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'जबरन कहलवाने पर नहीं बोलेंगे किसी की जय'
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता
Updated Thu, 17 Mar 2016 06:31 PM IST
सार
- किसी के कहलवाने पर नहीं लगाउंगा नारा
- वतनपरस्ती मेरे दिल में है
- पठान के खिलाफ सभी दल
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- फोटो : BBC
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विस्तार
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी एआईएमआईएम विधायक वारिस युसूफ पठान कहते हैं कि उनकी वतनपरस्ती उनके दिल में है और वह किसी के कहलवाने पर 'भारत माता की जय' का नारा नहीं लगाएंगे। उनका कहना है कि महाराष्ट्र विधानसभा में उनके साथ जो हुआ, वह 'नाइंसाफी' है।बीबीसी से बातचीत में पठान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विधायक राम कदम ने उन्हें सदन में 'भारत माता की जय' बोलने की चुनौती दी थी।
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वह कहते हैं, ''राम कदम खड़े हो गए और कहने लगे भारत माता की जय बोलो। भारत माता की जय बोलो। मैं भी खड़ा होकर बोला, भाई तुम्हारे बोलने से नहीं बोलूंगा। फिर मैंने हिंदुस्तान जिंदाबाद और जय हिंद के नारे लगाए। मगर राम कदम को बोला, तुम्हारे बोलने से नहीं बोलूंगा।" पठान का कहना था कि भाजपा और शिवसेना विधायक जोर डालने लगे कि उन्हें यह नारा लगाना ही पड़ेगा। "वो कहने लगे कि भारत में रहना है तो 'भारत माता की जय' बोलना ही पडेगा।"
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दक्षिण मुंबई के बायकुला से विधायक वारिस युसूफ पठान कहते हैं कि देशभक्ति का जज्बा उनके दिल में है। "मैं इस देश का बच्चा हूँ। यहीं पैदा हुआ हूँ और यहीं पर मरूंगा। मुझे अपने वतन से कितनी मुहब्बत है, उसके लिए मुझे किसी के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। मुझे आप फोर्स करोगे तो कभी नहीं बोलूंगा, जो आप जबर्दस्ती कहलवाना चाहते हो।"
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यह है मामला
वारिस पठान को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष हरिबाबू बगाडे ने सदन से निलंबित कर दिया है। मगर उन्होंने स्पीकर के इस कदम को चुनौती दी है और दावा किया है कि उन्होंने न तो कोई गैरकानूनी काम किया है और न कोई गैरविधायी काम, जिसके लिए उन्हें यह सजा दी गई है। जानकारों को भी ऐसा ही लगता है। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष का आदेश भी कहीं से यह नहीं कहता कि पठान ने कोई अमर्यादित आचरण दिखाया या कोई गैरविधायी आचरण पेश किया हो।
अध्यक्ष का कहना है कि सदन की राय की वजह से पठान को निलंबित किया जाता है।पठान कहते हैं, "मैं न तो कोई भाषण दे रहा था और न जो कुछ हो रहा था, वह विधानसभा पटल पर दर्ज ही हो रहा था। मैंने कुछ किया ही नहीं। मेरे साथ यह नाइंसाफी हुई है।"हालांकि उनकी पार्टी के दूसरे सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर पठान का निलंबन वापस लेने की मांग की है। पठान कहते हैं कि अगर उन्हें फिर भी इंसाफ न मिला तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
वारिस पठान के खिलाफ सदन में सिर्फ भाजपा और शिवसेना नहीं थे बल्कि कांग्रेस, एनसीपी और समाजवादी पार्टी के सदस्य भी थे। वह कहते हैं, "जेएनयू विवाद के दौरान बढ़-चढ़कर बोलने वाली कांग्रेस पार्टी भी बेनकाब हो गई। यह पहली बार देश में हुआ होगा, जब सदन के अंदर सारे दल एक तरफ होकर किसी की देखभक्ति का इम्तेहान ले रहे हों।" पठान मानते हैं कि जेएनयू विवाद के बाद माहौल खराब हो रहा है।
अध्यक्ष का कहना है कि सदन की राय की वजह से पठान को निलंबित किया जाता है।पठान कहते हैं, "मैं न तो कोई भाषण दे रहा था और न जो कुछ हो रहा था, वह विधानसभा पटल पर दर्ज ही हो रहा था। मैंने कुछ किया ही नहीं। मेरे साथ यह नाइंसाफी हुई है।"हालांकि उनकी पार्टी के दूसरे सदस्यों ने विधानसभा अध्यक्ष से मिलकर पठान का निलंबन वापस लेने की मांग की है। पठान कहते हैं कि अगर उन्हें फिर भी इंसाफ न मिला तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे।
वारिस पठान के खिलाफ सदन में सिर्फ भाजपा और शिवसेना नहीं थे बल्कि कांग्रेस, एनसीपी और समाजवादी पार्टी के सदस्य भी थे। वह कहते हैं, "जेएनयू विवाद के दौरान बढ़-चढ़कर बोलने वाली कांग्रेस पार्टी भी बेनकाब हो गई। यह पहली बार देश में हुआ होगा, जब सदन के अंदर सारे दल एक तरफ होकर किसी की देखभक्ति का इम्तेहान ले रहे हों।" पठान मानते हैं कि जेएनयू विवाद के बाद माहौल खराब हो रहा है।