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Telangana: कालेश्वरम परियोजना में अनियमितताओं की जांच तेज, न्यायिक आयोग के सामने पेश हुए पूर्व सीएम केसीआर
Wed, 11 Jun 2025 12:44 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: बशु जैन
Updated Wed, 11 Jun 2025 12:44 PM IST
सार
कालेश्वरम परियोजना मेदिगड्डा बैराज के कुछ घाटों के डूबने के बाद विवादों में घिर गई थी। माना जा रहा है परियोजना के निर्माण में अनियमितता बरती गई। मामले की जांच कर रहे न्यायिक आयोग ने बयान देने के लिए पूर्व सीएम केसीआर को तलब किया।
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पूर्व सीएम केसीआर।
- फोटो : PTI
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विस्तार
तेलंगाना में पूर्ववर्ती भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की सरकार के दौरान कालेश्वरम सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच तेज हो गई है। बुधवार को बीआरएस अध्यक्ष और पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव (केसीआर) की न्यायिक आयोग के सामने पेशी हुई। वे सुबह 11 बजे के बाद आयोग के कार्यालय पहुंचे। इस दौरान बीआरएस के कई नेता और कार्यकर्ता बीआरएस भवन में एकत्र हुए। यहां पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
आयोग पिछले लगभग एक साल में अनेक इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों, विशेषकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। इससे पहले नौ जून को केसीआर के भतीजे और बीआरएस विधायक टी हरीश राव और छह जून को भाजपा सांसद एटाला राजेंद्र से आयोग ने पूछताछ की थी।
यह भाजपा-कांग्रेस की साजिश: केटीआर
केसीआर के बेटे केटीआर ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस बीआरएस के खिलाफ साजिश कर रही हैं। राव ने कहा कि राहुल गांधी और भाजपा इसमें साथ हैं। कालेश्वरम ऐसी परियोजना है, जिसमें 100 से अधिक घटक हैं। बैराज में लगे 85 खंभों में से दो क्षतिग्रस्त हुए हैं। मुझे लगता है यह कांग्रेस ने किसी शरारत के तहत किया है। मुझे यह उम्मीद है कि जल्द आयोग और अन्य राजनीतिक दलों को यह लगने लगेगा कि कुछ गलत नहीं हुआ था।
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ये भी पढ़ें: गोवा सरकार ने डॉक्टरों की सभी मांगें मानी, सीएम ने हड़ताल खत्म करने के लिए कहा- धन्यवाद
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने हाल ही में कहा था कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित कालेश्वरम परियोजना को देश की सबसे बड़ी मानव निर्मित आपदा करार दिया है।
क्या है कालेश्वर परियोजना
बता दें कि कालेश्वरम परियोजना तत्कालीन अविभाजित आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा तैयार की गई डॉ. बी आर अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला सुजला श्रवणथी लिफ्ट सिंचाई योजना (पीसीएसएस परियोजना) की एक शाखा है। पिछले साल तेलंगाना की कालेश्वरम परियोजना पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने निराशाजनक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया है कि यह शुरू से ही आर्थिक रूप से किसी भी काम की नहीं थी।
ये भी पढ़ें: तुमकुरु को बंगलूरू में शामिल करने की तैयारी, गृह मंत्री परमेश्वर बोले- प्रस्ताव पर हो रहा विचार
खासकर पिछले साल मेदिगड्डा बैराज के कुछ घाटों के डूबने के बाद कालेश्वरम परियोजना विवादों में घिर गई है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने भी माना था कि मेडीगड्डा बैराज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। जब तक इसे पूरी तरह से पुनर्निर्मित नहीं किया जाता तब तक यह बेकार हो जाएगा। हाल के विधानसभा चुनावों में बीआरएस की हार का एक बड़ा कारण बैराज को हुए नुकसान को माना जा रहा है।
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आयोग पिछले लगभग एक साल में अनेक इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों, विशेषकर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। इससे पहले नौ जून को केसीआर के भतीजे और बीआरएस विधायक टी हरीश राव और छह जून को भाजपा सांसद एटाला राजेंद्र से आयोग ने पूछताछ की थी।
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यह भाजपा-कांग्रेस की साजिश: केटीआर
केसीआर के बेटे केटीआर ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस बीआरएस के खिलाफ साजिश कर रही हैं। राव ने कहा कि राहुल गांधी और भाजपा इसमें साथ हैं। कालेश्वरम ऐसी परियोजना है, जिसमें 100 से अधिक घटक हैं। बैराज में लगे 85 खंभों में से दो क्षतिग्रस्त हुए हैं। मुझे लगता है यह कांग्रेस ने किसी शरारत के तहत किया है। मुझे यह उम्मीद है कि जल्द आयोग और अन्य राजनीतिक दलों को यह लगने लगेगा कि कुछ गलत नहीं हुआ था।
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तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने हाल ही में कहा था कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित कालेश्वरम परियोजना को देश की सबसे बड़ी मानव निर्मित आपदा करार दिया है।
क्या है कालेश्वर परियोजना
बता दें कि कालेश्वरम परियोजना तत्कालीन अविभाजित आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा तैयार की गई डॉ. बी आर अंबेडकर प्राणहिता-चेवेल्ला सुजला श्रवणथी लिफ्ट सिंचाई योजना (पीसीएसएस परियोजना) की एक शाखा है। पिछले साल तेलंगाना की कालेश्वरम परियोजना पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने निराशाजनक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया है कि यह शुरू से ही आर्थिक रूप से किसी भी काम की नहीं थी।
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खासकर पिछले साल मेदिगड्डा बैराज के कुछ घाटों के डूबने के बाद कालेश्वरम परियोजना विवादों में घिर गई है। राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने भी माना था कि मेडीगड्डा बैराज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। जब तक इसे पूरी तरह से पुनर्निर्मित नहीं किया जाता तब तक यह बेकार हो जाएगा। हाल के विधानसभा चुनावों में बीआरएस की हार का एक बड़ा कारण बैराज को हुए नुकसान को माना जा रहा है।
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