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HC: सोशल मीडिया से ली गई जानकारी जनहित याचिका की दलीलों का हिस्सा नहीं हो सकती, बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश
Tue, 28 Nov 2023 02:31 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 28 Nov 2023 02:31 PM IST
सार
याचिका में दावा किया गया था कि महाराष्ट्र में हर साल असुरक्षित जल निकायों की वजह से 1500-2000 लोगों की मौत हो जाती है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने अजीत सिंह घोरपड़े की इस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया से इकट्ठा की गई जानकारी जनहित याचिका की दलीलों का हिस्सा नहीं हो सकती। मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी की। दरअसल याचिका में दावा किया गया था कि महाराष्ट्र में हर साल असुरक्षित जल निकायों की वजह से 1500-2000 लोगों की मौत हो जाती है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस आरिफ डॉक्टर की खंडपीठ ने अजीत सिंह घोरपड़े की इस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
इस दावे पर उठे सवाल
जनहित याचिका में मांग की गई थी कि महाराष्ट्र सरकार को जल निकायों की सुरक्षा के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील मनिंदर पांडे से खंडपीठ ने सवाल किया कि असुरक्षित जल निकाय की वह से हर साल 1500-2000 लोगों के मरने की जानकारी उन्होंने कहां से प्राप्त की है। इस पर वकील ने कहा कि उन्होंने ये जानकारी कुछ अखबारों और सोशल मीडिया से हासिल की है।
हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया से इकट्ठा की गई जानकारी जनहित याचिका की दलीलों का हिस्सा नहीं हो सकती। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं, आप न्यायपालिका का समय बर्बाद कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कोई पिकनिक मनाने गए और दुर्घटनावश डूब गया तो यह अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कैसे है? कोर्ट ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं कि हर झरने और जल स्त्रोत के नजदीक पुलिस तैनात कर दी जाए? कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी के साथ याचिका दायर करने को कहा।
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इस दावे पर उठे सवाल
जनहित याचिका में मांग की गई थी कि महाराष्ट्र सरकार को जल निकायों की सुरक्षा के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील मनिंदर पांडे से खंडपीठ ने सवाल किया कि असुरक्षित जल निकाय की वह से हर साल 1500-2000 लोगों के मरने की जानकारी उन्होंने कहां से प्राप्त की है। इस पर वकील ने कहा कि उन्होंने ये जानकारी कुछ अखबारों और सोशल मीडिया से हासिल की है।
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हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया से इकट्ठा की गई जानकारी जनहित याचिका की दलीलों का हिस्सा नहीं हो सकती। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि आप इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं, आप न्यायपालिका का समय बर्बाद कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि कोई पिकनिक मनाने गए और दुर्घटनावश डूब गया तो यह अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कैसे है? कोर्ट ने पूछा कि आप क्या चाहते हैं कि हर झरने और जल स्त्रोत के नजदीक पुलिस तैनात कर दी जाए? कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पूरी जानकारी के साथ याचिका दायर करने को कहा।
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