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Tapas Drone: 'तापस ड्रोन' को लेकर भारतीय नौसेना और वायुसेना ने दिखाई रुचि, DRDO के साथ क्षमताओं को लेकर चर्चा

Wed, 14 Feb 2024 09:06 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 14 Feb 2024 09:06 PM IST
सार

डीआरडीओ द्वारा दो तापस ड्रोन को अंडमान और निकोबार द्वीप क्षेत्र में परीक्षण के लिए भारतीय नौसेना को सौंपने की भी संभावना है। 

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Indian Navy and the Indian Air Force have shown interest in indigenously Tapas drone
तापस ड्रोन - फोटो : ANI

विस्तार

भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित मध्यम ऊंचाई वाले लंबे समय तक काम करने वाले 'तापस ड्रोन' में खास रुचि दिखाई है। रक्षा अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन की क्षमताओं और सेवाओं में इसकी इस्तेमाल के बारे में रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के साथ चर्चा की गई। इस दौरान ड्रोन की क्षमताओं के विस्तार पर खुलकर चर्चा की गई। 
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ड्रोन को लेकर अधिकारियों ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा दो तापस ड्रोन को अंडमान और निकोबार द्वीप क्षेत्र में परीक्षण के लिए भारतीय नौसेना को सौंपने की भी संभावना है। अधिकारी ने बताया अगर परीक्षण सफल होते है, तो 10-12 ड्रोन के ऑर्डर दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना आगे का फैसला लेने से पहले अन्य मुद्दों के साथ-साथ ड्रोन के प्रदर्शन को भी देखेगी।
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गौरतलब है कि डीआरडीओ ने तापस ड्रोन परियोजना को ठंडे बस्ते में डालने की खबरों को दरकिनार करते हुए कहा कि तापस ड्रोन को ज्यादा विकसित करने के लिए इसे जारी रख रहा है। तापस ड्रोन का रक्षा बलों द्वारा परीक्षण किया गया है और परीक्षण के दौरान वे 28,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में कामयाब रहा और 18 घंटे से अधिक समय तक उड़ान भर सका।
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डीआरडीओ के अधिकारियों ने कहा कि संबंधित प्रयोगशाला ड्रोन में डिजाइन में सुधार और शक्ति बढ़ाने पर काम करेगी ताकि इसे ऊंचाई और सहनशक्ति की सेवा आवश्यकताओं के लिए अधिक उपयुक्त बनाया जा सके, जिसे वह हाल के मूल्यांकन में पूरा करने में सक्षम नहीं था। डॉ. समीर वी कामत के नेतृत्व वाली प्रमुख रक्षा अनुसंधान एजेंसी प्रमुख ड्रोन परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिसमें 'घातक' और 'आर्चर' जैसे यूएवी शामिल हैं।
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