राहत: देश में सार्स-कोव 2 के किसी नए वैरिएंट का सबूत नहीं, इंसाकॉग का दावा, डेल्टा अब भी सक्रिय
कोरोना महामारी को लेकर थोड़ी राहतकारी खबर आई। एक प्रमुख स्वास्थ्य शोध संस्था ने कहा कि देश में डेल्टा के बाद कोरोना को कोई नया वैरिएंट सक्रिय नहीं है।
विस्तार
कोरोना महामारी के तीसरे चरण के अंदेशे के बीच जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टियम 'इंसाकॉग' ने कहा है कि देश में फिलहाल सार्स-कोव 2 के किसी नए वैरिएंट का सबूत नहीं मिला है। वर्तमान में डेल्टा वायरस सक्रिय है और इसका भी कोई नया वैरिएंट नहीं मिला, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को लेकर कोई अतिरिक्त चिंता जताई जाए।
इंसाकॉग ने 20 सितंबर के अपने नवीनतम बुलेटिन में कहा है कि भारत में डेल्टा वैरिएंट ही चिंता की मुख्य वजह बना हुआ है। इंसाकॉग ने कहा कि डेल्टा वैरिएंट के चलते देश में फैली दूसरी कोरोना लहर भी देश के कुछ राज्यों में निचले स्तर पर बनी हुई है। किसी नए वैरिएंट का सबूत नहीं मिला है। बता दें, डेल्टा के कहर के चलते देश में मार्च से मई के बीच दूसरी लहर के दौरान देश के अस्पतालों व स्वास्थ्य ढांचे का दम निकल गया था। लाखों की संख्या में रोज नए मरीज मिल रहे थे और हजारों मौतें हो रही थीं।
भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (इंसाकॉग) के अनुसार डेल्टा के सब वैरिएंट एवाई-1 में जून 2021 के बाद से मामूली वृद्धि हुई है, उस पर नजर रखी जा रही है। वहीं डेल्टा का एवाई-4 सबसे सक्रिय सब वैरिएंट है। यह भारत समेत पूरी दुनिया में सक्रिय नजर आ रहा है, लेकिन इसके डेल्टा से अधिक संक्रामक होने की संभावना नहीं है।
इंसाकॉग के अनुसार महाराष्ट्र में डेल्टा के एवाई-4 वैरिएंट के संक्रमण का क्लीनकल परीक्षण किया गया। इसमें पाया गया कि यह बी.1.617.2 से बहुत मिलता जुलता है। देश में अभी डेल्टा के इन उप स्वरूपों या सब वैरिएंट को लेकर को अतिरिक्त स्वास्थ्य चिंता नजर नहीं आती।
बता दें, पिछले सप्ताह इंसाकॉग ने कहा था कि भारत में अभी एमयू और सी.1.2 वैरिएंट नहीं मिले हैं। ये सार्स कोव2 के नए वैरिएंट हैं। कंसोर्टियम ने यह भी कहा था कि डेल्टा वैरिएंट व इसके उप स्वरूप मुख्य वैरिएंट बने हुए हैं।
डेल्टा से ज्यादा संक्रामक होने की संभावना नहीं
इंसाकॉग ने बीते सप्ताह कहा था कि न तो एवाई-1 के और न ही एवाई-2 के डेल्टा से अधिक संक्रामक होने की संभावना है। भारत में जून से वे उपलब्ध अनुक्रमणों में लगातार एक प्रतिशत से भी कम बने हुए हैं। महाराष्ट्र के रत्नागिरि और जलगांव, मध्यप्रदेश के भोपाल और तमिलनाडु के चेन्नई चार ‘क्लस्टर’ में इसके तेजी से फैलने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
डब्ल्यूएचओ ने चिंताजनक श्रेणी में रखा
दिल्ली स्थित आईजीआईबी के अनुसार पिछले महीने महाराष्ट्र में 44 फीसदी मरीजों में डेल्टा-4 वैरिएंट मिला था। जबकि केरल में यह संख्या 30 फीसदी से भी अधिक है। वर्तमान में डेल्टा-4 वैरिएंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चिंताजनक श्रेणी में रखा हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस के इन नए म्यूटेशन की वजह से महामारी की नई लहर की आशंका नहीं है।
नोबेल पुरस्कारों के आयोजन में बदलाव
देश में अब तक 84 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई गई
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि देश में कोविड-19 के टीके की कुल खुराक गुरुवार को 84 करोड़ को पार कर गई। शाम सात बजे तक 65 लाख 26 हजार 432 खुराक दी गई। देर रात तक दिन के लिए अंतिम रिपोर्ट के संकलन के साथ दैनिक टीकाकरण संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। देश में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू किया गया था। सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाने का फैसला किया गया था। इसके बाद फ्रंटलाइन वर्कर्स टीकाकरण 2 फरवरी से शुरू हुआ था। टीकाकरण का अगला चरण 1 मार्च से 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और 45 साल से ज्यादा गंभीर बीमार लोगों के लिए शुरू किया गया। एक अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया। अंत में सरकार ने तब 1 मई से 18 वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को टीकाकरण की अनुमति देकर अपने टीकाकरण अभियान का विस्तार करने का निर्णय लिया।