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सुप्रीम फैसले के बाद अयोध्या का मिजाज भांपने के लिए पुलिस कर रही ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल
Mon, 11 Nov 2019 02:30 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Mon, 11 Nov 2019 02:30 PM IST
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ऑनलाइन टूल्स के जरिए सोशल मीडिया पर नजर रख रही हैं खुफिया एजेंसियां
- फोटो : ayodhya verdict varanasi
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उच्चतम न्यायालय शनिवार को अयोध्या भूमि विवाद पर अपना फैसला सुना चुकी है। ऐसे में देशभर में सोशल मीडिया पर किसी भी तरह के ऑनलाइन प्रोपेगैंडा या बरगलाने की कोशिशों पर नजर रखने के लिए खुफिया एजेंसियां एक तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। जिसका नाम सेंटीमेंट एनालिसिस प्रोग्राम (भावना विश्लेषण कार्यक्रम) है।
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यह कार्यक्रम उत्तेजक संदेशों स्कैन करने और ऑनलाइन व्यवहार के माध्यम से प्रभावशाली युवाओं पर नजर रखने में पुलिस की मदद कर रहा है। यह कार्यक्रम ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म पर नजर रखकर साइट पर किए गए कमेंट और पोस्ट को फिल्टर करता है। ताकि चैट रुम नफरत फैलाने वाले संदेशों और यूजर्स की पहचान कर सकें।
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एक अधिकारी ने कहा, 'यह कार्यक्रम बिना फिल्टर वाली जानकारी का अध्ययन कर सकता है कि लोग वास्तव में किसी विषय के बारे में क्या कह रहे हैं और खतरों का प्रबंधन करता है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई व्यक्ति किसी पोस्ट में अयोध्या और बदला जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है तो यह उसे लेकर अलर्ट पैदा करता है।'
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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यदि डाटा टेक्स्ट में है तो उसे एकत्र करना और उसका विश्लेषण करना आसान हो जाता है। हालांकि चुनौतियां तब बढ़ जाती हैं जब तस्वीरें, ऑडियो या वीडियो का इस्तेमाल किया जाता है। अध्ययन के लिए उन्हें परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है। इसके बाद पुलिस यूजर की पहचान स्थापित करने की कोशिश करती है।
रीट्वीट और बॉट खातों के मामले में पुलिस के लिए यह एक कठिन कार्य हो जाता है। एक और तकनीक आधारित लेक्सिकल एनालिसिस का इस्तेमाल एक समय सीमा के अंदर सोशल मीडिया या कीवर्ड पर बार-बार खोजे जाने वाले शब्दों की पहचान करने के लिए की जा रही है।
यह पुलिस को इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध डाटा के माध्यम से खाताधारक के बारे में जानकारी की व्याख्या करने में मदद करता है। लेक्सिकल एनालिसिस पुलिस को सोशल मीडिया पर नजर रखने और संवेदनशील घटनाओं के दौरान गंभीर खतरों की पहचान करने में मदद करता है।
कुछ वर्षों पहले इस्लामिक स्टेट (आईएस) के नवोदित मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने के बाद ऑनलाइन गतिविधि की शक्ति का पता चला था।