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Exercise Milan 2022: क्या है मिलन अभ्यास, यह भारत के लिए क्यों मायने रखता है?
Mon, 03 Jan 2022 01:03 PM IST
प्रतिभा ज्योति
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 03 Jan 2022 01:03 PM IST
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indian navy and royal navy exercise file photo
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ani
विस्तार
नौसेना फरवरी के अंत में अपना सबसे बड़ा बहुपक्षीय नौसेनिक अभ्यास 'मिलन' आयोजित करने के लिए तैयार है। भारत ने 25 फरवरी से विशाखापत्तनम में बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलान में भाग लेने के लिए कुल 46 मित्र देशों को न्यौता भेजा है। जिन देशों को अभ्यास के लिए निमंत्रण दिया गया है उनमें रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, ईरान, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, बांग्लादेश, ब्राजील, संयुक्त अरब अमीरात, अन्य शामिल हैं।कोरोना महामारी के कारण 2020 में नहीं हो पाया अभ्यास
2020 में यह अभ्यास होना था और इसके लिए 41 देशों को आमंत्रित किया गया था, उनमें से 30 ने पुष्टि की थी लेकिन दुनिया भर में कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण अभ्यास को रद्द कर दिया गया था। 2018 में इस अभ्यास में 17 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। मिलन 2022 इस आयोजन का ग्यारहवां संस्करण है और इसे पूर्वी नौसेना कमान के तत्वावधान में आयोजित किया जाएगा।
क्या है मिलन अभ्यास?
यह सबसे जटिल नौसैनिक अभ्यास है जो भारत किसी भी अन्य देश के साथ करता है। मिलन एक बहुपक्षीय युद्ध नौसैनिक अभ्यास है जिसे 1995 में शुरू किया गया था। उद्घाटन संस्करण में भारतीय नौसेना के अलावा, इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड की नौसेनाओं ने भाग लिया था।
Indian Navy
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इस आयोजन का भारत के लिए क्या महत्व है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आयोजन उपमहाद्वीप के समुद्र तटों में भारत की समुद्री श्रेष्ठता को दिखाने और उसकी समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनजर चीन की घेराबंदी के लिए यह जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का नौसैनिक विस्तार भारत के लिए चुनौतियां पैदा करता है इसलिए भारत के लिए ऐसे अभ्यासों की बहुत जरूरत है। हिंद महसागर तेजी से चीन और भारत के लिए एक भू-रणनीतिक केंद्र बिंदु बनता जा रहा है, क्योंकि दोनों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक तरफ जहां चीन आर्थिक और रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए रणनीतिक बंदरगाहों तक पहुंच सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है, वहीं भारत की भूमिका को समुद्री मार्ग और नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षक के रूप में देखा जा रहा है। इस अभ्यास के जरिए भारत को अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और समुद्री सहयोग हासिल करने का एक मौका मिलता है।
नौसेना को क्या है उम्मीद
मिलन 2022 में लगभग 46 देशों की भागीदारी एक प्रतिष्ठित समुद्री अभ्यास में रूपांतरित हो गया है। नौसेना ने उम्मीद जताई है कि इस दौरान समुद्र में एक साथ परिचालन करने से सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सभी के लिए लाभकारी होगा। इससे भाग लेने वाले देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह आयोजन उपमहाद्वीप के समुद्र तटों में भारत की समुद्री श्रेष्ठता को दिखाने और उसकी समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। चीन की बढ़ती नौसैनिक ताकत और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती उपस्थिति के मद्देनजर चीन की घेराबंदी के लिए यह जरूरी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का नौसैनिक विस्तार भारत के लिए चुनौतियां पैदा करता है इसलिए भारत के लिए ऐसे अभ्यासों की बहुत जरूरत है। हिंद महसागर तेजी से चीन और भारत के लिए एक भू-रणनीतिक केंद्र बिंदु बनता जा रहा है, क्योंकि दोनों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक तरफ जहां चीन आर्थिक और रणनीतिक लाभ हासिल करने के लिए रणनीतिक बंदरगाहों तक पहुंच सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है, वहीं भारत की भूमिका को समुद्री मार्ग और नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षक के रूप में देखा जा रहा है। इस अभ्यास के जरिए भारत को अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और समुद्री सहयोग हासिल करने का एक मौका मिलता है।
नौसेना को क्या है उम्मीद
मिलन 2022 में लगभग 46 देशों की भागीदारी एक प्रतिष्ठित समुद्री अभ्यास में रूपांतरित हो गया है। नौसेना ने उम्मीद जताई है कि इस दौरान समुद्र में एक साथ परिचालन करने से सामाजिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सभी के लिए लाभकारी होगा। इससे भाग लेने वाले देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाने का रास्ता खुलेगा।
दूसरे देशों को क्या फायदा मिलता है?
जिस तरह यह अभ्यास दूसरे देशो के साथ संबंध मजबूत करने का मौका भारत को देता है वैसे ही यह मौका दूसरे देशों के लिए भारत के साथ अपने रिश्तों को सहेजने का है। इस नौसैनिक अभ्यास के भागीदार देशों को भी इससे लाभ मिलता है। विशेष रूप से छोटे देश जिनमें क्षमता और संसाधनों की कमी है, वे इस अवसर का लाभ उठाते हैं।
चीन को गुस्सा क्यों आ जाता है?
भारतीय नौसेना के मिलन अभ्यास से चीन को गुस्सा आ जाता है। मिलन 1995 से अस्तित्व में है और इस आयोजन ने हमेशा समुद्री क्षेत्रों में शांतिपूर्ण नौसैनिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया है। भाग लेने वाले देशों के बीच पेशेवर अभ्यासों, सेमिनारों, सामाजिक कार्यक्रमों और खेल का आयोजन होता है, लेकिन 2018 में यह अभ्यास होने पर चीनी पर्यवेक्षक परेशान हो गए थे।
'ग्लोबल टाइम्स' की रिपोर्टों में मिलन अभ्यास को एक भड़काऊ रणनीति के रूप में चित्रित किया गया, जिसका उद्देश्य 'भूमि से समुद्र तक तनाव फैलाना' और दक्षिण एशिया में चीनी प्रभाव को कम करने का भारतीय प्रयास है। ग्लोबल टाइम्स का कहना था कि यह अभ्यास चीन के साथ तनाव को बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि इस बार भी चीन इस अभ्यास पर कोई न कोई प्रतिक्रिया दे सकता है।
जिस तरह यह अभ्यास दूसरे देशो के साथ संबंध मजबूत करने का मौका भारत को देता है वैसे ही यह मौका दूसरे देशों के लिए भारत के साथ अपने रिश्तों को सहेजने का है। इस नौसैनिक अभ्यास के भागीदार देशों को भी इससे लाभ मिलता है। विशेष रूप से छोटे देश जिनमें क्षमता और संसाधनों की कमी है, वे इस अवसर का लाभ उठाते हैं।
चीन को गुस्सा क्यों आ जाता है?
भारतीय नौसेना के मिलन अभ्यास से चीन को गुस्सा आ जाता है। मिलन 1995 से अस्तित्व में है और इस आयोजन ने हमेशा समुद्री क्षेत्रों में शांतिपूर्ण नौसैनिक सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया है। भाग लेने वाले देशों के बीच पेशेवर अभ्यासों, सेमिनारों, सामाजिक कार्यक्रमों और खेल का आयोजन होता है, लेकिन 2018 में यह अभ्यास होने पर चीनी पर्यवेक्षक परेशान हो गए थे।
'ग्लोबल टाइम्स' की रिपोर्टों में मिलन अभ्यास को एक भड़काऊ रणनीति के रूप में चित्रित किया गया, जिसका उद्देश्य 'भूमि से समुद्र तक तनाव फैलाना' और दक्षिण एशिया में चीनी प्रभाव को कम करने का भारतीय प्रयास है। ग्लोबल टाइम्स का कहना था कि यह अभ्यास चीन के साथ तनाव को बढ़ा सकता है। माना जा रहा है कि इस बार भी चीन इस अभ्यास पर कोई न कोई प्रतिक्रिया दे सकता है।