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Indian Army: एलएसी पर चीन की बढ़ती आक्रामकता, सेना आज तय करेगी रणनीति; सैन्य-नागरिक समन्वय पर रहेगा फोकस

Wed, 07 Jan 2026 04:10 AM IST
शुभम कुमार आशुतोष भाटिया
आशुतोष भाटिया Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 07 Jan 2026 04:10 AM IST
सार

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों के मद्देनजर देहरादून में सेना की 14वीं इंफैट्री डिविजन ने सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें सीमा सुरक्षा, नागरिक-सैनिक समन्वय और मध्य सेक्टर में चीन की आक्रामकता का बहुआयामी जवाब तैयार करने पर विचार किया जाएगा।

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Indian army will decide on its strategy today Amidst increasing Chinese aggression LAC the
भारतीय सेना (File Photo) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन की बढ़ती आक्रामकता देखते हुए सेना सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी रणनीति पुख्ता करने में जुटी है। इसी सिलसिले में देहरादून में सेना की 14वीं इंफैट्री डिविजन बुधवार को एक अहम सेमिनार का आयोजन कर रही है, जिसका मकसद चीन के आक्रामक रुख के मद्देनजर सैन्य-नागरिक समन्वय पर जोर देना है। सेमिनार में सेना के अधिकारी और रक्षा विशेषज्ञ नागरिक जगत के साथ मिलकर सामरिक सोच की संस्कृति को बढ़ावा देने पर विचार करेंगे।

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सेमिनार का विषय 'फोर्टिफाइंग हिमालयाज
प्रोएक्टिव सिविल मिलिट्री फ्यूजन स्ट्रैटेजी इन मिडिल सेक्टर टू काउंटर चाइनीज एसर्टिवनेस' रखा गया है। सूत्रों ने बताया कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से सटी एलएसी के हिस्से वाला मध्य सेक्टर अपेक्षाकृत शांत माना जाता है, लेकिन हाल ही में चीन ने सीमा के पास सड़क, पुल, सैन्य ढांचे और सीमावर्ती गांवों का तेजी से निर्माण कर इस क्षेत्र की सामरिक महत्ता बढ़ा दी है। लिहाजा यहां सतर्कता बरतने की जरूरत है। चीन की आक्रामकता अब केवल पारंपरिक सैन्य गश्त तक सीमित नहीं रही है।
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संवेदनशील इलाकों में बुनियादी ढांचे, पीएलए सैनिकों की बढ़ती आवाजाही, आक्रामक गश्त, साइबर गतिविधियां और चीन की सीमा के भीतर स्थित गांवों का सैन्यीकरण नई चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। सेमिनार में मंथन होगा कि एक बहुआयामी और दीर्घकालिक जवाब के लिए भारत कौनसे जरूरी कदम उठाए।
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सैन्य-नागरिक समन्वय जरूरी
जमीनी स्तर पर सेना यहां भले तैनात है, लेकिन सेना का मानना है कि दीर्घकालिक बढ़त के लिए नागरिक क्षेत्र में इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीक, अकादमिक जगत, उद्योग और प्रशासनिक ढांचे का सैन्य क्षमताओं के साथ एकीकरण जरूरी है। संकट आने पर जल्दबाजी में काम करने की बजाय उत्तराखंड और हिमाचल के सीमावर्ती इलाके में शांति काल में ही अपनी स्थिति मजबूत की जानी चाहिए।


लिहाजा यहां टिकाऊ बुनियादी ढांचा, बेहतर संचार नेटवर्क, उन्नत सेंसर नेटवर्क और सीमावर्ती समुदायों को रचनात्मक रूप से जोड़ने का अवसर मौजूद है। सेमिनार में सीमावर्ती समुदायों की भूमिका पर विशेष फोकस रहेगा क्योंकि यह समुदाय सीमा सुरक्षा और खुफिया सूचना की दृष्टि से अहम भूमिका निभाते हैं।

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