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लोकसभा में पेश किया गया भारतीय आयुर्विज्ञान संशोधन विधेयक 2019

Thu, 27 Jun 2019 05:56 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 27 Jun 2019 05:56 PM IST
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Indian Medical science Amendment Bill 2019 presented in Lok Sabha
भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद - फोटो : फाइल फोटो

लोकसभा में गुरुवार को भारतीय आयुर्विज्ञान संशोधन विधेयक 2019 पेश किया गया। इसमें यह निश्चय किया गया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के कार्यों को दो साल के लिए एक शासी बोर्ड को सौंप दिया जाए और इस दौरान परिषद का पुनर्गठन किया जाए ।

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निचले सदन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने ‘भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (संशोधन) विधेयक-2019’ पेश किया। यह विधेयक इस संबंध में भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन दूसरा अध्यादेश 2019 को प्रतिस्थापित करने के लिए लाया गया है।
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विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1956 को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के पुनर्गठन और भारत के लिए एक चिकित्सक रजिस्टर रखे जाने तथा संबंधित विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियमित किया गया था।
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इस परिषद के कामकाज की काफी लंबे समय से समीक्षा हो रही थी और उसकी अनेक विशेषज्ञ निकायों द्वारा समीक्षा की गई थी जिसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की विभाग संबंधी संसदीय समिति भी शामिल थी । इस समिति ने मार्च 2016 में अपनी रिपोर्ट में परिषद पर गंभीर आरोप लगाए थे।

समिति ने यह सिफारिश की थी कि सरकार को यथाशीघ्र एक नया व्यापक विधेयक लाना चाहिए जिससे आयुर्विज्ञान शिक्षा और आयुर्विज्ञान व्यवसाय कर विनियामक प्रणाली की पुन: संरचना और पुनरूद्धार किया जा सके। इसके तहत दिसंबर 2017 में लोकसभा में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग विधेयक 2017 दोबारा स्थापित किया गया था जो 16वीं लोकसभा के विघटन के कारण खत्म हो गया।

बहरहाल, उक्त परिषद द्वारा की गई मनमानी को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा उस परिषद के स्थान पर एक वैकल्पिक तंत्र स्थापित करने के लिए तुरंत उपाय करना जरूरी था जिससे देश में आयुर्विज्ञान शिक्षा के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता लाई जा सके।


इस उद्देश्य से यह तय किया गया है कि भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद के कार्यो को दो वर्षों की अवधि या उस समय तक जब तक उक्त परिषद का पुनर्गठन नहीं हो जाता, तब तक एक शासी बोर्ड को कार्यों को सौंपा जाए। इस प्रस्तावित बोर्ड में विख्यात डॉक्टर भी शामिल हों। इसमें कहा गया कि चूंकि संसद सत्र में नहीं थी और अत्यावश्यक विधान बनाना जाना जरूरी था, इसलिये राष्ट्रपति ने 26 सितंबर 2018 को भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद संशोधन अध्यादेश 2018 प्रख्यापित किया था। 

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