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'आप' को निजी कारणों से छोड़ा, बतौर सीएम दोस्त नहीं हो सकते केजरीवाल: खेतान

Sat, 25 Aug 2018 08:36 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 25 Aug 2018 08:36 AM IST
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Interview with previous AAP leader Ashish Khetan

आशीष खेतान के आम आदमी पार्टी छोड़ने के कारणों को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासबाजी अभी भी जारी है। इसी बीच हमारे संवाददाता अमित शर्मा ने आशीष खेतान से मुलाकात की और उनका पक्ष जानने की कोशिश की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-

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आशीष जी, केजरीवाल का साथ छोड़ने वालों में आज आपका भी नाम शुमार हो गया है। क्या कहेंगे, आप का साथ छोड़ने की वजह क्या रही?

मैं आम आदमी पार्टी नहीं, राजनीति छोड़ना चाहता था, इसलिए पार्टी से दूर होना पड़ा। इसके लिए काफी पहले ही मन बना लिया था, लेकिन सही समय की तलाश कर रहा था। जब आम आदमी पार्टी को अदालत में जीत मिली और लगा कि पार्टी ठीक-ठाक ढंग से चल रही है, मैंने खुद को अलग कर लिया। मैंने काफी पहले से इसके बारे में पार्टी को आगाह कर दिया था। मेरा कारण निजी है। मैं पिछले डेढ़ साल से सोच रहा था। मैंने इसके बारे में अपने परिवार और दोस्तों से बात की और इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि मैं पार्टी की भीतरी राजनीति नहीं करूं। मैं अपने कानूनी अभ्यास पर ध्यान केंद्रित करना चाहता था।
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आशुतोष और आप दोनों, पार्टी के बड़े चेहरे थे। दोनों ने थोड़े से समय के अंतर में एक साथ खुद को पार्टी से अलग कर लिया कुछ तो वजह रही होगी?
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आशुतोष जी प्रखर वक्ता और विद्वान आदमी हैं। वे अपनी बात खुद बताएंगे तो ज्यादा बेहतर होगा। लेकिन मैं अपनी बात बता सकता हूं। मुझे अपने परिवार और वकालत पर ध्यान देना था, जिसके लिए पार्टी छोड़ना जरुरी था। पार्टी ने नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहा था, लेकिन मैं अब चुनावी राजनीति में लौटना नहीं चाहता था।  

कोई क्या करता है इस पर नहीं करना चाहते टिप्पणी

Interview with previous AAP leader Ashish Khetan

अगर यही वजह थी, तो हर राजनीतिक दलों में ऐसे लोग हैं जो वकालत और राजनीति दोनों एक साथ कर रहे हैं। आप भी ऐसा कर सकते थे।

- मुझे लगता है कि दोनों भूमिकाओं में मैं एक साथ काम नहीं कर पाऊंगा। इसलिए मैंने खुद को अलग किया। बाकी कोई कौन क्या करता है, उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

केजरीवाल के कई शीर्ष साथियों ने उनका साथ छोड़ दिया। ऐसी क्या वजह रही कि सबने एक-एक कर किनारा कर लिया?

- फिलहाल मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि सारे साथी साथ होते तो अच्छा होता। आज भी मैं चाहता हूं कि सभी पूर्व साथी एक साथ आकर जनता के लिए कुछ कर सकें तो बेहतर होगा। इसके लिए सबको बड़ा दिल दिखाना होगा। सबको एक साथ लाने के लिए मैं केजरीवाल से भी अपील कर रहा हूं, और दूर गए साथियों से भी।

केजरीवाल से अब आपके संबंध कैसे हैं?

- पार्टी में मुझे बहुत प्यार और इज्ज्त मिली। आज भी मेरे सबसे बेहतर संबंध हैं। एक दल के नेता और एक मुख्यमंत्री केजरीवाल से मेरा कोई संबंध नहीं है, लेकिन एक मित्र केजरीवाल से आज भी मेरे संबंध हैं और हमेशा रहेंगे। पहले के भी कई गए हुए साथियों से आज भी मेरे अच्छे संबंध हैं।

सरकार ने किया अच्छा काम

Interview with previous AAP leader Ashish Khetan

केजरीवाल सरकार के दिल्ली में कामकाज से संतुष्ट हैं?

- कई क्षेत्रों में सरकार ने अच्छा काम किया है। शिक्षा और स्वास्थ्य में बेहतर काम हुआ है। कई जगहों पर और बेहतर किया जा सकता है। अगर केंद्र का साथ मिलता तो और ज्यादा बेहतर काम हो सकता था।

राजनीति में वापसी करेंगे?

- तुरंत तो नहीं, लेकिन लंबे समय में मैं राजनीति में वापसी से इनकार नहीं करूंगा।    

आप में आने का कोई अफसोस रहेगा?

- आप ज्वाइन करने का तो नहीं, लेकिन एक बात का मुझे हमेशा अफसोस रहेगा कि चाहे-अनचाहे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का केजरीवाल के साथ हुए मतभेद के बीच में मेरा नाम आ गया। ऐसा न होता तो बेहतर होता।

पत्रकारिता से कोई एक स्वप्न लेकर आप राजनीति में आए थे। वह स्वप्न पूरा हो गया या टूट गया?

- शायद ये दोनों ही बातें मेरे साथ लागू नहीं होतीं, क्योंकि सपना तो है कि भारत के हर गरीब की थाली में दूध और रोटी हो, लेकिन इसे पूरा होना इतना आसान नहीं। टूटा इसलिए नहीं है क्योंकि कोशिशें हर तरफ से चल रही हैं। बेहतरी लगातार चालू है, एक दिन सभी सुखी होंगे, ये उम्मीद करता हूं।

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