फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   uttar pradesh election 2027 Kanpur Cantt Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation

सीट का समीकरण: भाजपा के किले में 2017 में कांग्रेस तो 2022 में सपा ने लगाई सेंध, ऐसा है कानपुर कैंट का इतिहास

Thu, 10 Sep 2026 03:01 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा Published by: अमन तिवारी Updated Thu, 10 Sep 2026 03:01 PM IST
सार

कानपुर कैंट विधानसभा सीट का इतिहास 1974 से शुरू होता है। शुरुआती दौर में कांग्रेस का दबदबा रहा। 1991 के बाद भाजपा ने इस सीट पर अपना वर्चस्व कायम रखा। हालांकि, 2017 में कांग्रेस और 2022 में सपा ने भाजपा को शिकस्त देकर यहां के राजनीतिक समीकरण बदल दिए। आइए, कानपुर कैंट सीट के सियासी गणित को विस्तार से समझते हैं...

विज्ञापन
uttar pradesh election 2027 Kanpur Cantt Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
कानपुर कैंट सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव के दिन नजदीक आते ही राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। देश की राजनीति का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अभी से चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। चुनाव को लेकर सियासी दल जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। ऐसे में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज चर्चा कानपुर नगर जिले की कानपुर कैंट विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
विज्ञापन


पहले जानते हैं कानपुर कैंट विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से एक जिला कानपुर नगर है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। इनमें- बिल्हौर, बिठूर, कल्याणपुर, सीसामऊ, आर्य नगर, कानपुर कैंट (छावनी), गोविंदनगर, किदवई नगर, महाराजपुर और घाटमपुर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम कानपुर कैंट विधानसभा सीट की बात करेंगे। कानपुर नगर की कानपुर कैंट विधानसभा सीट साल 1967 में अस्तित्व में आई थी। यहां पहला चुनाव 1967 में हुआ था। यहां के पहले विधायक डीएस वाजपेयी बने थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी।
विज्ञापन

कानपुर कैंट विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1967: कांग्रेस के दबदबे के साथ शुरुआत

कानपुर कैंट विधानसभा सीट के पहले यानी कि साल 1967 के विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में डीएस वाजपेयी विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी मनोहर लाल को 724 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में डीएस वाजपेयी को 13227 जबकि एम लाल को 12503 वोट मिले। 

1969: पहली बार जीती भारतीय क्रांति दल
इसके बाद राज्य में 1969 के चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) ने जीत दर्ज की। चुनाव में बीकेडी के मनोहर लाल विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के देवी सहाय बाजपेयी 10379 वोटों से हराया। चुनाव में बीकेडी के मनोहर लाल को 25376 जबकि, कांग्रेस देवी सहाय बाजपेयी 14997 वोट मिले।

1974: कांग्रेस ने की वापसी
इस विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। चुनाव में कांग्रेस के श्याम मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने भारतीय क्रांति दल (BKD) के मनोहर लाल को 3,794 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में श्याम मिश्रा को 26,204 वोट मिले, जबकि मनोहर लाल को 22,410 वोट मिले।

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी
इस चुनाव में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के बाबू राम शुक्ला विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजेंद्र कुमार को 12,514 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में बाबू राम शुक्ला को 26,845 वोट मिले, जबकि राजेंद्र कुमार को 14,331 वोट मिले।

राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
विज्ञापन

uttar pradesh election 2027 Kanpur Cantt Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980: कांग्रेस ने फिर की वापसी
1980 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) के भूधर नारायण मिश्रा विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के मनोहर लाल को 5,899 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भूधर नारायण मिश्रा को 21,947 वोट मिले, जबकि मनोहर लाल को 16,048 वोट मिले।

1985: चेहरा बदलकर लगातार दूसरी बार जीती कांग्रेस 
1985 के विधानसभा चुनाव में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के पशुपति नाथ विजयी हुए। उन्होंने लोक दल (LKD) के लक्ष्मी शंकर को 17,990 वोटों के अंतर से हराया।

1989: पहली बार जीता जनता दल
इस चुनाव में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर जनता दल (जेडी) के गणेश दीक्षित विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के पशुपति नाथ मेहरोत्रा को 7,581 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में गणेश दीक्षित को 29,511 वोट मिले, जबकि पशुपति नाथ मेहरोत्रा को 21,930 वोट मिले।

1991: भाजपा के दबदबे की शुरुआत हुई
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य की सत्ता में कई बड़े उलटफेर हो रहे थे। हालांकि, इस दौरान 1991, 1993 और 1996 के चुनावों में कानपुर कैंट की जनता ने लगातार भाजपा पर ही अपना भरोसा जताया। 1991 से शुरू हुआ भाजपा की जीत का यह सिलसिला वर्ष 2012 तक लगातार बरकरार रहा। 

uttar pradesh election 2027 Kanpur Cantt Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
सतीश महाना का राजनीतिक सफर - फोटो : अमर उजाला
सतीश महाना ने लगातार पांच बार जीते
1991 के विधानसभा चुनाव में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के सतीश महाना विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के श्याम मिश्रा को 15,970 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सतीश महाना को 33,897 वोट मिले, जबकि श्याम मिश्रा को 17,927 वोट मिले। इस चुनाव के बाद राज्य में 1993, 1996, 2002 और 2007 के चुनाव हुए। इन चुनावों में भाजपा की तरफ से चुनाव लड़ते हुए सतीश महाना ने लगातार जीत हासिल की। 2008 में हुए परिसीमन के बाद कई सीटों का गणित बदला। बदले गणित के बाद महाना ने 2012 में महाराजपुर सीट पर चले गए। जहां से वे लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुके हैं। 

कौन हैं सतीश महाना जिन्होंने लगातार जीता 8 विधानसभा चुनाव?
सतीश महाना वर्तमान में उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा के अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे कानपुर जिले की महराजपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। राजनीतिक सफर की बात करें तो वे लगातार आठ बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं-जिसमें वे 1991 से 2007 तक कानपुर कैंट सीट से लगातार 5 बार (1991, 1993, 1996, 2002 और 2007) विधायक चुने गए, और 2012 में परिसीमन के बाद वे महाराजपुर सीट से लगातार 3 बार (2012, 2017 और 2022) चुनाव जीतकर विधायक बने। विधानसभा अध्यक्ष बनने से पूर्व वे उत्तर प्रदेश सरकार में नगर विकास राज्य मंत्री और औद्योगिक विकास कैबिनेट मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

भाजपा ने जीता लगातार छठां चुनाव
2012 के चुनाव में कानपुर नगर जिले की कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर भाजपा की तरफ से लड़ते हुए रघुनंदन सिंह भदौरिया विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के मोहम्मद हसन रूमी को 9,308 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रघुनंदन सिंह भदौरिया को 42,551 वोट मिले, जबकि मोहम्मद हसन रूमी को 33,243 वोट मिले। 1991 से शुरू हुआ भाजपा की जीत का यह सिलसिला वर्ष 2012 तक लगातार बरकरार रहा। जबकि कांग्रेस के अब्दुल मन्नान अंसारी 31,122 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।

uttar pradesh election 2027 Kanpur Cantt Assembly seat history bjp sp bsp congress political equation
2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
2017: खत्म हुआ भाजपा का एकछत्र राज, कांग्रेस ने जीता कानपुर कैंट 
2012 के बाद उत्तर प्रदेश में 2017 में चुनाव हुए। इन चुनावों में राज्य में भाजपा कानपुर कैंट विधानसभा सीट हार गई और उसका इस सीट से 25 वर्षों से ज्यादा का एकछत्र राज खत्म हो गया। चुनाव में कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर कांग्रेस के सोहेल अख्तर अंसारी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के रघुनंदन सिंह भदौरिया को 9,364 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सोहेल अख्तर अंसारी को 81,169 वोट मिले, जबकि रघुनंदन सिंह भदौरिया को 71,805 वोट प्राप्त हुए। जबकि बसपा के नसीम अहमद 14,079 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2022: कानपुर कैंट सीट पर पहली बार जीती सपा
इस चुनाव में कानपुर नगर जिले की कानपुर कैंट विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के मोहम्मद हसन रूमी विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के रघुनंदन सिंह भदौरिया को 19,987 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद हसन रूमी को 94,729 वोट मिले, जबकि रघुनंदन सिंह भदौरिया को 74,742 वोट मिले। जबकि कांग्रेस के सोहेल अख्तर अंसारी 13,279 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed