फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Insolvency and Bankruptcy Code: 12 big cases is challange for NDA government 

दिवालिया कानून: मोदी सरकार के सामने डेढ़ लाख करोड़ के 12 बड़े मामले निपटाने की चुनौती

Sat, 12 May 2018 03:54 AM IST
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली
शरद गुप्ता, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 12 May 2018 03:54 AM IST
विज्ञापन
Insolvency and Bankruptcy Code: 12 big cases is challange for NDA government 

केंद्र की एनडीए सरकार के लिए कंपनी दिवालिया कानून (इनसॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) का सामना कर रहे 12 बड़े मामलों को तेजी से निपटाने की चुनौती है। इस कानून को लागू हुए दो साल बीत गए हैं लेकिन सरकार को कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है। 

विज्ञापन


चुनौती की गंभीरता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अगले साल मई में होने वाले आम चुनाव से पहले सरकार को इन कंपनियों में फंसी आम आदमी की डेढ़ लाख करोड़ से ज्यादा की रकम को निकालना है।
विज्ञापन


सरकार के सामने कानून बनाने से ज्यादा बड़ी चुनौती उसे सही प्रकार से लागू करने की है। दिवालिया कानून के प्रावधानों के मुताबिक दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के छह महीने के अंदर ही इसे खत्म करना होगा। यदि किसी वजह से यह 180 दिन में पूरी नहीं हो पाती तो विशेष परिस्थितियों में 90 दिन की अवधि बढ़ाई जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन 12 बड़ी कंपनियों की दिवालिया प्रक्रिया की 270 दिन की अवधि खत्म हो गई है, लेकिन अदालत के दखल देने या प्रक्रियाजन्य देरी से इनमें से एक भी मामला सिरे नहीं चढ़ पाया है। ये सभी मामले पिछले साल जुलाई में ट्रिब्यूनल में दाखिल किए गए थे।

पहला मामला

Insolvency and Bankruptcy Code: 12 big cases is challange for NDA government 

वैसे भी इस कानून के तहत निपटाए गए मामलों में बैंकों को ज्यादा फायदा नहीं हुआ है। इस कानून के तहत निपटाया जाना वाला पहला मामला सिनर्जी डूरे ऑटोमोटिव लिमिटेड का था, जिस पर 972 करोड़ रुपये का कर्ज था। लेकिन बैंक इसमें से केवल 54 करोड़ रुपये ही वसूल कर पाए। यानी कर्ज का 94 फीसदी डूब गया।

सबसे बड़ा मामला
इस बार सबसे बड़ा मामला एस्सार स्टील का है जिस पर 44,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके लिए पहले नूमेटल नाम के एक समूह ने 18,000 करोड़ की बोली लगाई थी, जबकि आर्सेलरमित्तल ने 32,000 करोड़ की। बाद में नूमेटल ने भी अपनी बोली बढ़ाकर 32,000 करोड़ रुपये कर दी।

लेकिन स्टील किंग कहलाने वाले लक्ष्मी निवास मित्तल की कंपनी आर्सेलर ने नूमेटल की बोली स्वीकार किए जाने को चुनौती दी है। उसका कहना है कि नूमेटल में रेवांत रुइया के भी शेयर हैं। नियमानुसार दिवालिया कंपनी के मालिक अपनी ही कंपनी की नीलामी में बोली नहीं लगा सकते। और रेवांत तो नीलाम हो रही एस्सार के मालिकों में से हैं, इसलिए नूमेटल की बोली को खारिज कर देना चाहिए। फिलहाल एनसीएलटी के फैसले का इंतजार है।

नूमेटल का कहना है कि मित्तल पर उत्तम गलवा का 5,300 करोड़ और केएसएस पेट्रॉन का 7,000 करोड़ का कर्ज है। आईबीसी कोड के मुताबिक कोई कर्जदार कंपनी दूसरी कंपनी की नीलामी में हिस्सा नहीं ले सकती है। मित्तल ने हालांकि एस्सार खरीदने से पहले ये दोनों कर्ज खत्म करने की पेशकश की है, लेकिन मामला अभी सुलझा नहीं है।

यही हाल दूसरी बड़ी कंपनियों का है। जेएसडब्ल्यू की एईऑन इन्वेस्टमेंट के साथ मिल मॉनेट इस्पात को खरीदने की पेशकश पर दूसरी कंपनियों ने यह कहते हुए आपत्ति की है कि मॉनेट की मालकिन सीमा जाजोदिया जेएसडब्लू के मालिक सज्जन जिंदल की बहन हैं, इसलिए वे बोली में हिस्सा नहीं ले सकते हैं।

जेपी इंफ्रा के साथ कुछ और समस्या है। उसकी बोली लग रही है 8,000 करोड़ की, जबकि उसके पास 300 एकड़ जमीन है, जिसकी क़ीमत 10,000 करोड़ है। बाकी फ्लैट्स और दूसरी संपत्तियों की कीमत मिला कर कुल वैल्यूएशन 16,000 करोड़ रुपये है।

यह है प्रक्रिया

Insolvency and Bankruptcy Code: 12 big cases is challange for NDA government 

कंपनी द्वारा बैंक को कर्ज अदा न कर पाने की सूरत में वे इसे बैड लोन घोषित कर देते हैं। बैंक कर्ज वसूल करने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को बताते हैं। इसकी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन कराया जाता है। सभी कर्जदाताओं (सीओसी यानी कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स) के दावों की जांच की जाती है। नीलामी की निविदा मंगाई जाती है। 

एनसीएलटी सभी दावों की जांच कर सीओसी की सहमति लेता है। यदि नीलामी की राशि कर्जदाताओं को स्वीकार नहीं है, तो एनसीएलटी उसकी संपत्तियों की नीलामी कर कर्ज वसूल करने की कोशिश करता है। मिली रकम कर्जदाताओं को दे दी जाती है। यह सारा काम दावा दाखिल होने के नौ माह में खत्म किए जाने का प्रावधान है।

कंपनियों के पास फंसी बड़ी रकम का लेखा जोखा


कंपनी                    कर्ज की राशि                                        बोली                                                                                                 नुकसान

एस्सार स्टील                  44,000 करोड़ रुपये          बोली नूमेटल और आर्सेलरमित्तल से 32,000 करोड़                     12,000 करोड़ 

बिनानी सीमेंट                     15,000 करोड़                डालमिया भारत 6,700 और अल्ट्राटेक सीमेंट से 7,900                7,100 करोड़ 

भूषण पावर और स्टील         49,200 करोड़              ब्रिटेन की लिबर्टी हाउस से 18,500 करोड़                                  30,000 करोड़
                                                                                टाटा से 17,000 करोड़ 
                                                                                जेएसडव्ल्यू से  11,000



मोनेट इस्पात              10,700 करोड़                           जेएसडब्लू-एईऑन इन्वेस्टमेंट से 2,900 करोड़                            7,000 करोड़ का नुकसान


आलोक इंडस्ट्रीज           29,500 करोड़                        रिलायंस-जेएम फाइनेंशियल से  5,050 करोड़                            यानी 83 फीसदी हेयरकट


जेपी इंफ्रा                    10,000 करोड़                            बोली 8,000 करोड़ की, वैल्यू 16,000 करोड़ की                        8,000 करोड़ 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed