजेंसियां चिदंबरम के वकील अर्शदीप खुराना के पत्र पर भी कोई ध्यान नहीं दे रही हैं। अर्शदीप खुराना ने मंगलवार को ही सीबीआई को पत्र लिखकर अपने मुवक्किल (चिदंबरम) को गिरफ्तार न करने की अपील की थी। अर्शदीप ने पत्र में कहा था कि इसके लिए जांच एजेंसी को उच्तम न्यायालय के फैसले का इंतजार करना चाहिए। दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय ने भी चिदंबरम के घर के बाहर दो घंटे में हाजिर होने का पत्र मंगलवार से ही चस्पा कर रखा है।

2017 में एफआईआर दर्ज

आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी अप्रूवल दिलाने का मामला 2007 का है। 2017 में इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई और तभी से जांच एजेंसियों ने जांच के काम को तेजी से आगे बढ़ाया है। तब से लेकर अभी तक चिदंबरम को अदालत ने दर्जन से अधिक बार अग्रिम जमानत दी है। उनके पुत्र कार्ति चिदंबरम को भी कई बार अग्रिम जमानत मिल चुकी है। करीब 25 बार वह जांच एजेंसियों के सामने पेश हो चुके हैं। चिदंबरम के वकीलों का तर्क है कि वह लगातार जांच में सहयोग कर रहे हैं और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं। इसी आधार पर चिदंबरम को भी अदालत से राहत मिलने का भरोसा है।

 

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