फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Install ETP plant in three months:SC

तीन महीने में ईटीपी प्लांट लगाओ, नहीं तो बंद होंगी औद्योगिक इकाइयां: SC

Thu, 23 Feb 2017 12:52 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Feb 2017 12:52 AM IST
विज्ञापन
Install ETP plant in three months:SC
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

आम लोगों की जिंदगी को अहम बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के तमाम औद्योगिक इकाइयों को तीन महीने के भीतर प्राथमिक औद्योगिक प्रवाह शोधन संयंत्र(ईटीपी) लगाने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ  किया है कि इस अवधि के भीतर औद्योगिक इकाइयों ने ईटीपी नहीं लगाया तो उन्हें अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा। अदालत ने सभी राज्यों को इस काम को मिशन के तौर पर लेने के लिए कहा है। मालूम हो कि ईटीपी उद्योगों से निकलने वाले गंदे व प्रदूषित पानी की सफाई करने वाला संयंत्र है।

विज्ञापन

 
औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी सीधे नदी या अन्य जलाशयों में होने को गंभीरता से लेते हुए चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सभी औद्योगिक इकाइयों को तीन महीने के भीतर अपनी इकाई में ईटीपी लगाने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर उन इकाइयों का काम ठप कर दिया जाएगा। साथ ही उनके बिजली आपूर्ति सेवा भी खत्म कर दी जाएगी। इन इकाइयों को दोबारा तभी शुरू किया जाएगा जब वहां ईटीपी संयंत्र चालू हालत में हो।
विज्ञापन


 पीठ ने सभी राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सामूहिक रूप से सभी इकाइयों को नोटिस जारी करने के लिए कहा है। तीन महीने बाद संबंधित बोर्ड निरीक्षण करेगा कि कानूनी प्रावधानों के तहत औद्योगिक इकाइयों में ईटीपी लगा या नहीं। बोर्ड यह भी देखेगा कि ईटीपी चालू स्थिति में है या नहीं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

औद्योगिक कचरे की वजह से आम लोगों की जिंदगी खतरे में

Install ETP plant in three months:SC

पीठ ने साथ ही सभी स्थानीय निकायों को जमीन अधिग्रहण सहित अन्य औपचारिकताएं पूरी कर तीन वर्ष के भीतर समान औद्योगिक प्रवाह शोधन संयंत्र (सीईटीपी) स्थापित करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि सीईटीपी लगाने की जिम्मेदारी स्थानीय नगर निकायों की है और वह अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। सभी राज्यों को सीईटीपी स्थापित करने से संबंधित रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को देना होगा। 

पीठ ने स्थानीय निकायों से कहा कि अगर इसके लिए उन्हें वित्तीय संकट हो तो वह औद्योगिक इकाइयों पर उपकर लगाया जा सकता है। पीठ ने संबंधित राज्य प्रदूषण बोर्ड केअध्यक्ष और राज्य केपर्यावरण सचिव इस पर निगरानी रख्ंगे। इसकेअलावा सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कई अन्य निर्देश भी दिए हैं। 

सुनवाई केदौरान पीठ ने कहा कि अगर औद्योगिक कचरे की वजह से आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है तो यह परेशानी वाली बात है। लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार को लोगों की दिक्कतों को छोड़कर बाकी परेशानी ही नजर आती हैं। 

मालूम हो कि पिछली सुनवाई में पीठ ने पश्चिम बंगाल के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वहां केपर्यावरण सचिव को तलब किया था। अदालत पर्यावरण सुरक्षा समिति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। शुरुआत में याचिका गुजरात तक की सीमित थी लेकिन शीर्ष अदालत ने इसका दायरा बढ़ाकर सभी राज्यों को इसमें शामिल कर लिया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed