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ISA: भारत फिर बना आईएसए का अध्यक्ष; 2026 तक भारत संभालेगा अंतरराष्ट्रीय निकाय की कमान, फ्रांस उपाध्यक्ष
Mon, 04 Nov 2024 05:46 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Mon, 04 Nov 2024 05:46 PM IST
सार
International Solar Alliance: अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायन्स के वर्तमान अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत सौर ऊर्जा को आगे बढ़ाने में लगातार लगा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतिगत निर्णय लेकर देश के तमाम क्षेत्रों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने का काम किया है।
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अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायन्स के कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत को 2024 से 2026 तक के लिए दोबारा अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) का अध्यक्ष चुना गया है। भारत इस पद के लिए इकलौता दावेदार रहा। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर ग्रेनेडा को पीछे छोड़ फ्रांस फिर से इस अंतरराष्ट्रीय निकाय का उपाध्यक्ष बना है।
आईएसए के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रही आईएसए की 7वीं आम सभा में यह जानकारी दी। इस सभा में 29 देशों के मंत्री भाग ले रहे हैं। जोशी ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए भारत का चुनाव इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार दुनिया भर में सौर ऊर्जा को अपनाने और जरूरी सौर परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और फ्रांस सदस्य देशों के साथ मिलकर अपनी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाने का लक्ष्य रखेंगे और इस दशक को यादगार बनाने का वादा करेंगे, क्योंकि हम ऊर्जा के एक नए दौर की शुरुआत कर रहे हैं और सौर ऊर्जा की ताकत को दुनियाभर के देशों में बेहतर बनाने का पक्का इरादा रखते हैं।
आईएसए सदस्य देशों ने आज गठबंधन के तीसरे महानिदेशक का भी चुनाव किया। आशीष खन्ना को महानिदेशक चुना गया। वह मौजूदा महानिदेशक अजय माथुर का कार्यकाल खत्म होने पर मार्च 2025 में पदभार ग्रहण करेंगे। इस दौरान स्थायी समिति के आठ उपाध्यक्षों को भी चुना गया। इनमें से चार आईएसए भौगोलिक क्षेत्रों में से प्रत्येक से दो-दो उपाध्यक्ष हैं। एशिया और प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को उपाध्यक्ष चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति रहे फ्रांस्वा ओलांद ने 30 नवंबर, 2015 को पेरिस में कॉप21 के दौरान अंतर-सरकारी संगठन आईएसए की स्थापना की थी।
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इस मौके पर फ्रांस के प्रतिनिधि ने आईएसए की बैठक में कहा कि इस संस्था के निर्माण के साथ ही भारत की भूमिका बहुत सराहनीय रही है। उसने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बेहद शानदार काम किया है। प्रतिनिधि के अनुसार, फ्रांस अपनी अध्यक्षता के दौरान सौर ऊर्जा में उच्च तकनीकी दक्ष लोगों की भर्ती कर इसको बढ़ावा देने का काम करेगा। भारत ने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि वह आने वाले वर्षों में अपनी कुल ऊर्जा खपत का 70 प्रतिशत सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त करेगा। इससे जीवाश्म ईंधन के उपयोग से होने वाले प्रदूषण से मुक्ति मिल सकेगी। अंतिम रूप से कुल ऊर्जा खपत का अधिकतम हिस्सा सौर ऊर्जा से ही प्राप्त किये जाने का लक्ष्य है। इससे दुनिया के गर्म होते तापमान को कम रखने में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से पूरी दुनिया में जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में कमी आएगी। इससे दुनिया के सकल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसके बाद भी अनुमान है कि तकनीकी और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण सहारा अफ्रीकी देशों में जीवाश्म ईंधनों की खपत बरकरार रहेगी। इसे कम करना दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
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आईएसए के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रही आईएसए की 7वीं आम सभा में यह जानकारी दी। इस सभा में 29 देशों के मंत्री भाग ले रहे हैं। जोशी ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए भारत का चुनाव इस बात का सबूत है कि मोदी सरकार दुनिया भर में सौर ऊर्जा को अपनाने और जरूरी सौर परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और फ्रांस सदस्य देशों के साथ मिलकर अपनी महत्वाकांक्षाओं को बढ़ाने का लक्ष्य रखेंगे और इस दशक को यादगार बनाने का वादा करेंगे, क्योंकि हम ऊर्जा के एक नए दौर की शुरुआत कर रहे हैं और सौर ऊर्जा की ताकत को दुनियाभर के देशों में बेहतर बनाने का पक्का इरादा रखते हैं।
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आईएसए सदस्य देशों ने आज गठबंधन के तीसरे महानिदेशक का भी चुनाव किया। आशीष खन्ना को महानिदेशक चुना गया। वह मौजूदा महानिदेशक अजय माथुर का कार्यकाल खत्म होने पर मार्च 2025 में पदभार ग्रहण करेंगे। इस दौरान स्थायी समिति के आठ उपाध्यक्षों को भी चुना गया। इनमें से चार आईएसए भौगोलिक क्षेत्रों में से प्रत्येक से दो-दो उपाध्यक्ष हैं। एशिया और प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को उपाध्यक्ष चुना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति रहे फ्रांस्वा ओलांद ने 30 नवंबर, 2015 को पेरिस में कॉप21 के दौरान अंतर-सरकारी संगठन आईएसए की स्थापना की थी।
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इस मौके पर फ्रांस के प्रतिनिधि ने आईएसए की बैठक में कहा कि इस संस्था के निर्माण के साथ ही भारत की भूमिका बहुत सराहनीय रही है। उसने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बेहद शानदार काम किया है। प्रतिनिधि के अनुसार, फ्रांस अपनी अध्यक्षता के दौरान सौर ऊर्जा में उच्च तकनीकी दक्ष लोगों की भर्ती कर इसको बढ़ावा देने का काम करेगा। भारत ने यह लक्ष्य निर्धारित किया है कि वह आने वाले वर्षों में अपनी कुल ऊर्जा खपत का 70 प्रतिशत सौर ऊर्जा के माध्यम से प्राप्त करेगा। इससे जीवाश्म ईंधन के उपयोग से होने वाले प्रदूषण से मुक्ति मिल सकेगी। अंतिम रूप से कुल ऊर्जा खपत का अधिकतम हिस्सा सौर ऊर्जा से ही प्राप्त किये जाने का लक्ष्य है। इससे दुनिया के गर्म होते तापमान को कम रखने में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से पूरी दुनिया में जीवाश्म ईंधनों के उपयोग में कमी आएगी। इससे दुनिया के सकल कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसके बाद भी अनुमान है कि तकनीकी और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण सहारा अफ्रीकी देशों में जीवाश्म ईंधनों की खपत बरकरार रहेगी। इसे कम करना दुनिया के लिए बड़ी चिंता का विषय है।