फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Railways Hydrogen Powered Trains test success Electric and Fossil Fuel Engines bogeys Global technology

भारत में हाइड्रोजन से चलेंगी ट्रेन: रेलवे की योजना क्या, बिजली-जीवाश्म ईंधन से चलने वाली ट्रेनों से कितनी अलग?

Mon, 28 Jul 2025 05:44 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 28 Jul 2025 05:44 PM IST
विज्ञापन
सार
हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने वाली ट्रेनें किस तकनीक पर काम करती हैं? जीवाश्म ईंधन और बिजली के मुकाबले हाइड्रोजन से ट्रेनों का संचालन कितना अलग है? भारत में हाइड्रोजन ट्रेन को लॉन्च करने की कैसे तैयारी की जा रही है? अगर इन ट्रेनों की लॉन्चिंग होती है तो भारत इस तकनीक से रेलवे संचालन करने वाले किन चुनिंदा देशों के वर्ग में खड़ा हो जाएगा? आइये जानते हैं...
loader
Indian Railways Hydrogen Powered Trains test success Electric and Fossil Fuel Engines bogeys Global technology
भारतीय रेलवे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत में अब जल्द ही ट्रेनें बिना बिजली और जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल के दौड़ती दिखेंगी। हाल ही में तमिलनाडु के चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (आईसीएफ) में ट्रेन के ऐसे डिब्बों का परीक्षण सफल रहा है, जो हाइड्रोजन का इस्तेमाल करेंगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में खुद इसकी पुष्टि की थी। 


आखिर हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने वाली ट्रेनें किस तकनीक पर काम करती हैं? जीवाश्म ईंधन और बिजली के मुकाबले हाइड्रोजन से ट्रेनों का संचालन कितना अलग है? भारत में हाइड्रोजन ट्रेन को लॉन्च करने की कैसे तैयारी की जा रही है? अगर इन ट्रेनों की लॉन्चिंग होती है तो भारत इस तकनीक से रेलवे संचालन करने वाले किन चुनिंदा देशों के वर्ग में खड़ा हो जाएगा? आइये जानते हैं...

पहले जानें- किस तकनीक पर काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन? 
सीधे शब्दों में समझा जाए तो हाइड्रोजन ट्रेन उन ट्रेनों को कहा जाता है, जो कि संचालन के लिए बिजली या जीवाश्म ईंधन के बजाय हाइड्रोजन (H2) का इस्तेमाल करती हैं। इन ट्रेनों के इंजन को इस तरह बनाया जाता है कि इनमें ऊर्जा हाइड्रोजन के प्रयोग से पैदा की जाती है। 

हाइड्रोजन ट्रेनों से चूंकि ऑक्सीजन से प्रतिक्रिया के बाद मुख्य उत्पाद के तौर पर ऊर्जा (गर्मी) और अतिरिक्त उत्पाद (बायप्रोडक्ट) में पानी (H2o) निकलता है, इसलिए इसे स्वच्छ ईंधन कहा जाता है। 

जीवाश्म ईंधन-बिजली के मुकाबले ट्रेनों में हाइड्रोजन का इस्तेमाल कितना बेहतर?
जीवाश्म ईंधन मुख्यतः कार्बन (C) आधारित होते हैं, इसलिए इनके प्रयोग से वातावरण में कार्बन का उत्सर्जन सबसे ज्यादा होता है, जो कि वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों की अधिकता और ग्लोबल वॉर्मिंग का मुख्य कारण है। इसे पर्यावरण के लिए घातक माना जाता है। इसलिए डीजल से चलने वाले इंजन सबसे बड़े प्रदूषकों में गिने जाते हैं। भारत में पहले ही इनका प्रयोग कम किया जा चुका है। 

Railway: विश्व की सबसे लंबी-शक्तिशाली होगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, वैष्णव बोले- परियोजना पर काम शुरू

भारत में मौजूदा समय में बिजली का इस्तेमाल करके चलने वाली ट्रेनें प्रदूषण कम करने के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। लेकिन इनके प्रयोग में एक पेंच यह है कि जिस बिजली से यह ट्रेनें चलती हैं, उसे फिलहाल ऐसे पावर स्टेशनों से पैदा किया जाता है जो कि कोयले (एक और जीवाश्म ईंधन) के प्रयोग से चलते हैं। ऐसे में बिजली से चलने वाली ट्रेनें खुद भले ही प्रदूषण का सीधे तौर पर कारण नहीं होतीं, लेकिन इन्हें मिलने वाली बिजली को जीवाश्म ईंधन से ही पैदा किया जाता है, जो कि पर्यावरण में कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है।
 इसके चलते हाइड्रोजन के जरिए संचालित होने वाली ट्रेनें पर्यावरण के लिए काफी बेहतर होती हैं। यह ट्रेनें न सिर्फ कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह बंद कर देती हैं, बल्कि आम ईंधनों के मुकाबले ज्यादा स्वच्छ और ज्यादा ऊर्जा देने वाली साबित होती हैं। 

भारत में हाइड्रोजन ट्रेन को लॉन्च करने की तैयारी कैसी, वजह क्या?

भारत में कितना आ सकता है हाइड्रोजन ट्रेनों को उतारने का खर्च?
रेल मंत्रालय के मुताबिक, भारत में स्वच्छ ऊर्जा के प्रयोग से ट्रेन चलाने के लिए 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' नाम से एक पहल शुरू की गई थी। इसके तहत देश में पहले चरण में 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसी हर एक ट्रेन के निर्माण से लेकर उत्पादन और इन्हें ट्रैक पर उतारने में 80 करोड़ रुपये तक का खर्च आ सकता है। इन्फ्रास्ट्रक्चर में 70 करोड़ की अतिरिक्त लागत आने का अनुमान है। 

रेलवे ने इसके साथ ही मौजूदा समय में डीजल से चलने वाली- DEMU ट्रेनों में भी रेलवे ने हाइड्रोजन फ्यूल सेल लगवाए हैं। इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए 111.83 करोड़ अलग से तय हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीजल से चलने वाली जिन ट्रेनों में हाइड्रोजन फ्यूल सेल्स लगवाए गए हैं, उनमें से उत्तर भारत में हरियाणा की जींद-सोनीपत के 89 किलोमीटर की रेल लाइन पर यह ट्रायल काफी हद तक सफल रहा है। कुछ तकनीकी समस्याओं को दर्ज किया जा चुका है और इन्हें दूर करने का काम किया जा रहा है। इसके अलावा कालका से शिमला तक जाने वाले रेलवे ट्रैक पर भी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनों के परीक्षण कराए जाने की तैयारी है। 

यात्रीगण कृपया ध्यान दें: नए साल पर जींद से सोनीपत दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, वंदेभारत की तरह दिखेगी

अधिकारियों का कहना है कि मुख्य तकनीकी समस्याएं हाइड्रोजन फ्यूल सेल की क्षमता को बढ़ाना है, ताकि इससे मिलने वाली ऊर्जा बढ़ाई जा सके। इससे न सिर्फ ट्रेनों का माइलेज बढ़ेगा, बल्कि इनकी गति में भी इजाफा दर्ज किया जा सकेगा। 


 

किन देशों के पास मौजूद है हाइड्रोजन ट्रेन?
माना जा रहा है कि हाइड्रोजन ट्रेनों का अलग-अलग रूट पर परीक्षण सफल होने के बाद इनका संचालन भी जल्द शुरू किया जा सकता है। हालांकि, भारत से पहले ही पांच देश हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन कर रहे हैं। इनमें जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। 

जर्मनी: दुनिया में सबसे पहले हाइड्रोजन ट्रेन जर्मनी में 2016 में उतारी गई थी। 2018 में इस ट्रेन का वाणिज्यिक स्तर पर संचालन शुरू किया गया। तबसे लेकर अब तक जर्मन कंपनी एलस्टोम कोरैडिया आईलिंट (Coradia iLint) अलग-अलग मार्गों पर इन ट्रेनों को चला रहा है। 15 सितंबर 2022 को कंपनी ने इसके माइलेज से जुड़ी एक अहम उपलब्धि भी हासिल की। हाइड्रोजन ट्रेन को 1175 किलोमीटर तक बिना हाइड्रोजन दोबारा भरे सफलतापूर्वक चलाया गया। 

ब्रिटेन: ब्रिटेन में हाइड्रोजन ट्रेनों का अलग से उत्पादन नहीं किया गया है, बल्कि यहां पहले से जीवाश्म ईंधन या बिजली पर चल रही ट्रेनों में ही हाइड्रोजन टैंक और फ्यूल सेल लगाए गए। इस तरह के बदलाव का प्रस्ताव सबसे पहले 2018 में दिया गया था। जून 2019 आते-आते हाइड्रोजन ट्रेन का एक वर्किंग मॉडल तैयार कर लिया गया। जानकारी के मुताबिक, सरकार से मंजूरी मिलने के बाद सभी क्लास की 319 ट्रेनों को हाइड्रोजन ट्रेनों में बदला गया। अब ब्रिटेन में इन्हें हाइड्रोफ्लेक्स के नाम से जाना जाता है। ब्रिटेन ने 2040 तक डीजन से चलने वाली सभी ट्रेनों को हाइड्रोजन ट्रेनों में बदलने का लक्ष्य रखा है, ताकि 2050 तक देश अपने कार्बन उत्सर्जन को 80 फीसदी तक कम कर सके। 

स्विट्जरलैंड: 2022 में पहली बार हाइड्रोजन ट्रेन के मॉडल को पेश किया गया था। अगले एक साल में स्विट्जरलैंड की अधिकतर ट्रेनों में हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया। मार्च 2024 में हाइड्रोजन ट्रेनों का उत्पादन करने और इन्हें संचालित करने वाली कंपनी स्टैडलर ने अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया। यह ट्रेन बिना हाइड्रोजन दोबारा भरवाए सबसे लंबी दूरी तक जाने वाली ट्रेन बन गई थी। तब इस ट्रेन ने एक फुल टैंक में 2803 किलोमीटर की दूरी तय की थी। 

चीन: किंगदाओ सिफांग कंपनी लिमिटेड की तरफ से बनाई गई सीआआरसी सिनोवा एच2 हाइड्रोजन ट्रेन को पहली बार 2024 में दुनिया के सामने पेश किया गया था। यह ट्रेन पूरी तरह से हाइड्रोजन फ्यूल पर संचालन के लिहाज से बनाई गई है। इस ट्रेन की एक खास बात यह है कि इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से जो पानी पैदा होता है, वह फ्यूल सेल के जरिए एक टैंक में स्टोर होता है, जहां से इसे प्यूरिफाई कर के ट्रेन में ही सफर कर रहे यात्रियों की जरूरत को पूरा किया जाता है। 

फ्रांस: यूरोप का एक और देश- फ्रांस भी हाइड्रोजन ट्रेनों का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा कर चुका है। फ्रांस की सरकार ने 2021 में ही एलान किया था कि वह अगले पांच साल में 15 हाइडरेल के संचालन पर जोर देगा। इस ट्रेन का चार अलग-अलग मार्गों पर 2025 से संचालन शुरू होना है। फ्रांस में हाइड्रोजन ट्रेनें चलेंगी, उनकी रेंज 600 किमी तक होगी और यह एक बार में 220 यात्रियों को लेकर चल सकेगी। इसकी अधिकतम गति 160 किमी प्रतिघंटा तक होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed