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CIC Denied Limestone Export Info: मेघालय से बांग्लादेश चूना पत्थर निर्यात की सूचना देने से इनकार! वजह आई सामने

Fri, 02 Jan 2026 06:43 PM IST
अमन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Fri, 02 Jan 2026 06:43 PM IST
सार

केंद्रीय सूचना आयोग ने मेघालय से बांग्लादेश को चूना पत्थर भेजने वाले व्यापारियों की जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। आयोग ने इसे 'व्यावसायिक गोपनीयता' का मामला मानते हुए कहा कि इससे निर्यातकों के व्यापारिक हितों को नुकसान हो सकता है। मामले में आयोग ने अपील खारिज कर दी है।

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Information Commission refused to provide information on the export of limestone from Meghalaya to Bangladesh
सूचना का अधिकार (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय सूचना आयोग ने मेघालय से बांग्लादेश भेजे गए चूना पत्थर के निर्यातकों का विवरण देने से मना करने के फैसले को सही ठहराया है। आयोग का कहना है कि यह जानकारी 'व्यावसायिक गोपनीयता' के दायरे में आती है और इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। आयोग ने माना कि ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने से संबंधित निर्यातकों के व्यापारिक हितों और उनकी प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है। पैनल ने कहा कि इसमें कोई बड़ा जनहित नहीं है, इसलिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(डी) के तहत जानकारी देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे तीसरे पक्षों को नुकसान हो सकता है।
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क्या था मामला?
मामले में आरटीआई आवेदक डब्ल्यू मैथ्यू मावदखाप ने शिलांग सीमा शुल्क विभाग से वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान भोलागंज सीमा शुल्क केंद्र के रास्ते बांग्लादेश को चूना पत्थर भेजने वाले निर्यातकों के नाम और पते मांगे थे। विभाग ने कानून का हवाला देते हुए जानकारी देने से मना कर दिया था। पहली अपील खारिज होने के बाद आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया था।
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आयोग ने क्या तर्क दिया?
सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने अपील खारिज करते हुए कहा कि निर्यातकों के नाम, पते और निर्यात की मात्रा से जुड़ा विवरण व्यावसायिक जानकारी है। इसे आमतौर पर गोपनीय माना जाता है। आयोग ने कहा कि किसी निर्यातक के व्यापार की मात्रा का खुलासा करने से उनके विरोधियों को रणनीतिक जानकारी मिल सकती है, जिससे उनके व्यापार पर बुरा असर पड़ सकता है।

आदेश में कहा गया है कि सरकारी विभाग निजी कंपनियों से यह जानकारी भरोसे के आधार पर लेते हैं। इसे बिना किसी ठोस वजह के सार्वजनिक करने से भरोसा और गोपनीयता कमजोर होगी।


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जनहित साबित करने में नाकाम रहे आवेदक
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता आयोग के सामने पेश नहीं हुए और न ही वे यह साबित कर सके कि यह जानकारी मांगना जनता के हित में क्यों जरूरी है। सीमा शुल्क विभाग ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि जब तक कानूनन जरूरी न हो या संबंधित पक्ष की सहमति न हो, निर्यातकों का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाता। आयोग ने जानकारी न देने के फैसले को कानूनी रूप से सही माना और अपील खारिज कर दी।

बता दें कि मेघालय खनिज संसाधनों से संपन्न है और बांग्लादेश के साथ लंबी सीमा साझा करता है। यहां से चूना पत्थर और पत्थर के टुकड़ों का निर्यात राज्य की एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि है।

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