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ग्रामीण महिलाओं की कहानियां: इस गांव में रहती हैं सिर्फ महिलाएं, पुरुषों के घुसने पर भी रोक, कारण कर देगा हैरान

Fri, 15 Oct 2021 07:51 AM IST
Himanshu Mishra हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 15 Oct 2021 07:51 AM IST
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सार
इस गांव में पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। गांव के तारो तरफ कंटीले तार लगाए गए हैं। अगर कोई जबरन घुसने की कोशिश करता है तो गांव की महिलाएं अपने अंदाज में उसे सजा देती हैं।  
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International Day of Rural Women, Story of rural womens of kenya
पूरे गांव में केवल महिलाएं रहती हैं। केवल पर्यटन के लिए आने वाले पुरुषों को ही गांव में एंट्री मिलती है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आज इंटरनेशनल डे ऑफ रूरल वीमेन यानी ग्रामीण महिलाओं का दिन है। यूं तो ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष और तरक्की की खूब कहानियां आपने सुनी होगी, लेकिन ये थोड़ी हटकर है। हम आपको आज एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां सिर्फ महिलाएं रहती हैं। पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। गांव के तारो तरफ कंटीले तार लगे हुए हैं। अगर कोई जबरन घुसने की कोशिश करता है तो गांव की महिलाएं अपने अंदाज में उसे सजा भी देती हैं।  

क्यों केवल महिलाएं रहती हैं? 

जूडिया (सबसे बीच में) छह साल पहले घर से भागकर इस गांव में आईं थीं। जूडिया के घरवाले जबरन उन्हें शादी के नाम पर बेच रहे थे।
जूडिया (सबसे बीच में) छह साल पहले घर से भागकर इस गांव में आईं थीं। जूडिया के घरवाले जबरन उन्हें शादी के नाम पर बेच रहे थे। - फोटो : सोशल मीडिया
'द गार्जियन' ने केन्या में बसे इस उमोजा गांव पर विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। गांव में रहने वाली ज्यादातर महिलाएं दुष्कर्म पीड़िता हैं। जिन्होंने जिंदगी में बहुत संघर्ष किया और तमाम तरह की प्रताड़नाएं झेली हैं। गांव की जेनी बताती हैं कि 1990 में सबसे पहले 15 महिलाएं इस गांव में रहने आईं। सभी महिलाएं ब्रिटिश सैनिकों की हवस का शिकार हुईं थीं। ब्रिटिश सैनिकों ने इन महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया था। 

जेनी ने खुद की कहानी भी साझा की। कहती हैं, 'मैं गांव के बाहर अपने जानवरों को चराने गई थी। इसी दौरान तीन ब्रिटिश सैनिकों ने मुझपर हमला कर दिया। तीनों ने एक-एक करके दुष्कर्म किया। मुझे काफी चोट भी आई। जब मैंने इसके बारे में अपने पति से कहा तो उसने भी डंडों से मुझे मारा। मैं दर्द से तड़प रही थी। फिर मैं अपने बच्चों के साथ यहां आ गई।' 

अलग गांव बनाने वाली महिला की कहानी

गांव में महिलाएं अपने बच्चों के साथ रहती हैं। यहां हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
गांव में महिलाएं अपने बच्चों के साथ रहती हैं। यहां हर रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। - फोटो : सोशल मीडिया
गांव की स्थापना रेबेका लोलोसोली ने की है। रेबेका को महिलाओं के लिए अलग गांव बनाने का आइडिया तब आया जब वो खुद पुरुष प्रताड़ना का शिकार हुईं। रेबेका बताती हैं, 'मैं अपने गांव की महिलाओं उनके अधिकारों के बारे में बता रही थी। ये मेरे गांव के पुरुषों को पसंद नहीं आया और उन्होंने ग्रुप बनाकर मुझे बहुत मारा।
कई दिनों तक मैं अस्पताल में रही। उस गांव में महिलाओं को बोलने और खुद से कुछ करने का हक नहीं था। इसलिए मैंने महिलाओं के लिए अलग गांव बनाने का फैसला लिया। मैं घर छोड़कर यहां आ गई और यहां मैंने महिलाओं का एक नया संसार बनाया। इस संसार में महिलाओं को उनके अधिकार बताए जाते हैं। बच्चियों को संघर्ष करना सिखाया जाता है।'

पर्यटन का केंद्र बना गांव

बेटियों को यहां पुरुष प्रताड़ना से बचने के लिए तरीके सिखाए जाते हैं। उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती है।
बेटियों को यहां पुरुष प्रताड़ना से बचने के लिए तरीके सिखाए जाते हैं। उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती है। - फोटो : अमर उजाला
इस गांव में अब 47 महिलाएं रहती हैं और 200 बच्चे हैं। अगर किसी का बेटा होता है उसे वह 18 साल तक गांव में रह सकता है, इसके बाद उसे गांव छोड़ना होता है। अब ये गांव एक तरह का टूरिस्ट प्लेस बन चुका है। यहां कई देशों से पर्यटक आते हैं। पर्यटन के तौर पर आने वाले पुरुषों को गांव में घुसने की अनुमति है, लेकिन इसके लिए उन्हें फीस देना पड़ता है। गांव की महिलाएं समबुरू परंपरा के कपड़े और आभूषण तैयार करके उसे बाजार में बेचती हैं। बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी ये परंपरागत आभूषण और कपड़े काफी अच्छे लगते हैं।
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