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रणथंभौर: ट्रैप कैमरे में पहली बार शिकारियों की फोटो आने से मचा हड़कंप

Sat, 15 Feb 2020 09:52 PM IST
Trainee Trainee अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sat, 15 Feb 2020 09:52 PM IST
सार

रणथंभौर के जंगलों में बाघ का फोटो लेने के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरे में पहली बार शिकारियों की फोटो आने से वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। फोटो रणथंभौर की फलौदी रेंज का है इसमें तीन शिकारी बंदूक के साथ एक हिरन को मारकर ले जाते दिख रहे हैं।

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Investigation report sought from forest conservator accountability will also be decided
शिकारियों की फोटो आने से वन विभाग में हड़कंप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वन विभाग ने इस मामले में 5 स्थानीय लोगों की पहचान कर ली है। मामला और गंभीर तब हो गया जब शिकारियों को गिरफ्तार करने गई वन विभाग और पुलिस की टीम पर गांव वालों ने गोलाबारी की इसमें 6 वनकर्मी घायल हुए हैं।

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हिरन संरक्षित वनजीव है और इसे मारना संज्ञेय अपराध है। लिहाजा मामले का संज्ञान लेकर केंद्रीय पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने भी इस मामले में जांच रिपोर्ट भी तलब की है।  इस फोटो के सामने आने के बाद मंत्रालय राजस्थान के इस टाइगर रिजर्व पार्क को लेकर और संजीदा हो गया है। क्योंकि यहां से पिछले 9 सालों में 26 बाघों की गुमशुदगी हुई है।
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ऐसे में बाघों के लापता होने के पीछे किसी अवैध शिकार की आशंका को देखते हुए पिछले एक सप्ताह से  जब से यह मामला सामने आया है। जांच के आदेश के बावजूद  राजस्थान से लेकर दिल्ली तक जवाबदेही तय करने को लेकर जंग छिड़ी हुई है।
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हालांकि पकड़े गए शिकारियों से अब तक गुम हुए बाघों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लापता बाघों के साथ अनहोनी की आशंका के चलते मंत्रालय ने पहले से सेंचुरी की सुरक्षा को और चाक-चौबंद करने के लिए कहा था। अब इस घटनाक्रम के बाद जांच रिपोर्ट के बाद कुछ और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

क्योंकि बावजूद तमाम कवायदों के जिस तरह से शिकार सहित शिकारी ट्रैप हुए हैं वह सेंचुरी के पूरे प्रशासनिक अमले और व्यवस्था पर सवालिया निशान है। इसलिए रणथंभौर प्रशासन से जवाबदेही भी तय करने के लिए कहा गया है।

इसके अलावा क्योंकि फोटो से शिकारियों की पहचान होने के बाद जब वन विभाग स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर अभियान चला कर आरोपियों को पकड़ने गए थे। वन विभाग,पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया। यानि ग्रामीणों को वन विभाग और पुलिस के इस अभियान को लेकर जानकारी होने का पूरा अंदेशा है।  

इसलिए मंत्रालय ने मुख्य वन सरंक्षक से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। राजस्थान वन विभाग के प्रधान और मुख्य वन संरक्षण अरविंदर सिंह बराड़ के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक मामले में सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक 5 की पहचान हो गई है। बाकी कि पहचान की जा रही है।


फलौदी रेंज के मामले में गिरफ्तार दो शिकारियों असरार और सुनेफ से भी पूछताछ की जा रही है। ग्रामीणों से संघर्ष करने के मामले में वन विभाग ने 29 आरोपियों और हमला करने वाले 500 लोगों के खिलाफ  प्राथमिकी दर्ज कराई है। 

 

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