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Zorawar Light Tank: स्वदेशी कम वजनी जोरावर टैंक में लगाई जाएगी ये खास तोप! जल्द शुरू होंगे ट्रायल्स

Tue, 03 Sep 2024 06:00 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 03 Sep 2024 06:00 PM IST
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सार
हाल ही में एक साक्षात्कार में, डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने डीआरडीओ और एलएंडटी के साथ मिल कर बनाए गए जोरावर लाइट टैंक में स्वदेश में ही बनी 105 एमएम की तोप लगाने की बात कही थी।
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Indian Army Zorawar Light tanks to have these special Artilleries DRDO Trials to begin soon news and updates
जोरावर टैंक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत के स्वदेशी लाइट टैंक जोरावर के ट्रायल की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस टैंक में देश में ही तैयार की गई 105 मिमी की तोप लगाई जाएगी, जो प्रोटोटाइप में लगी कॉकरिल 105 मिमी हाई प्रेशर (एचपी) तोप की जगह लेगी। फिलहाल ये टैंक गुजरात में एलएंडटी की हजीरा फैसिलिटी में है, जहां इसमें लगने वाली 105 मिमी तोप के ट्रायल के लिए इसे अवाडी स्थित कॉम्बैट व्हीकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (CVRDE) में ले जाया जाएगा। 


हाल ही में एक साक्षात्कार में, डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने डीआरडीओ और एलएंडटी के साथ मिल कर बनाए गए जोरावर लाइट टैंक में स्वदेश में ही बनी 105 एमएम की तोप लगाने की बात कही थी। डॉ. कामत ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक जोरावर लाइट टैंक का प्रोडक्शन शुरू होगा, तब तक उसमें विदेश से मंगवाए गए इक्विपमेंट्स की बजाए स्थानीय तौर पर विकसित इक्विपमेंट्स को लगाया जाएगा। जोरावर में अमेरिकी कंपनी का कमिंस 750hp इंजन लगाया गया है,  वहीं इसके प्रोडक्शन वैरिएंट में स्थानीय तौर पर बने इंजन लगाए जाएंगे, जो कमिंस और भारतीय सहायक कंपनी मिल कर बनाएंगी। 


सूत्रों ने बताया कि जोरावर टैंक में भारत-फोर्ज की बनाई 105 मिमी की तोप लगाई जा सकती है। कंपनी के पास यह कैनन पहले से ही मौजूद है। कंपनी से इसमें कुछ बदलाव करने के लिए कहा गया है। भारतीय सेना ने शुरुआत में केवल 59 जोरावर टैंकों का ऑर्डर दिया है। सूत्रों ने बताया कि अवाडी में कैनन के ट्रायल पूरे होने के बाद जोरावर को चंडीगढ़ ले जाया जाएगा, जहां से उसे न्योमा में माहे फील्ड फायरिंग रेंज में ले जाया जाएगा। बता दें, कि पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास स्थित है। इस दौरान जोरावर के शून्य से भी नीचे तापमान में हाई एल्टीट्यूड इलाकों में परीक्षण किए जाएंगे। 

सूत्रों के मुताबिक जीरो डिग्री तापमान में ट्रायल्स पूरे होने के बाद जोरावर को सूरतगढ़ के नजदीक महाजन फील्ड फायरिंग रेंज ले जाया जाएगा, जहां 50 डिग्री के ऊपर के तापमान पर टैंक के ट्रायल्स किए जाएंगे। जोरावर के ट्रायल्स 2026 तक चलेंगे, जिसके बाद उसका प्रोडक्शन शुरू किया जाएगा। भारतीय सेना ने शुरुआत में केवल 59 जोरावर टैंकों का ऑर्डर दिया है। बाद में 300 अतिरिक्त टैंक खरीदे जाएंगे। जोरावर चीन के मौजूदा हल्के पहाड़ी टैंकों, जैसे ZTQ टाइप-15 का मुकाबला करेगा।  

जोरावर टैंक की खूबियां
जोरावर लाइट वेट टैंक है, जिसे भारतीय सेना को लद्दाख जैसे हाई एल्टीट्यूड इलाकों में बेहतर क्षमता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका वजन सिर्फ़ 25 टन है, जो टी-90 जैसे भारी टैंकों के वजन का आधा है। जोरावर में 105 मिमी  कैलिबर की गन लगी है, जिससे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) दागीं जा सकती हैं। वहीं इसमें मॉड्यूलर एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर और एक एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम लगा है, जो इसे हमलों से सुरक्षित रखता है। सेना ने चरणों में लगभग 350 हल्के टैंक हासिल करने की योजना बनाई है, जिससे इसकी माउंटेन वारफेयर क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इसकी लगभग छह रेजिमेंट बनाई जा सकेंगी। 
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