{"_id":"59cadfa74f1c1bd1538b4a2f","slug":"investigation-agency-give-information-to-parliamentary-committee-about-bofors-case","type":"story","status":"publish","title_hn":"बोफोर्स केस में CBI को कोर्ट जाने से रोका गया था, जांच एजेंसी ने संसदीय समिति को दी जानकारी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
बोफोर्स केस में CBI को कोर्ट जाने से रोका गया था, जांच एजेंसी ने संसदीय समिति को दी जानकारी
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Wed, 27 Sep 2017 04:45 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीआई ने संसदीय समिति को बताया है कि बोफोर्स मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्कालीन सरकार ने उसे सुप्रीम कोर्ट जाने की इजाजत नहीं दी थी। रक्षा मामलों की छह सदस्यीय लोक लेखा समिति की उपसमिति बोफोर्स तोप सौदे में 1986 की कैग रिपोर्ट की अनुपालना न होने की पड़ताल कर रही है।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि समिति ने सीबीआई से पिछले महीने पूछा था कि इस मामले में 2005 में दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाही समाप्त करने के फैसले के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं गई। जांच एजेंसी ने समिति को बताया कि हाईकोर्ट के आदेश का विश्लेषण करने के बाद सीबीआई सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करना चाहती थी। एजेंसी ने समिति को 22 जून, 2017 को लिखे पत्र के जरिये इस आशय से अवगत करा दिया था।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इसकी इजाजत नहीं दी थी। 8 सितंबर, 2005 को डीओपीटी के सतर्कता विभाग के निदेशक को एक प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन विभाग ने 25 नवंबर 2005 को पारित आदेश में जांच एजेंसी को विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की अनुमति नहीं दी थी।
विज्ञापन
इस बीच वकील अजय अग्रवाल ने इस केस को दोबारा खोलने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सीबीआई ने 22 जनवरी, 1990 को इस मामले में आपराधिक साजिश, ठगी और जालसाजी का केस दर्ज किया था। मामले में तब के एबी बोफोर्स के प्रेसिडेंट मार्टिन आर्दबो, कथित बिचौलिया विन चड्ढा और एनआरआई उद्योगपति हिंदुजा बंधुओं को आरोपी बनाया था। बोफोर्स सौदे में 64 करोड़ की दलाली दी गई थी।