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Indira Gandhi: ओटी ले जाने से पहले ही थम गई थीं सांसें; एम्स की पहली महिला निदेशक ने बताया 31 अक्तूबर का वाकया

Sat, 31 May 2025 11:56 PM IST
Jyoti Bhaskar ज्योति भास्कर
Updated Sat, 31 May 2025 11:56 PM IST
सार

देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अंगरक्षकों ने आज से करीब 41 साल पहले निर्ममता के साथ उन्हें गोलियों से भून डाला था। इस हत्याकांड की स्याह स्मृतियां आज भी सिहरन पैदा करती हैं। ताजा घटनाक्रम में एम्स की पहली महिला निदेशक स्नेह भार्गव ने अपनी किताब में कुछ ऐसे ही संस्मण साझा किए हैं। पढ़िए स्नेह ने किताब में किन पहलओं का उल्लेख किया है।

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Indira Gandhi 31st October Medical Status AIIMS first female Director Sneh Bhargava shares memory
एम्स की पहली महिला निदेशक स्नेह भार्गव और इंदिरा गांधी (फाइल) - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब / एएनआई

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) आम तौर पर हजारों-लाखों मरीजों को जीवनदान देने और देश के सर्वोत्तम उपचारों में एक मुहैया कराने की प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। कुछ दशक पहले इस संस्थान में काम करने वाले डॉक्टरों-पदाधिकारियों की स्मृतियों में 31 अक्तूबर, 1984 की तारीख खास तौर पर अंकित है। खास बात ये है कि इंदिरा की हत्या के दिन यानी 31 अक्तूबर के दिन ही नई दिल्ली के एम्स में पहली महिला निदेशक स्नेह भार्गव को अपना पदभार ग्रहण करना था।
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Indira Gandhi 31st October Medical Status AIIMS first female Director Sneh Bhargava shares memory
एम्स दिल्ली - फोटो : ANI
नौकरी ज्वाइन करने से पहले सामने पहुंचा पीएम का क्षत-विक्षत शव
स्नेह ने अपनी किताब- द वूमन हू रन एम्स में कुछ ऐसी मार्मिक घटनाओं का जिक्र किया है, जिसके बारे में सोचने पर आज भी सिहरन होती है। वे बताती हैं कि उन्हें अपनी नौकरी ज्वाइन करनी थी। बकौल रेडियोलॉजिस्ट भार्गव 31 अक्तूबर 1984 के दिन वे इस शीर्ष चिकित्सा संस्थान में पद ग्रहण करने पहुंची ही थीं। हालांकि, उनकी नियुक्ति की पुष्टि के लिए होने वाली औपचारिक बैठक से ठीक पहले उनके सामने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पार्थिव देह रखी थी।
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Indira Gandhi 31st October Medical Status AIIMS first female Director Sneh Bhargava shares memory
एम्स की पहली महिला निदेशक स्नेह भार्गव और इंदिरा गांधी (फाइल) - फोटो : यूट्यूब वीडियो ग्रैब / एएनआई
इंदिरा गांधी को लगी थी 33 गोलियां, ऑपरेशन थिएटर पहुंचाने से पहले ही थम चुकी थीं सांसें
इंदिरा गांधी पर हमले की घटना का जिक्र करते हुए स्नेह भार्गव अपनी किताब में लिखती हैं कि जब इंदिरा गांधी को ऑपरेशन थिएटर ले जाने का निर्णय लिया गया, उससे पहले ही उनकी सांसें थम चुकी थीं। तत्कालीन प्रधानमंत्री के शरीर पर 33 गोलियां लगी थी। कुछ गोलियां उनके शरीर के आर-पार हो गई थीं। लेकिन, कुछ गोलियां शरीर के अंदर ही रह गई थीं।  गोलियों के कारण दाहिने फेफड़े और लीवर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे।
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Indira Gandhi 31st October Medical Status AIIMS first female Director Sneh Bhargava shares memory
इंदिरा गांधी। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
गोलियों से छलनी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
31 अक्तूबर 1984 का दिन याद करते हुए भार्गव ने कहा, उस समय उनकी आयु केवल 54 साल थी। उन्हें अच्छी तरह याद है कि जब ऑपरेशन थियेटर में इंदिरा गांधी को खून चढ़ाया जा रहा था तो यह एक हारी हुई लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि अपनी बैठक से चंद लम्हे पहले ही वह गोलियों से छलनी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेजान शरीर के सामने खड़ी थीं। सर्जन बहते खून (रक्तस्राव) को रोकने की कोशिश कर रहे थे। गोलियां बाहर निकलकर फर्श पर गिरती जा रही थीं।

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Indira Gandhi 31st October Medical Status AIIMS first female Director Sneh Bhargava shares memory
इंदिरा गांधी (फाइल) - फोटो : एएनआई
गर्दन की नस के जरिए खून चढ़ाने के प्रयास, बी या ओ नेगेटिव रक्त की तलाश
भार्गव अपनी किताब में लिखती हैं कि एक चिकित्सा कर्मी ने इंदिरा गांधी की गर्दन की नस के जरिये रक्त चढ़ाना जारी रखा, लेकिन रक्तस्राव रुकने का नाम नहीं ले रहा था। अगले कई घंटे दिल्ली के अस्पतालों में बी-नेगेटिव या ओ-नेगेटिव खून तलाशने में बीते। पूर्व प्रधानमंत्री की जान बचाने के लिए तमाम कोशिशें हो रही थीं, लेकिन वास्तव में जब उन्हें एम्स लाया गया था, तभी उनकी मृत्यु हो चुकी थी।

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