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वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड: ताज के नाम पर झोंक रहे दुनिया की आंखों में धूल

Thu, 12 May 2016 03:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा Updated Thu, 12 May 2016 03:20 AM IST
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International NGO Fraud to world for the name of Taj mahal.
ताजमहल के नाम पर वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड नामक इंटरनेशनल एनजीओ आंखों में धूल झोंक रहा है। वह ताजमहल और फतेहपुर सीकरी जैसी विश्व धरोहरों के संरक्षण का दावा कर दुनिया भर में दान मांग रहा है।
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अपनी वेबसाइट पर उसने संरक्षण कार्य की वे तस्वीरें डाल रखी हैं जो कभी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कराया था। हैरान एएसआई ने एनजीओ के दावों को झूठा बताया है।
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वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड अपनी वेबसाइट पर यह दावा कर रहा है कि साल 2001 में ताजमहल का संरक्षण कार्य उसने कराया। सच यह है कि इस काम के लिए धन तब टाटा ग्रुप ने दिया था। एनजीओ ने 2014 में फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती के घर का संरक्षण करने का भी दावा किया है। यह काम भी एएसआई ने ही कराया था।
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एनजीओ के दावों को एएसआई ने झुठलाया, रिकार्ड में नाम तक नहीं

International NGO Fraud to world for the name of Taj mahal.
2001 में ताजमहल कंजरवेशन कोलेबरेटिव (टीएमसीसी) प्रोजेक्ट के वक्त एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद रहे केके मोहम्मद के मुताबिक टाटा ग्रुप से करार हुआ था, लेकिन उसने भी काम पूरा नहीं कराया।

दरअसल, कुछ नौकरशाहों के दबाव में वर्ल्ड मान्यूमेंट फंड  को एएसआई के साथ महताब बाग, एत्माददौला में डाक्यूमेंटेशन के नाम पर जोड़ा गया। इसी एमओयू का फायदा उठाकर एनजीओ बड़ा खेल करने में जुटा है। एनजीओ के सिर पर टीएमसीसी से जुड़े रहे लोगों, पर्यटन मंत्रालय में तैनात एक वरिष्ठ आईएएस और कई बड़े नौकरशाहों की पत्नियों का हाथ बताया जाता है।

ताजमहल का संरक्षण केवल एएसआई ही कर रही है। टीएमसीसी प्रोजेक्ट के अलावा किसी एनजीओ ने ताज में कभी कोई संरक्षण कार्य नहीं कराया। टीएमसीसी में भी अधूरे छोडे़ गए काम को एएसआई ने ही पूरा किया। - डा. भुवन विक्रम, अधीक्षण पुरातत्वविद

क्या था टीएमसीसी
ताजमहल के मेन गेट, मेहमानखाना, सेंट्रल पाथवे, बागीचों के संरक्षण और विजिटर सेंटर के लिए टाटा ग्रुप के साथ आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का समझौता 21 जून 2001 में हुआ था। इस ताजमहल कंजरवेशन कोलेबरेटिव (टीएमसीसी) को दो करोड़ रुपये देने थे, लेकिन एएसआई को मिले 1.20 करोड़। बाकी रकम  दौरों, डिनर पर खर्च की गई। 10 प्रोजेक्ट में से अधूरे 7 काम एएसआई ने पूरे कराए।
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