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पूर्व सेना प्रमुख जनरल पांडे बोले: आधुनिक युद्ध का तरीका बदला, सूचना आधारित अभियान सुरक्षा का अहम हिस्सा

Mon, 25 May 2026 08:29 PM IST
निर्मल कांत पीटीआई, पुणे।
पीटीआई, पुणे। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 25 May 2026 08:29 PM IST
सार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि सूचना, साइबर और जन धारणा के स्तर पर भी लड़े जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि डीपफेक और सोशल मीडिया के जरिये फैलाई जा रही गलत जानकारी से सच्चाई जानना मुश्किल हो गया है। पढ़िए रिपोर्ट-

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Information ops, perception management have taken centre stage in modern warfare: Fmr COAS Pande
जनरल मनोज पांडे, पूर्व सेना प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने सोमवार को कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने कहा कि अब सूचना आधारित अभियान, धारणा प्रबंधन और  किसी घटना को एक खास तरीके से पेश करना (नैरेटिव) राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में आ गए हैं।
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उन्होंने कहा कि डीपफेक, बॉट नेटवर्क, झूठी कहानियां और इंटरनेट के जरिये फैलाई गई गलत जानकारी के कारण यह पता समझना मुश्किल हो गया है कि किस पक्ष की जीत या हार हो रही है। पूर्व सेना प्रमुख जेएस करंदीकर स्मारक व्याख्यान में बोल रहे थे। 
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'अब केवल सीमा पर नहीं लड़े जाते युद्ध'
उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा केवल बाहरी हमलों या आतंकवाद जैसी आंतरिक चुनौतियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका दायरा काफी बढ़ गया है। जनरल पांडे ने कहा कि अब युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़े जाते, बल्कि सूचना, साइबर, अंतरिक्ष और जन धारणा के क्षेत्र में भी लड़े जाते हैं।
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'नई चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा'
उन्होंने कहा कि बदलते समय में सेना को इन नए प्रकार की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पहले सूचना संचालन को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। लेकिन अब यह सबसे अहम क्षेत्र बन गया है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय राय प्रभावित होती है।


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'सोशल मीडिया और धारणा निर्माण का असर'
पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि हाल के वैश्विक संघर्षों में यह साफ देखा गया है कि सूचना, सोशल मीडिया और धारणा निर्माण का कितना बड़ा असर होता है। उन्होंने मुंबई आतंकी हमले और अन्य युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा कि मीडिया की भूमिका भी राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में बेहद अहम है।

'मीडिया देश का रणनीतिक संसाधान'
जनरल पांडे ने कहा कि मीडिया को सिर्फ राज्य का हिस्सा नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती का एक अहम स्तंभ माना जाना चाहिए, क्योंकि वह एक रणनीतिक संसाधन है।
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