{"_id":"5834cb994f1c1b242413b8eb","slug":"indian-government-wants-to-be-a-cashless-society","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार चाहती है कैशलेस हो भारतीय सोसाइटी","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सरकार चाहती है कैशलेस हो भारतीय सोसाइटी
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Wed, 23 Nov 2016 04:20 AM IST
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सरकार चाहती है कि भारत में भी कैशलेस सोसाइटी बने और यहां भी दुनिया के अन्य देशों की तरह वस्तु एवं सेवाओं की खरीदारी या उपयोग के लिए कैशलेस ट्रांजेक्शन हो। इसका संकेत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को दिया और वे पहले भी ऐसा कह चुके हैं।
मंगलवार को यहां पार्टी के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में कैशलेस का चलन बढ़ रहा है। इस समय दुनियाभर में नकदी में होने वाले ट्रांजेक्शन की औसत दर चार फीसदी है, जबकि भारत में इसकी औसत दर 12 फीसदी है। सरकार का प्रयास है कि यह एक अंक में आए।
कैशलेस ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि पहले मोबाइल फोन का जिक्र अमीर आदमी को लेकर होता था। आज मोबाइल कितनी सुविधाएं दे रहा है। कई चीजें डिजिटल हो गयी हैं। डिजिटल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है।
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काले धन पर मोदी सरकार की पहल गिनाते हुए जेटली ने कहा कि उनका पहला फैसला ही काले धन के खिलाफ था। सरकार ने पहले एसआईटी बनायी, दूसरी पहल थी जनधन योजना। इसके बाद सरकार ने काला धन रखने वालों को मौका दिया कि अपना कालाधन सार्वजनिक करो। ऐसे लोगों को 45 फीसदी टैक्स में जमा कराने का अवसर दिया। ढाई साल का यह कदम 70 सालों के कालेधन को खत्म करने वाला था।
गोपनीयता के लिए पहले एटीएम रिकैलीब्रेट नहीं किए
उन्होंने यह भी बताया कि आखिर 8 नवंबर से पहले देश के एटीएम को रिकैलिब्रेट क्यों नहीं कर पाए। वित्त मंत्री ने कहा कि 8 नवंबर से पहले हम ऐसा नहीं कर सकते थे, क्योंकि कालेधन को रोकने के उद्देश्य से नोटबंदी को गोपनीय रखना था। उल्लेखनीय है कि नोटबंदी की घोषणा के एक दिन बाद भी संवाददाताओं से बातचीत में जेटली ने कहा था कि इस कदम से ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा और कैशलेस सोसाइटी बनाने में मदद मिलेगी।
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मंगलवार को यहां पार्टी के एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि दुनियाभर में कैशलेस का चलन बढ़ रहा है। इस समय दुनियाभर में नकदी में होने वाले ट्रांजेक्शन की औसत दर चार फीसदी है, जबकि भारत में इसकी औसत दर 12 फीसदी है। सरकार का प्रयास है कि यह एक अंक में आए।
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कैशलेस ट्रांजेक्शन के बढ़ते चलन का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि पहले मोबाइल फोन का जिक्र अमीर आदमी को लेकर होता था। आज मोबाइल कितनी सुविधाएं दे रहा है। कई चीजें डिजिटल हो गयी हैं। डिजिटल उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है।
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काले धन पर मोदी सरकार की पहल गिनाते हुए जेटली ने कहा कि उनका पहला फैसला ही काले धन के खिलाफ था। सरकार ने पहले एसआईटी बनायी, दूसरी पहल थी जनधन योजना। इसके बाद सरकार ने काला धन रखने वालों को मौका दिया कि अपना कालाधन सार्वजनिक करो। ऐसे लोगों को 45 फीसदी टैक्स में जमा कराने का अवसर दिया। ढाई साल का यह कदम 70 सालों के कालेधन को खत्म करने वाला था।
गोपनीयता के लिए पहले एटीएम रिकैलीब्रेट नहीं किए
उन्होंने यह भी बताया कि आखिर 8 नवंबर से पहले देश के एटीएम को रिकैलिब्रेट क्यों नहीं कर पाए। वित्त मंत्री ने कहा कि 8 नवंबर से पहले हम ऐसा नहीं कर सकते थे, क्योंकि कालेधन को रोकने के उद्देश्य से नोटबंदी को गोपनीय रखना था। उल्लेखनीय है कि नोटबंदी की घोषणा के एक दिन बाद भी संवाददाताओं से बातचीत में जेटली ने कहा था कि इस कदम से ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिलेगा और कैशलेस सोसाइटी बनाने में मदद मिलेगी।