फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indias chance to defeat the dragon Why is Iran cursing China for the failed attack on Israel

Defence: भारत के हाथ लगा ड्रैगन को पछाड़ने का दांव! इस्राइल पर नाकाम हमले को लेकर ईरान क्यों कोस रहा चीन को?

Wed, 24 Apr 2024 03:12 PM IST
Harendra Chaudhary हरेंद्र चौधरी
Updated Wed, 24 Apr 2024 03:12 PM IST
सार

ईरान का शाहेद ड्रोन, जो टारगेट पर निशाना साध कर खुद को नष्ट करने में सक्षम है, इसमें जो इंजन लगा है, उसे बीजिंग माइक्रोपायलट यूएवी फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने बनाया है। चीनी कंपनी ईरान की मैडो इंपोर्ट एंड एक्सपोर्ट कंपनी लिमिटेड को इंजन निर्यात करती है।

विज्ञापन
Indias chance to defeat the dragon Why is Iran cursing China for the failed attack on Israel
भारत के हाथ लगा ड्रैगन को पछाड़ने का दांव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दुनियाभर में तेजी से हथियारों की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। कई देशों ने अपने रक्षा खर्च का बजट बढ़ा दिया है। वहीं पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा हथियार एशियाई देशों ने खरीदे हैं। भारत 9.8 फीसदी हथियार आयात के साथ दुनिया में पहले नंबर पर है। वहीं पिछले साल भी भारत सबसे ज्यादा हथियार आयात करने वाला देश था। भारत का फोकस अब आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में हथियारों का निर्माण कर उन्हें दूसरे देशों को बेचना है। इसे लेकर हाल ही में भारत ने कई देशों में डिफेंस अताशे की भी नियुक्ति की है। तमाम देश भारतीय हथियारों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
विज्ञापन


हाल ही में भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात किया है, और भी देश ब्रह्मोस को लेकर इच्छुक हैं। इसकी वजह है कि भारत में बने हथियारों की अचूक मारक क्षमता और गुणवत्ता चीनी हथियारों से बेहतर है। चीन में बने हथियारों की क्वॉलिटी को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं और हाल ही में इसका शिकार बना है ईरान। इन सब वजहों के चलते हाल के वर्षों में चीन का हथियार निर्यात घटा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हथियारों की रेस में चीन को मात देने के लिए भारत के पास सुनहरा मौका है। 
विज्ञापन


मिसाइल हमला फेल होने के लिए ईरान ठहरा रहा है चीन को जिम्मेदार
हाल ही में ईरान-इस्राइल तनाव के बीच ईरान ने इस्राइल पर 300 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन बरसाए थे, जिनमें से 99 फीसदी मिसाइल और ड्रोन इस्राइल, अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर गिरा दिए थे। इस्राइल के आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम ने अपने कम को बखूबी अंजाम दिया था। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि ईरान ने अपनी मिसाइलों और ड्रोन में जो कंपोनेंट इस्तेमाल किए थे, वह चीन से खरीदे गए थे। अब ईरान के रक्षा विशेषज्ञ चीनी कंपोनेंट्स पर सवाल उठा रहे हैं। ईरान के रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका, इस्राइल, फ्रांस और ब्रिटेन दशकों से चीन को ट्रैक कर रहे हैं और वे जानते थे कि कामिकेज ड्रोन कितना गोला-बारूद ले जा सकते हैं। वे ये भी जानते थे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की ट्रैजेक्टरी क्या होगी?
विज्ञापन
विज्ञापन


ईरान की मिसाइलों में चीनी कंपोनेंट
ईरान का शाहेद ड्रोन, जो टारगेट पर निशाना साध कर खुद को नष्ट करने में सक्षम है, इसमें जो इंजन लगा है, उसे बीजिंग माइक्रोपायलट यूएवी फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ने बनाया है। चीनी कंपनी ईरान की मैडो इंपोर्ट एंड एक्सपोर्ट कंपनी लिमिटेड को इंजन निर्यात करती है। सटीक लक्ष्य के लिए ईरान की सभी मिसाइलों में लगे सेंसर और नेविगेशन के लिए लगे ऑप्टिकल इंस्ट्रूमेंट चीन की तीन कंपनियां वुहान आईआरसीईएन टेक्नोलॉजी कंपनी लिमिटेड, रेबीम ऑप्ट्रोनिक्स कंपनी लिमिटेड और सनवे टेक कंपनी लिमिटेड, बनाती हैं। ये तीनों चीनी कंपनियां ईरानी कंपनियों को कंपोनेंट सप्लाई करती हैं। 

ईरान के इस्फ़हान में चीन ने बनाई मिसाइल फैक्टरी
वहीं चीन आधिकारिक तौर पर ईरान को एंटी-शिप मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें, लड़ाकू जेट, टैंक और एंटी-टैंक गन भी निर्यात करता है। 1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति के ठीक बाद, चीन ने ईरान की मिसाइल टेक्नोलॉजी को बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। वहीं चीन ने तेहरान को सैकड़ों मिसाइल गाइडेंस सिस्टम समेत तमाम और कम्प्यूटराइज्ड मशीन टूल्स भी उपलब्ध कराए हैं। अगस्त 1996 में चीन ने ईरान की डिफेंस इंडस्ट्रीज को जाइरोस्कोप, एक्सेलेरोमीटर और मिसाइल गाइडेंस के लिए जरूरी साजोसामान बेचने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। ईरान के इस्फ़हान के नजदीक सबसे बड़ी मिसाइल फैक्टरी भी है, जिसे चीन के सहयोग से तैयार किया गया है। यह वही जगह है जिसे हाल ही में इस्राइली ड्रोन ने निशाना बनाया था। 1987-88 में ईरान की स्कड-बी मिसाइलों को यहीं असेंबल किया गया था। इसके अलावा चीन ने ईरान में बैलिस्टिक मिसाइल प्लांट और तेहरान के पूर्व में एक टेस्ट रेंज और सॉलिड फ्यूल रॉकेट्स को भी बनाने में मदद की है। 

कारगर नहीं चीन के हथियार
वहीं अब रक्षा विशेषज्ञ चीन की तकनीक के ऊपर सवाल खड़े कर रहे हैं। रक्षा मामलों की जानकार ऋतु शर्मा बताती हैं कि रूस-यूक्रेन और इस्राइल-ईरान संघर्ष में चीनी तकनीक उतनी कारगर नहीं साबित हुई है। वह कहती हैं कि 13 अप्रैल को ईरान ने इस्राइल के खिलाफ, जो 300 यूएवी और मिसाइलें इस्तेमाल की थीं, उनमें से 99 फीसदी इस्राइल ने अमेरिका और ब्रिटेन से सहयोग से मार गिराईं। खास बात यह है कि ये सभी हथियार तकनीक चीन की सेना में शामिल हैं और जिस तरह ईरान के हमले को बेअसर किया गया, वह पूरी दुनिया ने देखा है। उनमें वे देश भी शामिल हैं, जो चीन से हथियार और मिलिट्री टेक्नोलॉजी खरीदने की सोच रहे थे।  

ऋतु शर्मा के मुताबिक पाकिस्तान ने भी चीन से आयात किए गए युद्धपोतों के इंजन और रडार के बारे में शिकायत की है। पाकिस्तान पहले ही चीनी लड़ाकू विमान जेएफ-17 थंडर में खराबी की शिकायत कर चुका है। कुछ ऐसी ही शिकायत बांग्लादेश, म्यांमार, अल्जीरिया, केन्या और नाइजीरिया भी चीनी हथियारों को लेकर शिकायत कर चुके हैं। 

चीनी निर्यात में 23 फीसदी की गिरावट
10 मार्च को प्रकाशित SIPRI की रिपोर्ट बताती है कि हाल ही कुछ सालों में चीन का मिलिट्री एक्सपोर्ट गिरा है। चीन ने प्रतिबंधों को दरकिनार कर उत्तरी कोरिया को हथियार दिए। रूस और ईरान को संवेदनशील हथियारों की तकनीक मुहैया कराई। चीन ने ईरान को 150 किमी की रेंज वाली सीएसएस-8 मिसाइलों की सप्लाई की और अब वह उसे एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें को बनाने में भी मदद कर रहा है। वहीं ईरान अब चीनी टेक्नोलॉजी पर आधारित 1500 किमी रेंज वाली 'जेलजल-3' मिसाइल भी बना रहा है। SIPRI की रिपोर्ट में कहा गया है, "2019-2023 की अवधि के दौरान हथियारों के पांच सबसे बड़े निर्यातक अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और जर्मनी थे। सभी हथियारों के निर्यात में उनका हिस्सा 75 फीसदी था। जबकि अमेरिका और फ्रांसीसी हथियारों का निर्यात बढ़ा। वहीं रूस, चीन और जर्मनी का निर्यात गिर गया।”

रिपोर्ट के मुताबिक 2019-23 में कुल वैश्विक हथियार निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 5.8 फीसदी थी, जो 2014-18 और 2019-23 के बीच गिर कर 5.3 फीसदी हो गई। चीन ने 61 फीसदी हथियार पाकिस्तान को सप्लाई किए। बाकी खरीदारों में बांग्लादेश, थाईलैंड और म्यांमार शामिल रहे। वहीं चीन ने अफ्रीकी देशों को 19 फीसदी हथियार निर्यात किए। लेकिन 2019-2023 के दौरान चीनी निर्यात में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। 

जो देश चीन से हैं परेशान, भारत उन पर करे फोकस
वहीं भारत के लिए अच्छी खबर है। डिफेंस इकनॉमिक्स के प्रोफेसर नवीन वर्मा के मुताबिक दुनियाभर में चीनी हथियारों की क्वॉलिटी को लेकर शिकायत करने वाले देशों की सख्या बढ़ रही है, वहीं भारत के लिए हथियारों का बाजार भी उतना ही बड़ा होता जा रहा है। भारत ने हाल ही में फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की डिलीवरी की है। फिलीपींस भारत से और भी कई हथियार खरीदने का इच्छुक है।

प्रोफेसर वर्मा कहते हैं कि भारत ये हथियार उन देशों को भी बेच सकता है, जो चीन की नीतियों से दुखी हैं। इनमें वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया के साथ चीन का जमीनी विवाद है। अगर ये देश भारत से ब्रह्मोस जैसी मिसाइल खरीदते हैं, तो वे चीन के सामने कड़ा प्रतिरोध जता सकते हैं, जो इस क्षेत्र के लिए सामरिक तौर पर काफी अहम होगा। इसके अलावा भारत इन देशों के साथ दीर्घकालिक डिफेंस पार्टनरशिप कर सकता है।


भारत इस क्षेत्र में हथियारों की सप्लाई में बड़ा खिलाड़ी बन सकता है। रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर ब्रह्मोस की ही बात करें, तो यह इतनी ताकतवर मिसाइल है कि इसकी रफ्तार और अचूक मारक क्षमता इसे दुश्मन के जहाजों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद घातक है। ब्रह्मोस को जहाजों, पनडुब्बियों और विमानों समेत कई प्लेटफार्मों से लॉन्च किया जा सकता है। वहीं खरीदार देश अपने मौजूद डिफेंस सिस्टम में इसे आसानी से शामिल कर सकते हैं। प्रोफेसर वर्मा के मुताबिक ब्रह्मोस मिसाइल की फिलीपींस को डिलीवरी चीन के लिए तो बड़ा संदेश है ही, वहीं भारत ने भी ग्लोबल मिसाइल मार्केट में अपना दबदबा कायम किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed